The Lallantop

न सरकार के लिए जवाबदेह, न ही RTI के दायरे में राम मंदिर ट्रस्ट: गृह मंत्रालय

Ram Temple Theft Case: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है जो केंद्र या राज्य सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं है. केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के मुताबिक, मंदिर ट्रस्ट का कामकाज RTI Act के दायरे में नहीं आता है.

Advertisement
post-main-image
राम मंदिर ट्रस्ट, केंद्र या उत्तर प्रदेश सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं है. (फाइल फोटो: आजतक)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • अयोध्या के राम मंदिर का प्रबंधन 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' करता है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत बनाया गया और यह केंद्र या उत्तर प्रदेश सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं है।
  • RTI एक्टिविस्ट नीरज शर्मा ने 2024 की शुरुआत में केंद्र सरकार से मंदिर ट्रस्ट को RTI एक्ट के तहत 'पब्लिक अथॉरिटी' मानने की मांग की थी, जिसे गृह मंत्रालय ने खारिज कर दिया।
  • 6 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर फैसला लिया जाएगा, जहां बहुमत के लिए कम से कम 6 वोटों की आवश्यकता होगी।

अयोध्या के राम मंदिर का मैनेजमेंट ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ करता है. यह ट्रस्ट केंद्र या उत्तर प्रदेश सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं है. गृह मंत्रालय ने पिछले साल सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन (CIC) को बताया था कि ट्रस्ट के सभी फैसले अंदरूनी तौर पर लिए जाते हैं. इस आधार पर सीआईसी ने अपने आदेश में बताया कि मंदिर ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है और इसका कामकाज RTI एक्ट के दायरे में नहीं आएगा.

Advertisement
गृह मंत्रालय ने क्या बताया?

टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 की शुरुआत में RTI एक्टिविस्ट नीरज शर्मा ने केंद्र सरकार से राम मंदिर ट्रस्ट के पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर्स (PIO) के नाम मांगे थे. यह जानने के लिए कि क्या यह ट्रस्ट सूचना का अधिकार (RTI) एक्ट, 2005 के तहत एक 'पब्लिक अथॉरिटी' है या नहीं. लेकिन गृह मंत्रालय (MHA) ने उनकी अपील खारिज कर दी. 

इसके बाद नीरज ने फरवरी 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया. कोर्ट ने सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन (CIC) को निर्देश दिया था कि वह गृह मंत्रालय का जवाब मांगने और उसकी जांच करने के बाद यह तय करे कि राम मंदिर ट्रस्ट एक पब्लिक अथॉरिटी है या एक ऑटोनॉमस बॉडी (स्वायत्त संस्था).

Advertisement
CIC ने सुनाया अहम फैसला

MHA ने 20 फरवरी को अपने जवाब ने बताया कि ट्रस्ट सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं है. इस जवाब के आधार पर CIC ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि मंदिर ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है. इसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत बनाया गया था और इसे राज्य या केंद्र सरकार से कोई आर्थिक मदद या प्रशासनिक नियंत्रण नहीं मिलता है. CIC ने कहा कि चूंकि मंदिर ट्रस्ट 'पब्लिक अथॉरिटी' नहीं है, इसलिए इसका कामकाज RTI एक्ट के दायरे में नहीं आएगा.

ये भी पढ़ें: 'मोजों में भरते दिखे नोटों की गड्डियां... ', राम मंदिर दान चोरी केस में नए वीडियो आए सामने

ट्रस्ट का स्ट्रक्चर क्या है?

6 जुलाई को राम मंदिर ट्रस्ट की एक अहम बैठक होनी है. इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर फैसला लिया जाएगा. दोनों ने ‘दान चोरी विवाद’ के बीच नैतिक आधार पर अपने पद छोड़ दिए हैं. यह बैठक इसलिए नाजुक और महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि चंपत राय और अनिल मिश्रा के भविष्य का फैसला वोटिंग के आंकड़ों में फंस सकता है. 

Advertisement

ट्रस्ट के 15 सदस्यों में से चार के पास वोटिंग का अधिकार नहीं है. ये आमतौर पर सरकारी प्रतिनिधि होते हैं. इनके पास नीतिगत फैसलों में वोट करने का अधिकार नहीं होता है. जबकि एक सदस्य का निधन हो चुका है. चंपत राय और अनिल मिश्रा अभी भी तकनीकी रूप से ट्रस्टी हैं और उन्हें बैठक में शामिल होने का अधिकार है. इसलिए बचे हुए 10 सदस्यों में से बहुमत के लिए कम से कम 6 वोटों की जरूरत है.

ऐसे में यह स्वाभाविक है कि चंपत और अनिल अपने खिलाफ वोट नहीं करेंगे. इस तरह 10 में से 2 वोट कम हो जाएंगे. अब शेष 8 सदस्यों में से 6 को उनके खिलाफ एकजुट होना होगा. अगर ऐसा नहीं होता तो यह प्रस्ताव गिर जाएगा.

चूंकि ट्रस्ट को एक ऐसी संस्था के तौर पर बनाया गया था जो खुद काम करती है और जिसका मैनेजमेंट और कामकाज इसके सदस्य अंदरूनी तौर पर तय करते हैं, इसलिए देश की किसी भी कानूनी संस्था के पास चंपत और अनिल को हटाने का अधिकार नहीं है.

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: राम मंदिर डोनेशन स्कैम में बैंकों का क्या रोल?

Advertisement