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'US हमले में भारतीयों की मौत पर अमेरिका ने अफसोस तक नहीं जताया,' शशि थरूर बुरी तरह भड़के

कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने अमेरिकी हमले में तीन भारतीयों की मौत पर अमेरिका के रवैये की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने पूछा कि कोई ‘दोस्त’ इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता है? और क्या कहा उन्होंने?

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर. (फाइल फोटो: ITG)

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  • अमेरिकी सेना ने 10 जून को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पलाऊ के झंडे वाले टैंकर एमटी सेट्टेबेलो पर हमला किया, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई।
  • ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण होर्मुज जल मार्ग पर दोनों प्रमुख पक्षों की नाकेबंदी के बीच यह हमला हुआ।
  • भारत ने इस हमले पर कड़ी आपत्ति जताई और विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री से इस मामले पर चर्चा की।

ओमान की खाड़ी में अमेरिकी हमले में तीन भारतीयों की मौत पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमेरिका पर निशाना साधा. उन्होंने पूछा कि कोई ‘दोस्त’ इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता है. थरूर ने यह प्रतिक्रिया अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के उस बयान के बाद दी, जिसमें उन्होंने भारतीय नागरिकों की मौत पर शोक जताने के बजाय ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में अमेरिकी नाकेबंदी का बचाव किया था. इससे ठीक पहले भारतीय विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने भारतीय नाविकों की मौत पर वाशिंगटन से नाराजगी जताई थी.

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क्या कहा शशि थरूर ने?

कांग्रेस के सीनियर नेता और विदेश मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष शशि थरूर ने 'X' पर लिखा,

"अमेरिका का यह आधिकारिक बयान पढ़कर गहरा सदमा लगा, जिसमें निर्दोष भारतीयों की जान जाने पर अफसोस या संवेदना का कोई जिक्र नहीं है. कोई दोस्त और रणनीतिक साझेदार इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता है?"

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कांग्रेस सांसद ने पूछा कि नियमों का पालन न करने वाले कमर्शियल जहाज को दूसरे तरीकों से क्यों नहीं रोका जा सका? साथ ही, क्या आम क्रू सदस्यों को मारने के मकसद से मिसाइल दागे बिना जहाज के प्रोपल्शन या स्टीयरिंग को बेकार नहीं किया जा सकता? थरूर ने कहा,

"इन अहम समुद्री इलाकों से गुजरने वाले लगभग हर कमर्शियल जहाज पर भारतीय क्रू होता है. क्या अब उन सभी को अमेरिकी मिसाइलों का निशाना बनाया जा सकता है?" 

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उन्होंने आगे कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से यह बात कही होगी.

अमेरिकी सेना ने किया था हमला

ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दोहरी नाकेबंदी है. दुनिया के सबसे बड़े तेल रास्तों में से एक होर्मुज को ईरान ने तो ब्लॉक किया ही है. अमेरिका ने भी अपनी नाकाबंदी लगाई हुई है.

10 जून को इसी रास्ते से गुजर रहे पलाऊ के झंडे वाले एक टैंकर एमटी सेट्टेबेलो पर अमेरिका ने हमला कर दिया. इसमें सवार 24 भारतीय नाविकों में से तीन की मौत हो गई. इनमें डेक कैडेट आदित्य शर्मा, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और इंजीनियर पटनाला सुरेश शामिल थे.

भारत ने विरोध जताया

भारत ने इस हमले पर कड़ी आपत्ति जताई. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि उन्होंने अपने अमेरिकी समकक्ष मार्को रूबियो से बात की है. जयशंकर ने अमेरिकी नौसेना के हमले पर भारत की ओर से कड़ा विरोध जताया और रूबियो से कहा कि कमर्शियल शिप पर ऐसी घातक कार्रवाई किसी भी सूरत में ठीक नहीं है. जयशंकर ने इस बातचीत की जानकारी एक्स पर दी थी.

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ये भी पढ़ें: होर्मुज हमले पर भारत ने जताई आपत्ति, मार्को रूबियो बोले, ‘अमेरिकी आदेश मानना ही होगा’

अमेरिका का जवाब आया

मार्को रूबियो के जवाब के बारे में अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने एक बयान जारी किया. इसमें कहा गया कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारतीय विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से बात की. दोनों ने होर्मुज स्ट्रेट में हालिया हमले पर चर्चा की. 

Shashi Tharoor on us naval attacks
(फोटो: X)

इस दौरान मार्को रूबियो ने इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज से गुजरने वाले सभी कमर्शियल शिप्स को अमेरिकी सेना के आदेशों का तुरंत पालन करना चाहिए. अमेरिका की सेना होर्मुज में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं. रूबियो ने यह भी कहा कि होर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी का उल्लंघन और ईरानी तेल का ट्रांसपोर्टेशन बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

वीडियो: दुनियादारी: अमेरिका ने ओमान में भारतीयों पर क्यों हमला कराया?

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