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यूपी में गंगा किनारे 1000 बीघा सरकारी जमीन का घोटाला, 19 पर केस; बर्खास्त SDM, लेखपाल समेत 6 गिरफ्तार

Uttar Pradesh Land Scam: संभल में गंगा किनारे 1000 बीघा सरकारी जमीन के अवैध आवंटन का मामला सामने आया है. बर्खास्त SDM समेत 19 लोगों पर केस दर्ज हुआ है, जिनमें से 6 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं. क्या है पूरा मामला?

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गंगा किनारे करीब 1000 बीघा सरकारी जमीन के अवैध आवंटन का मामला. (सांकेतिक फोटो: AI)

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  • उत्तर प्रदेश के संभल जिले में गंगा किनारे करीब 1000 बीघा सरकारी जमीन के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अवैध आवंटन के आरोप में 19 लोगों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया है।
  • इस मामले की शुरुआत 2018 में हुई थी जब फर्जी पट्टे रद्द किए गए थे, लेकिन 2019 में पुनः 162 लोगों को सरकारी जमीन के पट्टे जारी किए गए, जिसके बाद जांच में गड़बड़ी सामने आई।
  • जांच रिपोर्ट के बाद 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है, जबकि बाकी आरोपियों की तलाश और पुलिस कार्रवाई जारी है।
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अभिनव माथुर

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में गंगा किनारे करीब 1000 बीघा सरकारी जमीन के अवैध आवंटन का मामला सामने आया है. जांच में गड़बड़ी पाए जाने के बाद पुलिस ने बर्खास्त SDM, तहसीलदार, चकबंदी अधिकारी, लेखपाल, कानूनगो और पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता (DGC) समेत 19 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है. इनमें से 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है. बाकी की तलाश जारी है.

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क्या है पूरा मामला?

आजतक से जुड़े अभिनव माथुर की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरा मामला संभल जिले की गुन्नौर तहसील के असदपुर, सुखैला और आसपास के गांवों की झाऊ श्रेणी की सरकारी जमीन का है. सुखैला गांव की करीब 1144 बीघा सरकारी जमीन चकबंदी प्रक्रिया के तहत थी.

आरोप है कि साल 2007 के बाद इस सरकारी जमीन के फर्जी कागजात तैयार किए गए और लोगों को पट्टे बांट दिए गए. बताते चलें कि सरकार गरीब या भूमिहीन किसानों को खेती के लिए सरकारी जमीन का एक टुकड़ा तय समयसीमा के लिए देती है, जिसे पट्टा कहते हैं.

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कब सामने आया मामला?

यह मामला पहली बार साल 2018 में सामने आया था. उस समय फर्जी पट्टे रद्द कर दिए गए थे और तत्कालीन अधिकारियों के साथ-साथ करीब पांच दर्जन लाभार्थियों के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ था. लेकिन इसके बावजूद साल 2019 में तत्कालीन SDM ओमवीर सिंह ने 162 लोगों के नाम फिर से पट्टे आवंटित कर दिए. 2019 में ही एक दूसरे मामले में SDM ओमवीर सिंह को बर्खास्त कर दिया गया था.

बाद में जब इन पट्टों की जांच हुई तो जमीन के क्षेत्रफल और दस्तावेजों में कई गड़बड़ियां मिलीं. इसके बाद साल 2023 में 17 अपात्र लोगों के पट्टे रद्द कर दिए गए. हालांकि 145 लोगों के नाम अब भी पट्टों में दर्ज थे.

लेखपाल ने मामले की जांच की

संभल में सरकारी जमीनों को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई के बीच गुन्नौर तहसील में तैनात लेखपाल स्वाति शर्मा ने पूरे मामले की जांच की. उन्होंने इसी साल 4 जून को अपनी जांच रिपोर्ट संभल डीएम अंकित खंडेलवाल को सौंपी. रिपोर्ट में साफ कहा गया कि गंगा किनारे की सरकारी जमीन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आवंटित की गई और इसमें कई अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत रही. रिपोर्ट में विभागीय कार्रवाई की भी सिफारिश की गई.

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19 के खिलाफ FIR, जिनमें 6 अरेस्ट

इसके बाद 2 जुलाई को लेखपाल स्वाति शर्मा की शिकायत पर गुन्नौर थाने में एफआईआर दर्ज की गई. पुलिस ने तत्कालीन SDM ओमवीर सिंह, तत्कालीन तहसीलदार करम सिंह, पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता (DGC), पूर्व ग्राम प्रधान, सहायक चकबंदी अधिकारी, लेखपाल, कानूनगो, जिला पंचायत सदस्य और अन्य लोगों समेत कुल 19 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया.

एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई के निर्देश पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बर्खास्त SDM ओमवीर सिंह, पूर्व ग्राम प्रधान विक्रांत, पूर्व DGC जय भारद्वाज, पूर्व कानूनगो राजवीर सिंह, पूर्व चकबंदी लेखपाल भीमराव सिंह और महेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया. सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

Sambhal ganga Land lease Scam
पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. (फोटो: ITG)

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पुलिस के मुताबिक इस मामले में कुल 19 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. 6 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. बाकियों को पकड़ने के लिए भी पुलिस जुटी हुई है.

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