कहते हैं, कोई भी सेना अकेले जंग नहीं जीत सकती. भारत ही नहीं, दुनिया का इतिहास उठाकर देख लीजिए. एक बात नज़र आती है कि जंग जीतने में अहम भूमिका सेनापति की भी होती है. सेनापति के फैसले युद्ध का रुख बदल सकते हैं. लेकिन मॉडर्न दौर में जंग सिर्फ हथियारों के दम पर नहीं जीती जाती. डिप्लोमेसी, साइकोलॉजिकल वॉरफेयर और दुश्मन के दिमाग में डर पैदा करने की रणनीति भी उतनी ही अहम होती है. इसलिए समय-समय पर सेनाओं की लीडरशिप में बदलाव होते हैं, ताकि अनुभवी अधिकारी बदलते वॉरफेयर के मुताबिक सेना को तैयार कर सकें.
LoC से लेकर LaC तक इनके भरोसे देश की सुरक्षा, ऐसी है सेना की नई लीडरशिप
Indian Army, Indian Navy और Indian Air Force के अलावा Integrated Defence Staff के पदों पर भी नई नियुक्तियां हुई हैं. इसके अलावा आर्मी ने Integrated Battle Groups के फॉर्मेशन को भी मंजूरी दी है.


वैसे, ये बदलाव सेनाओं की एक स्वाभाविक प्रक्रिया भी है. कोई अधिकारी नई जिम्मेदारी संभालता है, कोई दूसरी कमांड में जाता है, तो कोई अपनी सेवा अवधि पूरी कर रिटायर हो जाता है. यही वजह है कि जब भी सेनाओं की टॉप लीडरशिप बदलती है, उस पर सिर्फ सैनिकों की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की नजर होती है.
बीते कुछ दिनों में भारत की तीनों सेनाओं में ऐसा ही बड़ा फेरबदल देखने को मिला है. हालिया ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह सबसे अहम सैन्य नेतृत्व परिवर्तनों में से एक माना जा रहा है. तीनों सेनाओं में एक साथ कई टॉप पदों पर बदलाव हुए हैं. इंडियन आर्मी और इंडियन नेवी को नए प्रमुख मिले हैं, जबकि इंडियन एयरफोर्स को नया वाइस चीफ मिला है. इसके अलावा कई अहम कमांड्स की जिम्मेदारी भी नए अधिकारियों को सौंपी गई है. अब एक-एक करके समझते हैं कि किस अधिकारी को कौन-सा पद मिला है. वह पहले किन जिम्मेदारियों पर रह चुके हैं. और जिस पद या कमांड की कमान अब उनके हाथ में है, उसका देश की सुरक्षा में कितना महत्व है. सबसे पहले बात इंडियन आर्मी की.
इंडियन आर्मी को नया चीफ मिल गया है. जनरल धीरज सेठ ने सेना की कमान संभाल ली है. जनरल सेठ उन अधिकारियों में हैं जिन्होंने टैंक से लेकर आतंकवाद विरोधी ऑपरेशंस और स्ट्राइक फॉर्मेशन तक, हर तरह की जिम्मेदारी निभाई है. यही वजह है कि उन्हें बदलते वॉरफेयर और नई सैन्य चुनौतियों को समझने वाला अधिकारी माना जाता है. जनरल सेठ आर्मर्ड कोर से आते हैं. आसान भाषा में कहें तो वह एक 'टैंकमैन' रहे हैं. अपने करियर के दौरान उन्होंने रेगिस्तानी इलाके में एक आर्मर्ड रेजिमेंट की कमान संभाली. इसके अलावा पश्चिमी मोर्चे पर एक आर्मर्ड ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी बल का नेतृत्व भी किया.

लेफ्टिनेंट जनरल के तौर पर उन्होंने इंडियन आर्मी की सबसे अहम स्ट्राइक फॉर्मेशंस में गिनी जाने वाली सुदर्शन चक्र कोर की कमान संभाली है. इसके बाद वे दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग यानी GOC भी रहे. इस दौरान उन्होंने कई नेशनल और इंटरनेशनल मिलिट्री इंगेजमेंट्स की निगरानी की.
जनरल सेठ उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं जिन्होंने सेना की दो अलग-अलग ऑपरेशनल कमांड्स की अगुवाई की है. पहले साउथ वेस्टर्न कमांड और बाद में सदर्न कमांड की जिम्मेदारी संभाली. ढाई साल से ज्यादा समय तक इन दोनों कमांड्स का नेतृत्व करते हुए उन्होंने ऑपरेशनल तैयारियों, फोर्स मैनेजमेंट और सैन्य योजनाओं पर काम किया. इसके अलावा वह सेना के आधुनिकीकरण से जुड़े कई अहम पदों पर भी रहे. नई तकनीकों को अपनाने और भविष्य के युद्धों की जरूरतों के हिसाब से सेना को तैयार करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. ऐसे में उनके कार्यकाल में इंडियन आर्मी के आधुनिकीकरण की रफ्तार पर सबकी नजर रहेगी.
इंडियन आर्मी में Army Chief के बाद सबसे अहम पदों में से एक होता है Vice Chief of Army Staff. सेना के ऑपरेशनल प्लान, मॉडर्नाइजेशन और रोजमर्रा के प्रशासन में इस पद की बड़ी भूमिका होती है. इस जिम्मेदारी के लिए लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन को नियुक्त किया गया है.

लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन को अति विशिष्ट सेवा मेडल और सेना मेडल से सम्मानित किया जा चुका है. इस पद पर आने से पहले वह इंडियन आर्मी की सदर्न कमांड के आर्मी कमांडर थे. इसके अलावा उन्होंने इंडियन मिलिट्री एकेडमी और जम्मू-कश्मीर के नगरोटा स्थित व्हाइट नाइट कोर यानी 16 कोर की कमान भी संभाली है.
लेफ्टिनेंट जनरल जैन महार रेजिमेंट से आते हैं, जो इंडियन आर्मी की एक इन्फेंट्री रेजिमेंट है. वह सूडान में संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत सेक्टर कमांडर रह चुके हैं. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में काउंटर इंसरजेंसी फोर्स के GOC, Military Operations Directorate, Military Secretary's Branch और इथियोपिया में मिलिट्री ऑब्जर्वर के रूप में भी काम कर चुके हैं. यही अनुभव उन्हें इंडियन आर्मी के सबसे अनुभवी अधिकारियों में शामिल करता है.
सदर्न कमांड: जनरल राजेश पुष्कर को मिली जिम्मेदारीअब बात इंडियन आर्मी की सदर्न कमांड की. यह सेना की सबसे पुरानी कमांड है और देश के दक्षिणी व पश्चिमी हिस्से के बड़े क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालती है. युद्ध हो या शांति, सैनिकों की ट्रेनिंग, ऑपरेशनल तैयारी और लॉजिस्टिक्स के लिहाज से इसकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती है. इस कमांड की जिम्मेदारी अब लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर को सौंपी गई है. लेफ्टिनेंट जनरल पुष्कर आर्मर्ड कोर से आते हैं. इससे पहले वह इंडियन आर्मी की ऑफेंसिव स्ट्राइक फॉर्मेशन मानी जाने वाली 2 कोर, यानी खड़ग कोर के GOC रह चुके हैं.

साढ़े तीन दशक से ज्यादा लंबे सैन्य करियर में उन्होंने भूटान में Indian Military Training Team और रूस में इंडियन दूतावास में Defence Attaché के तौर पर भी काम किया है. इस अनुभव ने उन्हें ऑपरेशनल कमांड के साथ-साथ सैन्य कूटनीति की भी गहरी समझ दी है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद मीडिया से बातचीत में लेफ्टिनेंट जनरल पुष्कर का एक बयान काफी वायरल हुआ था. उन्होंने कहा था कि सिर्फ चार दिनों में भारत ने पाकिस्तान की सेना को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया. उनका यह बयान सोशल मीडिया से लेकर न्यूज चैनलों तक खूब सुर्खियों में रहा.
एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर, कांग्रेस सांसद शशि थरूर की दिवंगत पत्नी सुनंदा पुष्कर के भाई हैं. उनकी नियुक्ति के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई भी दी.
2 कोर (खड़ग कोर) : जनरल मनीष लूथरा करेंगे नेतृत्वलेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर के सदर्न कमांड की कमान संभालने के बाद 2 कोर, यानी खड़ग कोर की जिम्मेदारी लेफ्टिनेंट जनरल मनीष लूथरा को सौंपी गई है. लेफ्टिनेंट जनरल लूथरा इससे पहले डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस यानी DGMO थे. इंडियन आर्मी में DGMO का पद बेहद अहम माना जाता है. सेना के बड़े ऑपरेशनल प्लान, सैन्य गतिविधियों की निगरानी और युद्ध के दौरान अहम फैसलों में इस पद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.

लेफ्टिनेंट जनरल लूथरा जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स से आने वाले एक इन्फेंट्री अधिकारी हैं. अब उन्हें खड़ग कोर की कमान सौंपी गई है. इंडियन आर्मी की स्ट्राइक कोर का काम युद्ध के समय जवाबी हमला करना और दुश्मन के इलाके में तेजी से बढ़त हासिल करना होता है. यही वजह है कि इन्हें सेना की सबसे आक्रामक फॉर्मेशंस में गिना जाता है. यानी भविष्य में अगर पश्चिमी मोर्चे पर किसी बड़े सैन्य टकराव की स्थिति बनती है, तो खड़ग कोर उन फॉर्मेशंस में होगी, जिन पर सबसे पहले और सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी.
9 कोर : राइजिंग स्टार कोरहिमाचल प्रदेश के योल में मौजूद 9 कोर, इंडियन आर्मी की एक होल्डिंग कोर है. इसे Pivot Corps भी कहा जाता है. इसका मुख्य काम देश के रणनीतिक ठिकानों की रक्षा करना और दुश्मन के शुरुआती हमलों को तब तक रोककर रखना है, जब तक स्ट्राइक कोर जवाबी कार्रवाई के लिए आगे नहीं आ जाती. इस कोर की कमान अब लेफ्टिनेंट जनरल आकाश जौहर के हाथों में होगी. वह बिहार रेजिमेंट से आते हैं.

उनसे पहले यह जिम्मेदारी लेफ्टिनेंट जनरल राजन शारावत संभाल रहे थे. रक्षा मंत्रालय और आर्मी हेडक्वार्टर ने अभी तक उनकी अगली नियुक्ति की जानकारी सार्वजनिक नहीं की है. हालांकि आम तौर पर एक कोर कमांड पूरी करने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को आर्मी हेडक्वार्टर, किसी बड़े ट्रेनिंग संस्थान या किसी कमांड में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाती है.
चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफअब बात एक ऐसे पद की, जो तीनों सेनाओं को जोड़ने का काम करता है. Chief of Integrated Defence Staff यानी CIDS के पद पर सेना, नेवी या एयरफोर्स; तीनों में से किसी भी सेवा के तीन-स्टार अधिकारी की नियुक्ति की जा सकती है.

इस पद की जरूरत 1999 के कारगिल युद्ध के बाद महसूस हुई थी. कारगिल समीक्षा समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और जॉइंटनेस के लिए एक मजबूत समन्वय व्यवस्था होनी चाहिए. उसी सोच के तहत यह पद बनाया गया. इस बार एयर मार्शल तेजिंदर सिंह को इस पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है. उनसे पहले एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित इस पद पर थे. एयर मार्शल तेजिंदर सिंह के पास 4500 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव है. वह फाइटर जेट उड़ाने के साथ-साथ हेलीकॉप्टर पायलट के तौर पर भी लंबा अनुभव रखते हैं.
वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफइंडियन एयरफोर्स में Vice Chief of Air Staff दूसरा सबसे बड़ा पद होता है. इस जिम्मेदारी के लिए एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को नियुक्त किया गया है. उनसे पहले एयर मार्शल नागेश कपूर इस पद पर थे.

एयर मार्शल दीक्षित इससे पहले Chief of Integrated Defence Staff के पद पर सेवाएं दे रहे थे. इससे पहले वह एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, सेंट्रल एयर कमांड भी रह चुके हैं. अपने करियर के दौरान वह ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन सफेद सागर जैसे अहम सैन्य अभियानों का हिस्सा रहे हैं. उनके पास 3300 घंटे से ज्यादा का फ्लाइंग अनुभव है.
इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG)इसके अलावा साल 2026 में इंडियन आर्मी में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है. पहली बार सेना में इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप यानी IBG बनाए गए हैं. कुल पांच IBG बनाई गई हैं, जो 17 माउंटेन स्ट्राइक कोर के तहत काम करेंगी. हर IBG की कमान मेजर जनरल रैंक का अधिकारी संभालेगा. इसके अलावा Chief Operations Officer का नया पद भी बनाया गया है, जिसकी जिम्मेदारी ब्रिगेडियर रैंक के अधिकारी के पास होगी.
आसान भाषा में कहें तो IBG ऐसा सैन्य ग्रुप होगा, जिसमें सेना के लगभग हर प्रमुख अंग के सैनिक शामिल होंगे. यानी इन्फेंट्री, आर्मर्ड या टैंक, मैकेनाइज्ड इन्फेंट्री, इंजीनियर्स, एयर डिफेंस, सिग्नल्स, लॉजिस्टिक्स और मेडिकल कोर. दूसरे शब्दों में कहें तो यह अपने आप में एक ऐसी फॉर्मेशन होगी, जो जरूरत पड़ने पर बिना किसी दूसरी यूनिट का इंतजार किए तेजी से ऑपरेशन शुरू कर सकेगी. बदलते वॉरफेयर में तेजी से फैसले लेना और कम समय में जवाब देना सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है. IBG का मकसद भी यही है कि सेना पहले से ज्यादा फुर्तीली, लचीली और तेजी से प्रतिक्रिया देने वाली फोर्स बन सके.
कुलजमा बात ये है कि इंडियन आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में हुए ये बदलाव सिर्फ रूटीन पोस्टिंग नहीं हैं. ऐसे समय में जब दुनिया तेजी से बदलते वॉरफेयर, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर अटैक और मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस के दौर से गुजर रही है, भारत भी अपनी सैन्य नेतृत्व टीम और युद्ध लड़ने के तरीके में बदलाव कर रहा है.
नई नियुक्तियां सिर्फ चेहरे बदलने तक सीमित नहीं हैं. इनके जरिए आने वाले वर्षों की सैन्य रणनीति, ऑपरेशनल तैयारी और आधुनिकीकरण की दिशा भी तय होगी. इसलिए इन बदलावों को सिर्फ अफसरों की पोस्टिंग नहीं, बल्कि भारत की भविष्य की रक्षा तैयारियों के अहम संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है.
(यह भी पढ़ें: 'चीन के साथ बॉर्डर पर हालात स्थिर लेकिन...', आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी ने जाते-जाते क्या कह दिया?)
वीडियो: कौन हैं Lieutenant General Dhiraj Seth, जो अब Indian Army की कमान संभालेंगे


















