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'सतलुज' फिल्म जिस खालड़ा पर बनी, उनकी हत्या के दोषी DSP घर से 'गायब', बेल पर छूटे थे

मानवाधिकार कार्यकर्ता Jaswant Singh Khalra के अपहरण और हत्या का दोषी Ex DSP Jaspal Singh अपने बताए पते पर नहीं मिला. साल 2023 में उसे अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था.

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जसवंत खालड़ा (बायें) की हत्या पर दिलजीत दोसांझ (दायें) की फिल्म सतलुज बनी है. (फोटो- India Today)

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  • Punjab पुलिस ने पुष्टि की है कि जसवंत सिंह खालड़ा के अपहरण और हत्या के दोषी DSP जसपाल सिंह अपने जेल रिकॉर्ड्स में बताए गए पते पर नहीं पाए गए हैं और उनकी खोज जारी है।
  • जसपाल सिंह को 1995 में खालड़ा की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, लेकिन 2023 में कोर्ट ने उसे अंतरिम जमानत पर रिहा किया था, जिसके बाद उनके पते का पता नहीं चल पाया।
  • जसपाल सिंह के पते ना मिलने पर विपक्ष ने AAP सरकार पर आरोप लगाए, जबकि सरकार ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सजा में छूट गृह मंत्रालय द्वारा ही दी जाती है और कोई आवेदन मंजूर नहीं हुआ।

मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के अपहरण और हत्या के दोषी DSP जसपाल सिंह अपने बताए पते पर नहीं मिले. यह जानकारी खुद पंजाब पुलिस के अधिकारियों ने दी है. 1995 में खालड़ा के अपहरण और हत्या के मामले में जसपाल को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. उन्हें साल 2023 में कोर्ट ने अंतरिम जमानत पर पंजाब के नाभा जेल से रिहा किया था. हालांकि, अब जसपाल जेल रिकॉर्ड में दिए अपने गांव के पते पर नहीं मिले.

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DSP के बारे में पता करने की अपील खुद जेल अधिकारियों ने की थी. हाल ही में मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन, उनके काम, अपहरण और हत्या पर ‘सतलुज’ नाम की फिल्म रिलीज की गई. फिल्म में खालड़ा के रोल में एक्टर-सिंगर दिलजीत दोसांझ नजर आए. फिल्म OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज हुई थी. हालांकि, सिर्फ 2 दिनों के भीतर ही फिल्म को OTT प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया. इसने एक बार फिर लोगों का ध्यान खालड़ा के केस पर मोड़ दिया है.

The Print की रिपोर्ट के मुताबिक, जसपाल सिंह की खोज में पुलिस उनके गांव पहुंची. अधिकारियों ने बताया कि वो अपने बताए पते पर नहीं मिले. गांव के सरपंच और अन्य लोगों ने बताया कि जसपाल वहां नहीं रह रहे हैं. SHO बलजिंदर सिंह मल्ही ने बताया कि जसपाल को कोर्ट के आदेश पर 27 मई 2023 को अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था लेकिन जांच में पता चला कि जसपाल जेल रिकॉर्ड्स में बताए अपने पते पर नहीं हैं.

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मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा (बाएं) और एक्टर दिलजीत दोसांझ (दाएं).
विपक्ष ने AAP सरकार पर गंभीर आरोप लगाए

इधर जसपाल की ‘रिहाई’ पर विपक्ष ने आम आदमी पार्टी की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. AAP ने इन आरोपों को खारिज कर दिया. आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला तब शुरू हुआ, जब शिरोमणि अकाली दल के सीनियर नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि भगवंत मान सरकार ने जसपाल की सजा में छूट की मांग की. उसकी रिहाई में भी मदद की और अंतरिम जमानत मिलने के बाद उसका पता लगाने में फेल हो गई.

मजीठिया के आरोपों पर पंजाब AAP के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने सरकार की ओर से ‘सफाई’ देते हुए कहा कि रिहाई से जुड़े किसी भी एप्लीकेशन पर गृह मंत्रालय फैसला करता है न कि पंजाब सरकार. पन्नू ने कहा कि जसपाल की सजा में छूट देने के लिए साल 2017 में गृह मंत्रालय के पास एक एप्लीकेशन भेजा गया था लेकिन मंत्रालय ने उसे साल 2018 में खारिज कर दिया. इसके बाद गवर्नर ने भी इस अपील को खारिज कर दिया.

गृह मंत्रालय ने अपील खारिज की

साल 2019 में एक बार फिर गृह मंत्रालय के पास अपील की गई थी. अन्य दोषियों के एप्लीकेशन को भी साल 2023 मे मंत्रालय ने खारिज कर दिया. पन्नू ने आगे कहा कि अक्टूबर 2023 में एक बार फिर से यह मामला फिर मंत्रालय के पास भेजा गया था, लेकिन पंजाब सरकार को ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं मिला. आरोपों को खारिज करते हुए पन्नू ने कहा कि जब सरकार को गृह मंत्रालय से कोई एप्लीकेशन नहीं मिला तो मुख्यमंत्री किसी फाइल पर कैसे साइन कर सकते हैं या उसे गवर्नर के पास भेज सकते हैं? नेता ने उस आरोप को भी खारिज कर दिया, जिसमें पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर जसपाल की सजा में छूट की ‘मंजूरी’ देने का आरोप लगा था. 

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बता दें कि जसवंत सिंह खालड़ा को साल 1995 में उनके अमृतसर स्थित घर के सामने से अगवा कर लिया गया था. जांच के बाद पता चला कि उनकी हत्या कर दी गई. हालांकि, उनका शव कभी बरामद नहीं किया जा सका.  

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