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स्कूलों में नहीं होंगे शेरू, कालू जैसे नाम, इस राज्य ने 'अच्छे' नामों की लिस्ट बनाई, चुन लीजिए

इस पहल में सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 9 तक के स्टूडेंट्स शामिल होंगे. अधिकारियों ने बताया कि माता-पिता की लिखित सहमति के बिना किसी का भी नाम नहीं बदला जाएगा. स्कूलों से कहा गया है कि वे ऐसे मामलों की पहचान संवेदनशीलता से करें.

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राजस्थान में बच्चों के ऐसे नाम हटाए जाएंगे जिनसे उनके डेवलपमेंट पर असर पड़ने की संभावना है (प्रतीकात्मक फोटो: India Today)

राजस्थान सरकार ने 'चाइल्ड डेवलपमेंट' यानी बच्चों के विकास की दिशा में एक अनोखी पहल शुरू की है. इस पहल के तहत बच्चों को उनका नाम बदलने की परमिशन दी जाएगी. सरकार के मुताबिक इसका उद्देश्य ‘जातिसूचक’, 'अटपटे', ‘अपमानजनक’ और आउटडेटेड हो चुके नामों को बदलना है. इसकी जगह अब अच्छी मीनिंग वाले नाम रखे जाएंगे. सरकार का कहना है कि अपमानजनक लगने वाले नामों से बुलाए जाने पर बच्चों के दिमाग पर बुरा असर पड़ता है.

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'सार्थक नाम अभियान' के तहत, पेरेंट्स से सलाह-मशविरा करके, शेरू, शैतान, कालू और टिंकू जैसे नामों को बदलकर आरव, अथर्व, बालमुकुंद और बद्रीनाथ जैसे नाम रखे जा सकते हैं. लड़कियों के पेरेंट्स के पास आराध्या, अन्नपूर्णा और वैष्णवी में से किसी एक को चुनने का विकल्प होगा. सरकार के मुताबिक इन सभी नामों को उनके मतलब और सांस्कृतिक महत्व के आधार पर चुना गया है. 

इस मामले पर जानकारी देते हुए राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि बच्चों के अटपटे नाम बचपन में तो नॉर्मल लगते हैं. लेकिन समय के साथ इसकी वजह से बच्चों को शर्मिंदगी महसूस होने लगती है. कई मामलों में तो लोग इसे चिढ़ाने का साधन भी बना लेते हैं. ऐसे में बच्चे के पर्सनैलिटी डेवलपमेंट पर बुरा असर पड़ता है. उन्होंने कहा,

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‘कभी-कभी पेरेंट्स बच्चों के नाम रखने से पहले उसके मतलब और लंबे समय में उसकी वजह से पड़ने वाले असर पर ध्यान नहीं देते. लेकिन जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, इस तरह के नामों से उनके आत्मविश्वास में कमी आने लगती है.’

वहीं, अधिकारियों ने कहा कि नामों को लेकर होने वाला मजाक क्लासरूम में बच्चों की भागीदारी पर असर डाल सकता है. और कुछ मामलों में तो बच्चों को स्कूल आने से भी हतोत्साहित कर सकता है. इसलिए ऐसे नामों को बदलने का मौका दिया जाएगा. इस अभियान के लिए राजस्थान का शिक्षा विभाग भी तैयार है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षा विभाग ने लगभग 3 हजार वैकल्पिक नामों की एक लिस्ट तैयार की है, जिसमें लड़कों के लिए 1,409 और लड़कियों के लिए 1,541 नाम शामिल हैं. हर नाम के साथ उसका मतलब भी दिया गया है. कई मामलों में उसका ज्योतिष वाला कॉन्टेक्स्ट भी बताया गया है. यह पूरी लिस्ट बच्चों के पेरेंट्स के साथ साझा की जाएगी, ताकि वे ऐसे नाम चुन सकें जिनका अर्थ पॉजिटिव हो और जो सांस्कृतिक रूप से भी प्रासंगिक हों.

इस पहल के तहत सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 9 तक के स्टूडेंट्स शामिल होंगे. अधिकारियों ने बताया कि माता-पिता की लिखित सहमति के बिना किसी का भी नाम नहीं बदला जाएगा. स्कूलों से कहा गया है कि वे ऐसे मामलों की पहचान संवेदनशीलता से करें और पेरेंट-टीचर मीटिंग और स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के माध्यम से परिवारों से संपर्क करें. मंजूरी मिलने के बाद, बदला हुआ नाम सरकारी रिकॉर्ड में अपडेट कर दिया जाएगा. वहीं नया एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स के माता-पिता को भी दाखिले के समय, सुझाए गए नामों की सूची में से किसी एक को चुनने का ऑप्शन दिया जाएगा.

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