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TMC के बागी गुट का 'तृणमूल भवन' पर कब्जा, बैनर से ममता बनर्जी की तस्वीर गायब

Kolkata में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी नेताओं ने पार्टी दफ्तर पर बैठक कर नया बैनर लगाया और असली पार्टी होने का दावा किया. ममता गुट ने इसे अवैध कब्जा बताकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. क्या है पूरा मामला?

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दफ्तर के बाहर नए बैनर में अरूप रॉय को TMC अध्यक्ष बताया गया. (फोटो: ITG)

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  • तृणमूल कांग्रेस के बागी नेताओं ने 3 जुलाई को कोलकाता के तृणमूल भवन पर कब्जा कर बैठक की और नया बैनर लगाकर असली पार्टी होने का दावा किया, जिससे पार्टी के अंदर विवाद बढ़ गया।
  • साल 2022 से तृणमूल भवन टीएमसी का राज्य कार्यालय है और बागी नेताओं का पार्टी से अलगाव और चुनाव आयोग से समर्थन प्राप्ति की कोशिश इस कब्जे की पृष्ठभूमि है।
  • चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से 6 जुलाई तक पार्टी संगठन के दावे और संबंधित सबूत मांगे हैं, जिसके आधार पर आगे का फैसला होगा।
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अनिर्बन सिन्हा रॉय

तृणमूल कांग्रेस (TMC) की लड़ाई अब सिर्फ नेताओं के बयान या चुनाव आयोग तक सीमित नहीं रही. मामला अब पार्टी के दफ्तर पर कब्जे तक पहुंच गया है. कोलकाता में बागी नेता सीधे पार्टी दफ्तर 'तृणमूल भवन' पहुंचे, बैठक की और नया बैनर टांग दिया. उनका दावा है कि असली TMC वही हैं, इसलिए पार्टी के दफ्तर पर भी हक उनका है. ममता बनर्जी गुट ने इसे कब्जे की कोशिश बताया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.

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2 जुलाई को दिल्ली में भारतीय चुनाव आयोग (ECI) से मुलाकात करने के बाद ऋतब्रत बनर्जी और फिरहाद हकीम के साथ टीएमसी के बागी नेता 3 जुलाई को कोलकाता के तृणमूल भवन पहुंचे. यही टीएमसी का राज्य कार्यालय है. यहां पहुंच कर उन्होंने यह जताने की कोशिश की कि पार्टी पर असली हक उनका है.

इंडिया टुडे से जुड़े अनिर्बन सिन्हा रॉय की रिपोर्ट के मुताबिक, ऋतब्रत बनर्जी के साथ फिरहाद हकीम, जावेद खान, संदीपन साहा और अखरुज्जमान समेत कई नेता मौजूद थे. उस समय ममता बनर्जी गुट की नेता और पूर्व मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य भी दफ्तर में थीं. लेकिन बागी नेताओं के पहुंचते ही वे वहां से चली गईं.

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दफ्तर के अंदर बैठक की

बागी नेताओं ने पहले दफ्तर के अंदर बैठक की. बैठक खत्म होने के बाद उन्होंने मेन गेट पर नया ताला लगा दिया. दफ्तर के बाहर नया बैनर भी लगाया गया. इस बैनर पर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस लिखा है, लेकिन ममता बनर्जी की जगह अरूप रॉय को पार्टी का अध्यक्ष बताया गया है. साथ ही बैनर पर ममता बनर्जी की तस्वीर भी नहीं लगाई गई. हालांकि, दफ्तर के अंदर लगी उनकी तस्वीरें और कटआउट नहीं हटाए गए.

बागी नेताओं का कहना है कि असली टीएमसी वही हैं. इसलिए पार्टी का यह दफ्तर भी उनका है. जब वो वहां से चले गए, तब भी दफ्तर के गेट पर लगाया गया नया ताला लगा हुआ था. 

'हम ही असली तृणमूल'

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले पर बागी गुट के नेता अखरुज्जमान ने कहा

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“हम ही असली तृणमूल कांग्रेस है. यह दफ्तर हमारी पार्टी का है और आगे भी हमारा ही रहेगा. हमने मकान मालिक से बात कर ली है. मेन गेट की चाबी भी अब हमारे पास रहेगी. मैं पहले भी यहां आता था. चुनाव के दौरान कुछ समय नहीं आ पाया था. अब फिर से आया हूं. इसमें कुछ भी गलत नहीं है.”

साल 2022 से यही इमारत टीएमसी का राज्य कार्यालय है. इससे पहले पार्टी का दफ्तर ईएम बाइपास के पास दूसरी जगह था. लेकिन वहां नई इमारत बनने का काम शुरू होने के बाद पार्टी इस दफ्तर में आ गई थी.

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ममता गुट ने किया विरोध प्रदर्शन

बागी नेताओं के जाने के बाद ममता बनर्जी गुट के विधायक और नेता तृणमूल भवन के बाहर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. उनका कहना था कि बागी नेताओं ने दफ्तर पर नया ताला लगा दिया है, इसलिए वे अपने ही पार्टी दफ्तर के अंदर नहीं जा पा रहे हैं. इस प्रदर्शन में कुणाल घोष, मदन मित्रा और कई युवा नेता भी शामिल हुए. टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने कहा, 

“यह तृणमूल पार्टी को नुकसान पहुंचाने की एक बड़ी साजिश है... बंगाल की जनता और तृणमूल कार्यकर्ता सब कुछ देख रहे हैं.”

ममता बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग से बागी नेताओं की मुलाकात पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि जिन नेताओं को पार्टी से निकाल दिया गया है, उन्हें टीएमसी की तरफ से चुनाव आयोग के सामने अपनी बात रखने का कोई अधिकार नहीं है. ममता बनर्जी गुट ने पार्टी कार्यालय पर कथित जबरन कब्जे को लेकर पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है.

अब चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से 6 जुलाई शाम 5:30 बजे तक अपने-अपने दावे और सबूत जमा करने को कहा है. दोनों पक्षों को बताना होगा कि पार्टी का असली संगठन किसके पास है, संगठनात्मक चुनाव कैसे हुए, साइनिंग अथॉरिटी कौन हैं और पार्टी पर असली कंट्रोल किसका है. इन सबूतों को देखने के बाद चुनाव आयोग आगे का फैसला करेगा.

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