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नई EPF स्कीम में प्रोविडेंट फंड ₹1800 करके सरकार ने आपके साथ खेल तो नहीं कर दिया?

सरकार ने पीएफ से जुड़े नियमों में बदलाव किया है. नए नियम के तहत चाहे आपकी सैलरी 50 हजार हो या 10 लाख. अब कंपनी चाहे तो तो अपनी तरफ से पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन केवल 1800 रुपये हर महीने पर लॉक कर सकती है. फिर चाहे आपकी बेसिक सैलरी जितनी भी हो.

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पीएफ से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है. (इंडिया टुडे)

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  • सरकार ने पुरानी Provident Fund Scheme, 1952 की जगह EPF Scheme, 2026 लागू की है, जिसमें कंपनी का PF कॉन्ट्रिब्यूशन 1800 रुपये प्रति माह तक लॉक किया जा सकता है।
  • 74 साल पुराने PF कानून में बदलाव का कारण था बेसिक सैलरी पर PF कटौती नियम का 15 हजार रुपये तक सीमित होना और कंपनियों की बढ़ती सहूलियत की मांग।
  • नई स्कीम के बाद कंपनी केवल 1800 रुपये तक PF जमा करने की बाध्यता में है, जिससे कर्मचारियों की पेंशन और रिटायरमेंट फंड पर असर पड़ सकता है।

प्रोविडेंट फंड से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव हुए हैं. अब अगर आप कहीं नौकरी करते हैं तो आपके सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव देखने को मिल सकता है. वजह है 74 साल पुराने कानून में बदलाव. सरकार ने Provident Fund Scheme, 1952 की जगह अब EPF Scheme, 2026 लागू कर दी है. नए नियमों के तहत अब कंपनी चाहे तो अपनी तरफ से PF कॉन्ट्रिब्यूशन केवल 1800 रुपये हर महीने पर लॉक कर सकती है. फिर चाहे आपकी सैलरी 50 हजार हो या 10 लाख.

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पुराना नियम क्या था?

पहले नियम ये था कि 15 हजार रुपये तक की बेसिक सैलरी पर PF का कॉन्ट्रिब्यूशन अनिवार्य था. 15 हजार रुपये तक की बेसिक सैलरी पर 12 प्रतिशत PF कटता था. यानी 1800 रुपये. इसके ऊपर की बेसिक सैलरी पर ये वॉलिंटियरी था. माने अगर आपकी बेसिक सैलरी 50 हजार है तो आप इस पर भी 12 प्रतिशत PF कटवा सकते थे. तब छह हजार रुपये आपको कटवाने होते. इतना ही कंपनी भी देती. लेकिन अगर आप ऐसा नहीं चाहते तो फिर 15 हजार की स्टैंडर्ड सीलिंग के हिसाब से आपके 1800 रुपये कटते.

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नए नियम में 1,800 रुपये का ट्विस्ट क्या है?

नए नियम से पहले कंपनी को कर्मचारी के बराबर PF में कॉन्ट्रिब्यूट करना होता था. लेकिन अब कंपनी को छूट है कि वो 1800 रुपये से ज्यादा PF जमा करे या नहीं. यानी कंपनियां इस 15,000 की लिमिट को बेस मानकर आपका और अपना कॉन्ट्रिब्यूशन 1800 रुपये महीने फिक्स कर सकती है. भले ही आपकी बेसिक सैलरी 50 हजार रुपये क्यों न हो. इसके ऊपर PF काटना पूरी तरह से कर्मचारी और कंपनी की पॉलिसी पर डिपेंड करता है.

यानी अगर कोई कर्मचारी अपनी 50 हजार की बेसिक सैलरी पर 12 प्रतिशत यानी छह हजार रुपये PF कटवाना चाहता है तो इसके लिए कंपनी की सहमति जरूरी है. साथ ही ये भी जरूरी नहीं है कि कंपनी भी अपनी तरफ से उतना कॉन्ट्रिब्यूट करे. कंपनी चाहे तो छह हजार भी कॉन्ट्रिब्यूट कर सकती है. लेकिन अगर नहीं चाहे तो 1800 रुपये ही देगी. ये पूरी तरह से कंपनी की पॉलिसी पर निर्भर करता है.

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जिनका पहले से ज्यादा कट रहा था उनका क्या?

अब सवाल है कि जिन कर्मचारियों का PF फिलहाल 1800 रुपये से ज्यादा कट रहा है उनका क्या होगा? इस सवाल पर हमने चार्टर्ड अकाउंटेंट उमेश पांडे की राय ली. उन्होंने बताया,

 मान लीजिए एक कर्मचारी की बेसिक सैलरी 30,000 रुपये है. पुराने नियम के तहत इस पर 12 प्रतिशत PF कटेगा. यानी 3,600 रुपये. अब नए नियमों के मुताबिक, इसमें से 1800 रुपये कटवाना ही अनिवार्य है. बाकी वॉलिंटियरी है. यदि कर्मचारी पूरे वेतन पर PF कटवाना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है. लेकिन इसके लिए कंपनी की भी सहमति जरूरी है.

जॉब चेंज करने पर क्या होगा?

जॉब चेंज करने पर अक्सर सैलर बढ़ती है. पुराने नियमों के मुताबिक उसी हिसाब से PF भी ज्यादा कटता है. लेकिन नए स्कीम के बाद ऐसा होना जरूरी नहीं है. उमेश पांडे के मुताबिक, अब ये कंपनी की पॉलिसी पर निर्भर करेगा. मान लीजिए नई नौकरी में आपकी बेसिक सैलरी 50 हजार रुपये हो गई. पुराने नियम के हिसाब से इसका 12 प्रतिशत यानी छह हजार रुपये कटने चाहिए. इतना ही कंपनी भी देगी. लेकिन नए नियमों में कंपनी इसके लिए मजबूर नहीं होगी. यानी अगर वो चाहेगी तो अपनी तरफ से छह हजार कॉन्ट्रिब्यूट कर सकती है. नहीं तो बाध्यता 1800 देने की ही है. यही नहीं, अगर कंपनी भी सहमत होगी तभी आप भी 1800 से ज्यादा PF कटवा पाएंगे.

कर्मचारी को क्या फायदा होगा?

प्रोविडेंट फंड (PF) का पूरा हिस्सा कॉस्ट टू कंपनी (CTC) में शामिल होता है. CTC में कर्मचारी और कंपनी दोनों का PF कॉन्ट्रिब्यूशन जुड़ता है. कर्मचारी के हिस्से का 12 प्रतिशत आपकी बेसिक सैलरी से काटकर PF में जमा होता है. वहीं कंपनी अपनी तरफ से बेसिक सैलरी के 12 प्रतिशत के बराबर पैसा अपनी तरफ से देती है. इसे कंपनी सीटीसी का हिस्सा मान कर चलती है.

लेकिन कंपनी का PF कॉन्ट्रिब्यूशन आपके मंथली इन हैंड (टेक होम) सैलरी में नहीं जुड़ता है. अब मान लीजिए आपका सीटीसी 1 लाख रुपये है. जिसमें बेसिक सैलरी 50 हजार रुपये है. इस पर आपका PF छह हजार रुपये कटता है. कंपनी भी छह हजार रुपये देती है. तो सीटीसी से 12 हजार रुपये कम हो जाएंगे और आपको 88,000 रुपये मिलेंगे. अगर टैक्स या किसी और तरह की कटौती न हो तो.

अब नए नियम से अगर आपका और कंपनी का PF कॉन्ट्रिब्यूशन 1,800-1,800 रुपये है तो आपके सीटीसी से 3,600 रुपये कम हो जाएंगे. और आपको इन हैंड 96,400 रुपये मिलेंगे. यदि बाकी टैक्स या कटौती नहीं की जाए तो. यानी कुल मिलाकर आपकी टेक होम सैलरी बढ़ जाएगी. इससे आप म्यूचुअल फंड या इक्विटी या स्मॉलकैप में लगा सकते हैं और PF की मौजूदा रिटर्न रेट से ज्यादा रिटर्न कमा सकते हैं. लेकिन इसमें जोखिम भी शामिल है. जबकि पीएफ जमा पर गारंटीड बेनेफिट मिलता है, वो भी टैक्स फ्री.

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कर्मचारियों को नुकसान क्या होगा?

उमेश पांडे ने बताया कि कर्मचारियों के PF अकाउंट में जमा होने वाले पैसे पर सरकार की ओर से 8.15 फीसदी का ब्याज मिलता है. ऐसे में फंड कम होगा तो रिटायरमेंट पर मिलने वाला पैसा भी कम ही रहेगा. इसके साथ ही पेंशन को लेकर भी लोचा है. कंपनी के 12 प्रतिशत हिस्से में 8.33 प्रतिशत हिस्सा पेंशन स्कीम में जाता है. अब अगर कॉन्ट्रिब्यूशन ही 1800 रुपये महीने का होगा तो रिटायरमेंट के बाद पेंशन भी बहुत कम बन पाएगी.

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