राम मंदिर चंदा चोरी मामले में कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और केस की जांच चल रही है. अयोध्या पुलिस अब जेल में बंद आरोपियों के नार्को और पॉलीग्राफी टेस्ट की मांग कर सकती है. जांच टीम साजिश की तह तक जाने के लिए कोर्ट से इन टेस्ट की मंजूरी ले सकती है. पुलिस सूत्रों का कहना है कि चढ़ावा चोरी के इस मामले में शामिल सभी लोगों तक पहुंचने और इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए पॉलीग्राफी टेस्ट का सहारा लिया जा सकता है.
अयोध्या दान चोरी केस: आरोपियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की तैयारी, अब होंगे और भी खुलासे!
Ram Temple donation theft: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच जारी है. सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों का नार्को और पॉलीग्राफी टेस्ट कराए जाने की मांग पुलिस कर सकती है.


टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने जांच टीम को आरोपियों से जेल के अंदर पूछताछ की अनुमति दी है. पांचों आरोपी अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, राम शंकर यादव, करुणेश पांडेय और मनीष यादव से रविवार को जिला जेल में पूछताछ की गई है. आरोपियों के बयान भी दर्ज किए गए हैं. पुलिस आरोपियों से अब डॉक्युमेंट्स, फाइनेंशियल और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर पूछताछ कर सकती है. जांच के बाद आरोपियों से आगे और पूछताछ के लिए कस्टडी बढ़ाए जाने की भी मांग की जा सकती है.
नॉर्को और पॉलीग्राफ कराए जाने की भी मांगटाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों के अनुसार पुलिस का मानना है कि आरोपियों के नार्को और पॉलीग्राफी टेस्ट से जांच को दिशा मिल सकती है. आरोपियों के विरोधाभासी बयानों के बीच कड़ी भी जोड़ने में सहायता मिलेगी. कथित मॉडस ऑपरेंडी को समझने और गबन के पैसों का किस तरह से लेन-देन हुआ और इसमें शामिल लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी. पॉलीग्राफी टेस्ट के ज़रिए यह भी पता चल सकेगा कि इस पूरे गबन को व्यक्तिगत स्तर पर कुछ लोगों ने अंजाम दिया है या एक पूरा रैकेट मंदिर प्रशासन के अंदर या बाहर से नेटवर्क की तरह काम कर रहा था.
यह भी पढ़ें: चंपत राय-अनिल मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट से बाहर, इस्तीफा मंजूर कर समिति ने कहा- 'हम शर्मिंदा हैं'
पुलिस को टेस्ट से अहम सुराग मिलने की उम्मीदसूत्रों का कहना है कि जांच टीम को उम्मीद है कि इन टेस्ट के जरिए जांच को नई दिशा मिल सकती है. जैसे कि अगर कहीं और कुछ कैश छुपाकर रखे हैं, दूसरी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं, तो इन तक पहुंचने के लिए लीड्स मिल सकेंगी. इसके अलावा, आरोपियों के बीच का कम्युनिकेशन चैनल और डॉक्युमेंट्स जैसे अहम सबूत मिल सकते हैं. जांच टीम को टेस्ट के बाद अगर कोई और जरूरी जानकारी मिलती है, तो वो CCTV फुटेज, बैंक अकाउंट्स का विश्लेषण, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स, फॉरेंसिक जांच, गवाहों के बयान और दूसरे सबूतों की जांच के बाद निष्कर्ष तक पहुंच सकेगी.
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या मंदिर के दान संचालन में संस्था के स्तर पर या निगरानी करने वालों की तरफ से कोई लापरवाही हुई थी? साथ ही, जांच टीम यह भी देखेगी कि सीनियर अधिकारियों को क्या मंदिर में हो रही इन गड़बड़ियों की जानकारी थी या नहीं?
वीडियो: मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे लैंडस्लाइड को बताया एक्ट ऑफ़ गॉड, 2 महीने पहले हुआ था शुरू
















