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'PM बनने के लिए राहुल गांधी को अनुभव नहीं', सवाल पर थरूर ने पूछा, 'मोदी के पास कितना था?'

Shashi Tharoor ने Ramchandra Guha के इस तर्क को खारिज कर दिया कि किसी राजनेता की काबिलियत को सिर्फ उनके पिछले प्रशासनिक अनुभव से ही मापा जाना चाहिए.

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शशि थरूर ने रामचंद्र गुहा से सवाल किया है (PHOTO-ITG)

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  • इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने एक इंटरव्यू में राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके पास प्रशासनिक अनुभव और विदेशी नीति की समझ की कमी है।
  • रामचंद्र गुहा के बयान के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि कई बड़े नेता बिना प्रशासनिक अनुभव के भी महत्वपूर्ण पदों पर रहते हैं, इसका उदाहरण बराक ओबामा और नरेंद्र मोदी हैं।
  • शशि थरूर ने बताया कि राहुल गांधी ने अपनी पार्टी का एक दशक से नेतृत्व किया है और राजनीतिक अनुभव के आधार पर उनका समर्थन किया जाना चाहिए, न कि केवल प्रशासनिक अनुभव से।

बीते दिनों मशहूर इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने एक इंटरव्यू के दौरान राहुल गांधी के अनुभव को लेकर सवाल उठाए थे. उन्होंने राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके पास प्रशासनिक अनुभव नहीं है. अब कांग्रेस सांसद शशि थरूर अपनी पार्टी के नेता राहुल गांधी के समर्थन में आ गए हैं. उन्होंने रामचंद्र गुहा को उदाहरण दिया कि कई ऐसे नेता हुए हैं जो कभी किसी प्रशासनिक पद पर नहीं रहे, लेकिन फिर भी बहुत बड़े नेता बनकर उभरे.

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इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने क्या कहा?

इंटरव्यू में इतिहासकार गुहा ने भारत का प्रधानमंत्री बनने के लिए राहुल गांधी की काबिलियत पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के पास प्रशासनिक अनुभव और गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकटों से निपटने के लिए जरूरी विदेश नीति की समझ की कमी है. उन्होंने पूछा कि राहुल गांधी में अपने राजनीतिक परिवार की विरासत और व्यक्तिगत शालीनता के अलावा इस पद के लिए और क्या योग्यता है?

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शशि थरूर का जवाब

रामचंद्र गुहा के इस बयान को शशि थरूर ने ‘अतिश्योक्ति’ बता दिया. उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे उदाहरणों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए पहले से प्रशासनिक या विदेश नीति का अनुभव होना जरूरी नहीं है. उन्होंने एक्स पर लिखा,

देखिए, रामचंद्र गुहा, यह बात कुछ ज्यादा ही हो गई. बराक ओबामा इलिनोइस से पहली बार सीनेटर बने थे, वो दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्रपति बने, तो उन्हें दुनिया के मामलों का क्या अनुभव था? जबकि उस समय दुनिया कई बड़े मुद्दों से जूझ रही थी. इसी तरह, गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी को भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंध संभालने का कितना अंतरराष्ट्रीय अनुभव था?  जब वो प्रधानमंत्री बने.

इसके बाद शशि थरूर ने राहुल गांधी के राजनीतिक अनुभवों के बारे में लिखा. उन्होंने लिखा कि कोई नेता अकेले सरकार नहीं चलाता. थरूर ने लिखा,

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राहुल गांधी ने एक राष्ट्रीय पार्टी की अगुवाई एक दशक से अधिक समय तक की है. दुनिया भर के नेताओं के साथ उनके अच्छे संबंध हैं और उनकी पार्टी के अंदर और बाहर सलाहकारों की कोई कमी नहीं है. कोई भी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री संकट का सामना अकेले नहीं करता; इसीलिए तो वे सरकार चलाते हैं! मुझे लगता है कि अब इस बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए विवाद को खत्म करने का समय आ गया है.

कुल मिला कर शशि थरूर ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि किसी राजनेता की काबिलियत को सिर्फ उनके पिछले प्रशासनिक अनुभव से ही मापा जाना चाहिए. यही वजह है कि उन्होंने दुनिया के कई ऐसे सफल नेताओं का उदाहरण दिया जिन्होंने बिना किसी बड़े प्रशासनिक अनुभव के पद संभाला था.

वीडियो: पंडित जवाहरलाल नेहरू का नाम लेकर शशि थरूर ने कांग्रेस आलाकमान से क्या कह दिया?

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