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जिन सीक्रेट डेटिंग ऐप्स ने करोड़ों भारतीयों के शौक खोल दिए, वे काम कैसे करते हैं?

Secret dating apps: 'सीक्रेट डेटिंग ऐप' मार्केट में तेजी से पैर पसार रहे हैं. लोग इन्हें डाउनलोड कर रहे हैं. इस्तेमाल कर रहे हैं. ताकि उन्हें वैसा पार्टनर मिल सके, जैसे की उन्हें तलाश है. मगर असल में ये काम करते कैसे हैं? यहां का एक्सपीरिंयस कैसा है?

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पिछले एक साल में सीक्रेट डेटिंग ऐप को 1.6 करोड़ से ज्यादा लोग डाउनलोड कर चुके हैं. (फोटो- Unsplash.com)

डेटिंग ऐप्स पर लोग अकाउंट्स बनाते हैं. पार्टनर की तलाश करते हैं. ताकि उन्हें इमोशनली सपोर्ट मिल सके. इंटीमेसी मिल सके. दिल की बात बांटने को कोई साथी मिल सके, वगैरा-वगैरा. डेटिंग ऐप सुनकर ज्यादातर लोगों का ध्यान मेनस्ट्रीम डेटिंग ऐप (Tinder, Bumble आदि) पर जाता है. मगर इससे भी अलग कुछ सीक्रेट डेटिंग ऐप्स है, जो मार्केट में तेजी से पैर पसार रहे हैं.

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'सीक्रेट डेटिंग ऐप्स' यानी गुमनाम डेटिंग, डिसक्रिट डेटिंग, खुले विचारों वाले कनेक्शन और शादी से बाहर के रिश्तों के लिए प्रमोट किए जाने वाले प्लेटफॉर्म. यहां का एक बड़ा यूजर बेस शादी से बाहर रिश्तों को तलाश करने वाले लोगों का है. माने कोई मैरिड पर्सन शादी के बाहर तीसरे पार्टनर की तलाश में है. कुछ प्लेटफॉर्म खास तौर पर गे डेटिंग के लिए हैं.

पिछले पांच सालों में 4.5 करोड़ से ज्यादा भारतीयों ने ‘सीक्रेट’ डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल किया. इनमें से 1.6 करोड़ से ज्यादा लोगों ने सिर्फ पिछले एक साल में यहां साइन-अप किया है.

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क्या है सीक्रेट डेटिंग ऐप में ‘सीक्रेट’?

सीक्रेट डेटिंग ऐप कैसे काम करते हैं, यहां का यूजर कैसा होता है, वेरिफिकेशन और आईडी बनाने का तरीका क्या है और ये पैसे कैसे कमाते हैं, ये जानने के लिए इंडिया टुडे की ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम ने ऐसे लगभग 30 ऐप्स की पड़ताल की. और PURE, 3Way और Nymph जैसे ऐप्स पर अकाउंट बनाए.

PURE कितना ‘प्योर’?

शुरुआत होती है PURE ऐप से. ये ऐप खुद को 'ओपन माइंडेड लोगों के लिए सबसे अच्छा डेटिंग ऐप' बताता है. यूजर्स यहां खुलकर अपनी बात रख सकते हैं. नए एक्सपीरियंस ले सकते हैं. ये ऐप यूजर्स को उनकी इच्छाओं को आजाद छोड़ने के लिए कहता है. कहें तो ये ऐप खुद को डेटिंग इकोसिस्टम के ज्यादा सीक्रेट, एडल्ट-ओरिएंटेड और बाउंड्री को चुनौती देने वाले हिस्से में पेश करता है.  

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टीम ने एक नकली नाम से महिला की आईडी डेटिंग ऐप पर बनाई. (फोटो-Pexels)

अब PURE का रियल लाइफ एक्सपीरियंस कैसा है, ये जानने के लिए इंडिया टुडे की टीम ने एक महिला की आईडी बनाई. नकली नाम और बिना चेहरे वाली रैंडम तस्वीर. और लगभग 1 घंटे के अंदर ही अकाउंट पर 500 से ज्यादा लाइक्स (कनेक्शन रिक्वेस्ट) आ गए. ज्यादातर प्रोफाइल लगभग असली लोगों की लग रही थीं. कुछ ने अपना चेहरा लगाया था, मगर नाम नकली लग रहे थे. यहां अलग-अलग बैकग्राउंड के लोग मिले. जैसे जॉब करने वाले, शादीशुदा, बेरोजगार, बाइसेक्शुअल, खुद को खुले विचारों वाला बताने वाले यूजर्स आदि.

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रिपोर्ट में बताया गया कि प्योर के डाउनलोड गिरे हैं. माने लोग इसे कम इस्तेमाल कर रहे. फिर भी ये अच्छा-खासा रेवेन्यू जनरेट कर रहा है. वजह सब्सक्रिप्शन और प्रीमियम गेटिंग हो सकती है.

एक ऐप है Nymph. मगर यहां लोगों का एक्सपीरियंस ज्यादा सुहावना नहीं रहा. रिपोर्ट में बताया गया कि एक यूजर्स ने प्वाइंट किया कि उसने ऐप पर सब्सक्रिप्शन लिया लेकिन वो एक्टिवेट नहीं हुआ. बार-बार रीडायरेक्ट होने लगा. तकनीकी खराबी की वजह से कस्टमर सपोर्ट तक पहुंचना मुश्किल रहा. एक अन्य यूजर ने कहा कि प्रीमियम एक्सेस खरीदने के कुछ दिन बाद तक भी उसे प्रोफाइल नहीं दिखाई गई.

टिंडर का ‘गेम’ अलग

इंडिया टुडे की टीम का मैनस्ट्रीम डेटिंग ऐप टिंडर का एक्सपीरियंस काफी अलग रहा. वे ऐप के अंदर ही नहीं जा सके. दरअसल, टीम सिर्फ ये जानना चाहती थी कि ये प्लेटफॉर्म काम कैसे करते हैं. वे किसी व्यक्ति की रियल आईडी नहीं बना सकते हैं. मगर टिंडर का कहना है कि अगर आपको एंट्री चाहिए, तो फेशियल वेरिफिकेशन करनी पड़ेगी. इस शर्त की वजह से ऐप के अंदर जाकर पड़ताल नहीं हो पाई. आखिर में वो शैडो-बैन हो गया.

लेकिन सीक्रेट डेटिंग ऐप पर वेरिफिकेशन काफी आसान है. वहां कम से कम पहचान बताए बिना अकाउंट बन जाते हैं. फिर यूजर्स अपनी जरूरत के हिसाब के रिलेशनशिप, इंटीमेसी और अन्य निजी बातें खुलकर करते हैं. अपनी पूरी पहचान भी जाहिर नहीं करते.

इच्छा को "बेच" रहे ऐप्स?

लेकिन इन ऐप्स का इस्तेमाल आसान, सस्ता और खतरे से खाली नहीं. यहां एंट्री तो आसानी से मिल जाएगी. फिर जल्दी-जल्दी वॉलेट से पैसा निकालना पड़ेगा. आपकी तस्वीर किसने लाइक की, ये जानना है तो पैसे निकालिए. मीनिंगफुल बातें करनी है, तो भी अलग-अलग लेवल के सब्सक्रिप्शन के लिए पैसा निकालिए.

दूसरा प्वाइंट. हमने अभी बताया कि यहां एंट्री आसान है. लेकिन यहां इस बात की गारंटी नहीं है कि जिस व्यक्ति की तलाश में आप हैं, वो ही आपको मिले.

मगर इन प्लेटफॉर्म का माहौल आखिर में ये एहसास दिलाता है कि आप सही जगह हैं. और आपको वैसे ही लोग मिल सकते हैं जैसे की उन्हें तलाश है. इस वजह से लोग इनकी तरफ अट्रैक्ट हो जाते हैं.

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