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दुधवा टाइगर रिजर्व में मिला दुर्लभ हरा सांप, तस्वीरें देख सब हैरान

इस सांप की सबसे खास बात है इसकी लंबी थूथन/नाक (स्नाउट) जो आमतौर पर किसी दूसरे वाइन स्नेक्स में नहीं देखा जाता. यह मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया के इलाकों (थाईलैंड, म्यांमार, लाओस) में पाया जाता है.

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दुधवा टाइगर रिजर्व में मिला दर्लभ सांप 'अहेतुल्ला लॉन्गिरोस्ट्रिस'. (फोटो क्रेडिट: दुधवा टाइगर रिजर्व - विपिन कपूर सैनी)

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी मेें स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व (DTR) में कुछ दिन पहले एक दुर्लभ प्रजाति का सांप मिला. ये एक लॉन्गस्नाउटेड वाइन स्नेक है जिसका नाम 'अहेतुल्ला लॉन्गिरोस्ट्रिस' बताया जा रहा है. उत्तर प्रदेश में इस सांप को पहली बार और भारत में दूसरी बार देखा गया.

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कैसे खोजा गया?

दुधवा टाइगर रिजर्व (DTR) ने 30 मार्च को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी थी. दुधवा टाइगर रिजर्व के पालिया-खेरी डिवीजन में कुछ गैंडों को जंगल में खुला छोड़ने का एक अभियान चल रहा था. सुरक्षा के लिहाज से वन विभाग की टीम आसपास की जमीन की जांच कर रही थी. इसी दौरान जब एक दीमक के टीले को हटाने के लिए खुदाई मशीन का उपयोग किया गया, तो अचानक एक चमकीला हरा सांप बाहर निकला. सांप का रंग और आकार देखकर सभी अधिकारी चौंक गए.

सांप की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, वन विभाग के अधिकारियों ने उसे बहुत ही सावधानी से पास के एक दूसरे दीमक के टीले में छोड़ दिया, ताकि वो अपने प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रह सके. वहीं मूल टीले को हाथ नहीं लगाया गया, जिससे वहां मौजूद अन्य जीवों और पर्यावरण को नुकसान न हो.

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DTR ने अपने X अकाउंट से इस सांप की तस्वीरें साझा की थीं जो अब वन विशेषज्ञों और नेचर लवर्स में उत्साह पैदा कर रही हैं.

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तस्वीर- दुधवा टाइगर रिजर्व.
क्यों खास है ये सांप?

अधिकारियों ने बताया कि सांप अभी सब-अडल्ट था, माने न तो पूरी तरह बच्चा और न ही पूरी तरह वयस्क. ये सांप चार फीट तक लंबे हो सकते हैं. आमतौर पर ये चमकीले हरे या नारंगी-भूरे रंग के होते हैं, लेकिन जिनका पेट नारंगी होता है. ये सांप बहुत ही पतला होता है और इसकी बनावट हरी बेल जैसी होती है. इस कारण इसे वाइन स्नेक भी कहा जाता है. बेल की तरह दिखने के कारण ये पेड़ों में आसानी से छिप सकता है. 

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तस्वीर- दुधवा टाइगर रिजर्व.

इस सांप की सबसे खास बात है इसकी लंबी थूथन/नाक (स्नाउट) जो आमतौर पर किसी दूसरे वाइन स्नेक्स में नहीं देखा जाता. यह मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व एशिया के इलाकों (थाईलैंड, म्यांमार, लाओस) में पाया जाता है.

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एक्सपर्ट ने क्या कहा?
इस खोज पर प्रतिक्रिया देते हुए दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच. राजा मोहन ने कहा,

“दुधवा लगातार अपने छिपे खजानों से हमें चौंकाता है. दुर्लभ सांप की खोज यह दिखाती है कि लगातार शोध और पर्यावरण संरक्षण कितना महत्वपूर्ण है.”

वहीं वन संरक्षक और उपनिदेशक डॉ. रंगराजू टी. ने कहा,

“यह खोज दिखाती है कि जंगल के छोटे-छोटे हिस्से, जैसे दीमक के टीले, भी दुर्लभ प्रजातियों के लिए कितने जरूरी होते हैं. यह भारतीय वन्यजीव संरक्षण के लिए एक बड़ी उपलब्धि है.” 

सांप की पहली खोज कब हुई थी?

इंडिया टुडे में छपी खबर के मुताबिक, इसकी शुरुआत दिसंबर 2021 में हुई, जब वैज्ञानिक सौरभ वर्मा और सोहम पाटेकर ने बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में टहल रहे थे. इस दौरान उनकी नजर एक मरे हुए सांप पर पड़ी. उसके 4 फुट लंबे शरीर और लंबी स्नाउट ने उनका ध्यान खींचा. इसके बाद DNA परीक्षण, फील्ड सर्वे और विस्तृत विश्लेषण के बाद उन्होंने यह साबित किया कि यह एक नई प्रजाति का वाइन स्नेक है. उनकी यह खोज साल 2024 में प्रकाशित हुई थी.

DTR के मुताबिक 2024 में ही मेघालय में भी ये सांप देखा गया था.

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