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सार्थक मट्टो हिट एंड रन केस: जमानत पर घूम रहा आरोपी थार चालक, माता-पिता की ये विनती रुला देगी!

Sarthak Mattoo Hit and Run Case: सार्थक मट्टो बाइक से ऑफिस जा रहे थे. इसी दौरान दिल्ली में एक Thar गाड़ी ने उन्हें टक्कर मार दी. जिससे उनकी मौत हो गई. सार्थक के पेरेंट्स ने वीडियो बनाकर PM Modi, Amit Shah, Rekha Gupta और दिल्ली के Police Commissioner से न्याय की मांग की है.

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सार्थक मट्टो के माता-पिता ने पीएम मोदी से न्याय की गुहार लगाई है (PHOTO-ITG)

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  • डाली गई रिपोर्ट के अनुसार, 25 जून को गुरुग्राम में सार्थक मट्टू को एक थार गाड़ी ने टक्कर मार दी जिसकी वजह से उनकी मौके पर मौत हुई।
  • सार्थक के पिता का आरोप है कि हादसे के एक सप्ताह बाद भी आरोपी खुला घूम रहा है और उनका अल्कोहल टेस्ट 50 घंटे बाद लिया गया, जिससे नशे में होने का प्रमाण मुश्किल है।
  • दिल्ली पुलिस ने आरोपी अपूर्व सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया है लेकिन उसे बेल मिल चुकी है, और सार्थक के परिवार ने प्रधानमंत्री से न्याय की अपील की है।

‘हमारी इकलौती औलाद, हमारा 33-34 साल का बेटा एक हिट एंड रन केस में मारा गया. माननीय प्रधानमंत्री जी कहां हैं आप? मेरे बेटे को न्याय चाहिए, मुझे अपने बेटे के लिए न्याय चाहिए. हम कश्मीरी पंडित हैं. क्या मुझे बताना पड़ेगा कि मेरे साथ क्या हुआ? मेरे मां-बाप नहीं रहे. हमारा घर जला दिया गया.’

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ये कहना है उस कपल का जो अपने 34 साल के बेटे को एक रोड एक्सीडेंट में खो चुका है. पिता का आरोप है कि मौत को एक हफ्ता गुजर गया. लेकिन, आरोपी खुले घूम रहे हैं. हाथ जोड़कर प्रधानमंत्री से न्याय की विनती करते हुए कहते हैं कि हम कश्मीरी पंडित पहले ही बहुत कुछ गंवा चुके हैं, और अब हमारा इकलौता बेटा भी मारा गया.

क्या है पूरा मामला?

ये पूरा मामला दिल्ली से सटे गुरुग्राम का है. 25 जून को 33 साल के सार्थक मट्टू की रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई थी. सार्थक की बाइक को एक थार ने टक्कर मारी थी. 25 तारीख की सुबह सार्थक बाइक से अपने ऑफिस जा रहे थे. तभी दिल्ली के वसंत कुंज में पीछे से एक थार आई और बाइक को टक्कर मार के चली गई. सार्थक खून से लथपथ रोड पर पड़े रहे. उन्हें जब तक हॉस्पिटल ले जाया गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी.

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सार्थक के पिता सुरेंद्र मट्टू ने आरोप लगाया कि थार ड्राइवर ने पहले बेटे की बाइक को टक्कर मारी और फिर उसके ऊपर गाड़ी चढ़ा दी. समय पर अस्पताल पहुंचाया जाता तो शायद सार्थक की जान बच सकती थी.

पुलिस ने क्या कार्रवाई की?

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने पहले दो लोगों को गिरफ्तार किया था. जांच में पता चला कि हादसे में शामिल थार बेंगलुरु की एक प्राइवेट कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड है. कंपनी ने ये गाड़ी बिहार के रहने वाले सागर साहा को लीज पर दे रखी है. पूछताछ में सागर ने पुलिस को बताया कि हादसे के समय गाड़ी उसका दोस्त अपूर्व सिंह चला रहा था और वो बगल वाली सीट पर बैठा था. अपूर्व सिंह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद का रहने वाला है और गुरुग्राम की एक प्राइवेट फर्म में नौकरी करता है.

सार्थक के पेरेंट्स ने एक वीडियो शेयर किया है. उसमें आरोप लगाया कि उनके इकलौते बेटे को मार दिया गया और अब उसके आरोपी आजाद खुले घूम रहे हैं. पिता ने कहा कि आरोपियों का अल्कोहल टेस्ट हादसे के 50 घंटे बाद लिया गया. जिसकी वजह से ये साबित होना मुश्किल है कि हादसे के वक्त आरोपी नशे की हालत में थे. इस बीच सार्थक के पिता ने न्याय के लिए पीएम मोदी से भी अपील की है.

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एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने आरोपी अपूर्व सिंह के खिलाफ BNS की धारा 106(1) के तहत केस दर्ज किया है. अधिकारी ने बताया कि अपूर्व को बेल दे दी गई थी, और अल्कोहल रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है. सार्थक की मौत को एक हफ्ता गुज़र चुका है. लेकिन एक्शन के नाम पर बस यही है कि आरोपी ज़मानत पर बाहर है. सार्थक जैसे कई लोग हर रोज़ सड़क हादसे में अपनी जान गंवा रहे हैं. लेकिन हमारे यहां के नियम और कानून उतने ही सख्त हैं, जितनी देश की सड़कें. 

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