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मेट्रो, बस या एयरपोर्ट पर चुपके से कोई फोटो खींच रहा है? महिलाओं के पास हैं ये 7 कानूनी हथियार

शनिवार 15 अगस्त की देर रात दिल्ली मेट्रो में CISF के एक जवान पर आरोप लगा कि वो एक महिला यात्री की सहमति के बिना उसकी फोटो खींच रहा था. इस घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि अगर मेट्रो, बस, एयरपोर्ट या किसी सार्वजनिक जगह पर बिना मर्जी फोटो या वीडियो बनाए जाने पर महिलाओं के पास क्या कानून अधिकार हैं?

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मेट्रो, बस या एयरपोर्ट पर कोई चुपके से फोटो खींचे तो क्या करें? (फोटो- AI)

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  • दिल्ली मेट्रो के AIIMS स्टेशन पर 15 अगस्त की देर रात CISF के एक ASI पर एक महिला यात्री की अनुमति के बिना उनकी तस्वीरें खींचने का आरोप लगा, जिसके बाद CISF ने आरोपी कर्मचारी को निलंबित कर जांच का आदेश दिया।
  • यह मामला सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति फोटो लेने की कानूनी जटिलताओं और महिलाओं की निजता सुरक्षा से जुड़ी कठिनाइयों को दर्शाता है, जहां प्रत्यक्ष शिकायत न होने पर भी सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हुईं।
  • घटना के बाद, पीड़ितों को सुरक्षा का निर्देश दिया गया है, साथ ही पुलिस और CISF से तत्काल संपर्क कर डिजिटल साक्ष्यों जैसे CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने का सुझाव दिया गया है ताकि कानूनी कार्रवाई में सहायता मिल सके।

दिल्ली मेट्रो में 15 अगस्त की देर रात हुई एक घटना ने एक बेहद जरूरी सवाल फिर सामने ला दिया है. अगर आप मेट्रो, बस, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या किसी दूसरी सार्वजनिक जगह पर खड़े या बैठे हैं और कोई आपकी मर्जी के बिना चुपके से फोटो खींच रहा है, वीडियो बना रहा है या लगातार कैमरा आपकी तरफ कर रहा है, तो आपके पास क्या विकल्प हैं?

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मामला AIIMS मेट्रो स्टेशन का है. एक महिला यात्री ने आरोप लगाया कि CISF के एक ASI ने मेट्रो कोच में उनकी तस्वीरें खींचीं. यात्रियों ने अधिकारी से फोन की गैलरी दिखाने को कहा और कथित तौर पर तस्वीरें मिलने के बाद हंगामा हुआ. ‘आजतक’ की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस सूत्रों का कहना है कि करीब 12:40 बजे PCR कॉल मिली. महिला ने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई, लेकिन मामला CISF तक पहुंचा. CISF ने संबंधित कर्मचारी को तत्काल सस्पेंड कर विस्तृत जांच के आदेश दिए.

मामले की सबसे जरूरी बात ये है कि सार्वजनिक जगह पर किसी व्यक्ति की फोटो खींच लेना हर परिस्थिति में अपने आप कोई अपराध नहीं बन जाता. कानून ये देखता है कि फोटो या वीडियो किस परिस्थिति में बनाया गया, उसमें क्या दिखाया गया, इरादा क्या था, क्या महिला की निजता में दखल दिया गया, क्या यौन उत्पीड़न या पीछा करने जैसी हरकत हुई और बाद में तस्वीर का इस्तेमाल या प्रसार कैसे किया गया.

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तो फिर महिला करे क्या?

सबसे पहले सुरक्षा. सामने वाला संदिग्ध लगे तो अकेले उससे भिड़ने के बजाय आसपास के यात्रियों, मेट्रो स्टाफ, CISF या पुलिस की मदद लें. मेट्रो में तुरंत CISF हेल्पलाइन 155655 या DMRC हेल्पलाइन 155370 पर संपर्क किया जा सकता है. DMRC की महिलाओं, बच्चों और विशेष जरूरत वाले यात्रियों के लिए 011-23415480 की हेल्पलाइन भी उपलब्ध है. दिल्ली पुलिस के अनुसार आपात स्थिति में 112 और महिलाओं की परेशानी के लिए 1091 उपलब्ध है. दिल्ली मेट्रो पुलिस का कंट्रोल रूम नंबर 1511 है.

मेट्रो में घटना हो तो स्टेशन का नाम, लाइन, ट्रेन का अनुमानित समय, कोच का स्थान और संभव हो तो कोच नंबर नोट कर लें. आसपास मौजूद गवाहों के फोन नंबर मिल सकें तो लें. सबसे महत्वपूर्ण बात, मेट्रो स्टाफ या पुलिस से CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का अनुरोध करें. कई बार घटना के बाद आरोपी चला जाता है, लेकिन CCTV, स्टेशन रिकॉर्ड और गवाह जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं.

अगर आरोपी का फोन सामने है तो खुद उसका फोन छीनने, पासवर्ड खुलवाने या तस्वीरें जबरदस्ती डिलीट कराने की कोशिश न करें. फोन से डिजिटल सबूत मिट भी सकते हैं और मौके पर हाथापाई की स्थिति भी बन सकती है. जांच एजेंसी जरूरत पड़ने पर डिजिटल फोरेंसिक तरीके से डाटा हासिल कर सकती है. दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट के पास मोबाइल और दूसरे डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच की क्षमता है.

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कानून की कौन सी धाराएं लग सकती हैं?

यहीं सबसे ज्यादा गलत जानकारी इंटरनेट पर घूमती है. हर चोरी-छिपे फोटो के मामले में सीधे BNS की धारा 77 या IT Act की धारा 66E लग जाएगी, ऐसा कहना सही नहीं है.

BNS की धारा 77 voyeurism यानी ताक-झांक से जुड़ी है. इसमें महिला के किसी private act को ऐसी परिस्थिति में देखना या उसकी तस्वीर लेना शामिल है, जहां उसे सामान्य तौर पर निजता की उम्मीद हो. दिल्ली हाई कोर्ट के सीनियर एडवोकेट नवीन दूबे इसे समझाते हुए कहते हैं,

कानून में प्राइवेसी एक्ट की परिभाषा में ऐसे हालात शामिल हैं जहां महिला की शालीनता (modesty) के साथ खिलवाड़ होता नजर आए. इसमें प्राइवेट पार्ट्स, अंडर गारमेंट्स या ऐसी गतिविधियां जो आम तौर पर सार्वजनिक जगह पर नहीं की जाती, उनकी फोटो या वीडियो बनाना शामिल है.  इनमें से पहली conviction पर एक से तीन साल तक की जेल और जुर्माना, जबकि दूसरी या subsequent conviction पर तीन से सात साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है.

इसलिए मेट्रो में सामान्य कपड़ों में बैठी किसी महिला की तस्वीर खींचने के हर मामले को BNS 77 कहना कानूनी तौर पर सही नहीं होगा.

लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं कि ऐसी हरकत कानून से बाहर है. एडवोकेट नवीन दूबे बताते हैं,

BNS की धारा 79 किसी महिला की modesty का अपमान करने के इरादे से किए गए शब्द, इशारे (gesture) या हरकत (act) और उसकी निजता में अनधिकृत प्रवेश (intrusion) को अपराध बनाती है. इसमें तीन साल तक की साधारण कारावास और जुर्माने का प्रावधान है.

अगर मामला यौन उत्पीड़न (sexual harassment) का है, तो BNS 75 भी प्रासंगिक हो सकती है. एडवोकेट नवीन दुबे कहते हैं,

अगर आरोपी महिला का पीछा करता है या उसकी ऑनलाइन गतिविधियों (online activity) को लगातार मॉनिटर करता है, तो परिस्थितियों के अनुसार BNS 78 यानी स्टॉकिंग (stalking) लागू हो सकती है. अगर शारीरिक बल प्रयोग (physical force) या मारपीट (assault) हुआ है तो BNS 74 लागू हो सकती है, जिसमें एक से पांच साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है.

IT Act की धारा 66E को लेकर भी समझिए सही बात

IT Act की धारा 66E निजता के हनन से जुड़ी है, लेकिन इसका दायरा खास है. इसमें किसी व्यक्ति के निजी पलों (private area) की इमेज को बिना सहमति कैप्चर करना, पब्लिश या शेयर और ट्रांसमिट करना और प्राइवेसी का उल्लंघन शामिल है. इसमें तीन साल तक की जेल या दो लाख रुपये तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान है. इसलिए सिर्फ किसी महिला की सामान्य फोटो खींच लेने को हर बार सेक्शन-66E के तहत अपराध बताना भी सही नहीं होगा.

अगर फोटो या वीडियो बाद में सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप या किसी वेबसाइट पर डाल दिया गया है, खासकर अंतरंग (intimate) या प्राइवेट कॉन्टेंट है, तो मामला और गंभीर हो सकता है. ऐसे में सबूत के तौर पर पोस्ट का स्क्रीनशॉट, प्रोफाइल नाम, URL, तारीख और समय सुरक्षित रखें और पुलिस या साइबर क्राइम यूनिट को दें.

बस और एयरपोर्ट पर क्या करें?

बस में ऐसी घटना हो तो ड्राइवर या कंडक्टर को तुरंत बताएं, आसपास के यात्रियों की मदद लें और जरूरत पड़ने पर 112 पर कॉल करें. घटना के बाद बस नंबर, रूट (route), स्टॉप और समय नोट करें.

एयरपोर्ट पर सीधे CISF, एयरपोर्ट सिक्योरिटी (Airport Security) या पुलिस सहायता डेस्क से संपर्क करें. अगर खतरा तत्काल है तो 112 सबसे सीधा विकल्प है. किसी भी जगह का नियम एक ही है. पहले अपनी सुरक्षा, फिर सबूत, फिर शिकायत.

और एक जरूरी कानूनी अधिकार भी याद रखिए. अब शिकायत के लिए हमेशा उसी पुलिस स्टेशन तक पहुंचना जरूरी नहीं है. केंद्र सरकार के मुताबिक नए क्रिमिनल लॉ के तहत इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेश से घटना की रिपोर्ट (incident report) करने और जीरो FIR के जरिए किसी भी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था है.

इसलिए अगली बार कोई चुपके से कैमरा आपकी तरफ करे तो सिर्फ ये सोचकर चुप न रहें कि "फोटो ही तो है". लेकिन दूसरी तरफ कानून को बढ़ा-चढ़ाकर भी न समझें. इलाहाबाद हाई कोर्ट की सीनियर एडवोकेट रंजना त्रिपाठी बताती हैं कि 

हर फोटो अपराध नहीं है, मगर उत्पीड़न (harassment), निजता का हनन, तांक-झांक या पीछा करना, यौन दुर्व्यवहार (sexual misconduct), या निजी अथवा अंतरंग फोटो (private/intimate image) की गैरकानूनी रिकॉर्डिंग और प्रचार-प्रसार (dissemination) गंभीर कानूनी मामला बन सकता है.

कुल मिलाकर सबसे सुरक्षित रास्ता है घटना को तुरंत रिपोर्ट करना, CCTV और digital evidence सुरक्षित कराना और खुद कानून हाथ में लेने के बजाय पुलिस या अधिकृत सुरक्षा एजेंसी को कार्रवाई करने देना.

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