सऊदी अरब में सालों बिताने के बाद केरल लौटने वाले भारतीय ज्यादा रूढ़िवादी हो जाते हैं. वर्ल्ड बैंक के रिसर्च पेपर में यह तथ्य सामने आया है. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सऊदी समेत अरब देशों से लौटने वाले लोगों के अंदर बढ़ रही रुढ़िवादिता पर चिंता जाहिर की है. कांग्रेस सांसद की प्रतिक्रिया के बाद इस स्टडी को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा शुरू हो गई है.
रिपोर्ट में दावा, 'सऊदी और खाड़ी देशों से केरल लौटने वालों की सोच कट्टर', थरूर बोले- 'डरावना ट्रेंड'
Shashi Tharoor ने Saudi Arabia समेत दूसरे अरब देशों से लौटने वाले भारतीयों की बदली सोच पर चिंता जाहिर की. उन्होंने World Bank की एक स्टडी पर ये रिएक्शन दिया, जिसमें खाड़ी देशों से वापस केरल आने वाले लोगोंं के नजरिए पर बात की गई.

वर्ल्ड बैंक की स्टडी सऊदी अरब और दूसरे खाड़ी देशों से लौटने वाले प्रवासियों पर है. इसमें उनके सामाजिक और जेंडर नजरिए और घरेलू हिंसा को नॉर्मल मानने की सोच का जिक्र है. वर्ल्ड बैंक के रिसर्च पेपर का टाइटल है- ‘बियॉन्ड मनी: डज माइग्रेशन एक्सपीरियंस ट्रांसफर जेंडर नॉर्म्स? एंपिरिकल एविडेंस फ्रॉम केरल, इंडिया’.
शशि थरूर ने कहा, ‘परेशान करने वाली खबर’ये स्टडी मार्च 2022 में पब्लिश हुई थी. शशि थरूर समेत कई प्रभावशाली लोगों का इस पर रिएक्शन आया, तो स्टडी के नतीजों पर फिर से बात होने लगी. शशि थरूर ने कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के सीनियर फेलो मिलन वैष्णव की एक पोस्ट पर रिएक्शन दिया. इस पोस्ट में मिलन ने वर्ल्ड बैंक की उसी रिपोर्ट पर राय दी थी. शशि थरूर ने कहा,
“ये परेशान करने वाली खबरें हैं. केरल में लंबे समय से इस्लाम की एक उदार और प्रोग्रेसिव परंपरा रही है. राज्य में मौजूद आपसी मेल-जोल और सांप्रदायिक सद्भाव के साथ यह संस्कृति पूरी तरह मेल खाती है. केरल को इस बात पर गर्व है कि उसने मुस्लिम लड़कियों और महिलाओं को भी लड़कों और पुरुषों के बराबर शिक्षा दी है.”

शशि थरूर ने आगे लिखा,
"इस रिपोर्ट से पता चलता है कि विदेशों से रूढ़िवादी और यहां तक कि प्रतिक्रियावादी सोच और रीति-रिवाज यहां आ रहे हैं. यह केरल की लंबे समय से चली आ रही परंपराओं के बिल्कुल उलट हैं. इसके लिए मुस्लिम समुदाय के अंदर भी गंभीरता से आत्ममंथन और आपसी बातचीत की जरूरत है."

वहीं, मिलन वैष्णव ने अपने पोस्ट में लिखा था,
"सऊदी अरब से केरल लौटने वाले प्रवासी, कभी विदेश नहीं जाने वाले लोगों की तुलना में ज्यादा रुढ़िवादी हो जाते हैं. जेंडर-बेस्ड हिंसा और महिलाओं के साथ शारीरिक हिंसा करने के मामले में उनकी सोच और रवैया दोनों सख्त होते हैं."

स्टडी के नतीजों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल की मेंबर शमिका रवि ने भी जवाब दिया. उन्होंने कहा कि रिसर्च पेपर के नतीजे "पिछले 3 दशकों में केरल से मिली और कई सुनी-सुनाई रिपोर्ट से मेल खाते हैं.
सऊदी अरब को गल्फ देशों से अलग रखारिसर्चर्स ने सऊदी अरब को दूसरे गल्फ देशों से अलग माना, क्योंकि वहां का 'सामाजिक माहौल काफी ज्यादा कंजर्वेटिव है. खासकर महिलाओं की भूमिकाओं के मामले में'. दूसरे गल्फ ग्रुप में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर और UAE जैसे देश शामिल थे.
स्टडी में क्या निकला?इंडिया टुडे से जुड़े अविनाश कटील की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ल्ड बैंक की स्टडी में पांच बड़े इंडेक्स के जरिए प्रवासियों के नजरिए को मापा गया- रोजगार, आम जेंडर के तौर पर नजरिया, घर के फैसले लेना, जेंडर-बेस्ड हिंसा और एक्स्ट्रीम जेंडर नजरिया.
यह भी पढ़ें: वंदे मातरम पूरा गाने वाले कानून पर शशि थरूर ने सरकार से पूछा, '6 मिनट तक लोग खड़े रहेंगे?'
सऊदी से लौटे लोगों में गैर-प्रवासी लोगों की तुलना में फर्क खास तौर पर चौंकाने वाले थे. सऊदी से लौटे लोग आम जेंडर नजरिए पर 6.0 स्टैंडर्ड डेविएशन (SD) ज्यादा कंजर्वेटिव थे, घर के फैसले लेने पर 2.3 SD ज्यादा कंजर्वेटिव थे. जेंडर-बेस्ड हिंसा पर 3.0 SD ज्यादा कंजर्वेटिव थे और एक्स्ट्रीम जेंडर नजरिए पर 2.6 SD ज्यादा कंजर्वेटिव थे.
वीडियो: कॉकरोच जनता पार्टी पर आया शशि थरूर का बयान, क्या विपक्ष टेंशन में है?










