जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों को आतंकियों के खिलाफ बड़ी कामयाबी मिली है. 4 सितंबर की शाम इंडियन आर्मी की 15 कोर (चिनार कोर) ने बताया था कि खुफिया जानकारी के आधार पर एक सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया है. इंडियन आर्मी, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने बडगाम के अशदार गली इलाके में कुछ संदिग्धों को घेर लिया है. अभी तक ये क्लियर नहीं था कि संदिग्ध असल में कौन हैं? सुरक्षाबलों ने संदिग्धों से सामने आने को कहा. इस पर उधर से गोलियां चलने लगीं.
यूसमर्ग के ऊंचे इलाकों में छिपा था लश्कर कमांडर, सुरक्षाबलों ने खोजकर ढेर कर दिया
जम्मू-कश्मीर के बडगाम में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा के एक पाकिस्तानी कमांडर को मार गिराया है. उसकी पहचान यासिर के तौर पर हुई है. अशदार गली इलाके में इंडियन आर्मी, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने खुफिया इनपुट के आधार पर जॉइंट सर्च ऑपरेशन शुरू किया था.

इसके बाद जबरदस्त मुठभेड़ हुई, जिसमें एक आतंकवादी मारा गया. उसके पास से एक AK राइफल और कई हथियार मिले. बाद में उसकी पहचान हुई. पता चला कि वो लश्कर-ए-तैयबा का एक पाकिस्तानी कमांडर था. उसका नाम यासिर था. इस ऑपरेशन में इंडियन आर्मी की स्पेशल फोर्सेज और 53 राष्ट्रीय राइफल्स ने हिस्सा लिया. साथ ही जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने ये सुनिश्चित किया कि वो निकलकर भाग न पाए.
इंडिया टुडे के सूत्रों के अनुसार, यासिर लश्कर-ए-तैयबा के बड़े सुलेमान मूसा ग्रुप का हिस्सा था. हालांकि, वह लगभग एक साल पहले ग्रुप से अलग हो गया था और तब से अलग से काम कर रहा था. सुरक्षा एजेंसियां उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थीं. सूत्रों ने यह भी बताया कि ग्रुप से अलग होने के बाद यासिर इलाके में लश्कर के एक अहम सदस्य के तौर पर उभरा था. यूसमर्ग के ऊंचे इलाकों में उसकी मौजूदगी की वजह से सुरक्षा बलों ने तलाशी अभियान शुरू किया, जिसके बाद मुठभेड़ हुई.
यूसमर्ग में यह मुठभेड़ ऐसे समय में हुई, जब सुरक्षाबल पूरे जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान तेज कर रहे हैं. यासिर के मारे जाने के बाद एजेंसियां अब उसके नेटवर्क, लश्कर-ए-तैयबा के दूसरे सदस्यों के बारे में पता लगा रही हैं. सुरक्षा एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि क्या जम्मू-कश्मीर में हाल की आतंकवादी गतिविधियों की योजना बनाने, उन्हें अंजाम देने या उनमें मदद करने में यासिर की कोई भूमिका थी. क्योंकि इतना कन्फर्म है कि यासिर, सुलेमान मूसा के नेटवर्क से जुड़ा था.
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सुलेमान मूसा को हाशिम मूसा के नाम से भी जाना जाता है. मूसा पहलगाम हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक था. हमले के कुछ महीनों बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने श्रीनगर के डाचीगाम जंगल इलाके में एक मुठभेड़ में मूसा को मार गिराया.
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