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'गंगा का पानी तो खुद ही साफ हो जाता है... ' कुंभ में गंगा में बैक्टीरिया मिलने पर श्रीश्री रविशंकर बोले

Mahakumbh 2025: आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि लोगों की भक्ति ने करोड़ों श्रद्धालुओं को महाकुंभ में खींचा. Faecal Coliform Bacteria विवाद पर भी उन्होंने खुलकर बात की. जानिए उन्होंने क्या-क्या कहा? एक वैज्ञानिक तर्क भी दिया उन्होंने.

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आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि गंगा के पानी से बढ़िया कोई पानी नहीं (facebook.com/gurudev)

महाकुंभ का समापन हो चुका है, लेकिन जब मेला चल रहा था, तो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने एक रिपोर्ट जारी की थी. इसमें गंगा और यमुना के पानी में फेकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया (Faecal Coliform Bacteria) का स्तर बढ़ा हुआ बताया गया था. इस पर अब आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि गंगा के पानी के गुण, बैक्टीरिया को पनपने नहीं देते हैं. गंगा के पानी में खुद को साफ करने की क्षमता है. श्रीश्री रविशंकर ने यह भी कहा कि लोगों की भक्ति ही थी जो करोड़ों श्रद्धालुओं ने महाकुंभ में डुबकी लगाई. 

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इंडिया टुडे के राजदीप सरदेसाई के साथ एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में रविशंकर ने कहा कि साइंटिस्ट्स ने पाया कि गंगा दुनिया की सबसे मज़बूत वाटर बॉडी में से एक है. आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के फाउंडर श्रीश्री रविशंकर ने कहा,

“मैं केवल तीन चीजें देखता हूं जो करोड़ों भक्तों को प्रेरित करती हैं- आस्था, आस्था और आस्था. यह लोगों की भक्ति है जो उन्हें प्रेरित करती है. यह त्योहार भारत के मानस में गहराई से समाया हुआ है.”

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दुनिया भर में रविशंकर के लाखों फॉलोअर्स हैं. उन्होंने कहा कि पवित्र स्नान करना, अपनी आत्मा की चेतना को ऊपर ले जाने का एक तरीका है.

दरअसल, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को जानकारी देते हुए CPCB की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि गंगा में फेकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया खतरनाक स्तर पर पाए गए हैं. इस पर रविशंकर ने कहा कि साइंटिस्ट्स ने गंगा के पानी पर एक्सपेरिमेंट्स किए हैं. इनमें यह पाया कि गंगा का पानी खुद को शुद्ध करता है और इसमें बैक्टीरिया को पनपने का मौका नहीं मिलता. उन्होंने कहा कि पानी की गुणवत्ता बहुत ही चौंकाने वाली है, जो गंगा के बारे में हमारी हजारों साल पुरानी मान्यताओं को प्रमाणित करती है. उसमें खुद को साफ़ करने की खूबी है. 

आध्यात्मिक गुरु ने कहा कि पहले लोग और राजनीतिक नेता कुंभ में आकर "छिपकर" स्नान करते थे क्योंकि उन्हें शर्म आती थी. हम अपनी जड़ों का सम्मान नहीं कर रहे थे. अब वो दौर खत्म हो गया है. हम गर्व से ऐलान कर रहे हैं कि हम कौन हैं. उन्होंने कहा कि हम खुद के प्रति ईमानदार हैं, वो बेईमानी, वो छल, वो पाखंड खत्म हो गया है.

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वीडियो: महाकुंभ के आखिरी दिन क्या दिखा?

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