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न दिखेगी न चूकेगी, भारत की सबसे ताकतवर सबमरीन INS अरिदमन की एक-एक बात जानें

INS Aridaman के इंडियन नेवी के बेड़े में शामिल होने के बाद पहली बार भारत के पास समुद्र में तीन ऑपरेशनल बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां होंगी.

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राजनाथ सिंह ने INS अरिदमन के नेवी में शामिल होने का इशारा किया है. (फोटो- India Today)

न्यूक्लियर रिएक्टर की ताकत से चलने वाली भारत की तीसरी बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी ‘INS अरिदमन’ (INS Aridaman) नौसेना के बेड़े में शामिल हो गई. इसका आधिकारिक ऐलान तो नहीं हुआ है लेकिन भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार, 3 अप्रैल को अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर पोस्ट करके ये संकेत दिया है. एक लाइन की अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘शब्द नहीं, शक्ति है अरिदमन’. वहीं एक अन्य प्रोग्राम में रक्षामंत्री ने एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरी को नौसेना में शामिल कर दिया.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, INS अरिदमन के इंडियन नेवी के बेड़े में शामिल होने के बाद पहली बार भारत के पास समुद्र में तीन ऑपरेशनल बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां होंगी. अरिहंत क्लास (Arihant-class) की इस बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) को पूरी तरह से भारत में बनाया और डिजाइन किया गया है. दो स्वदेशी पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत (2016) और आईएनएस अरिघात (2024) पहले से ही नौसेना के पास हैं. हालांकि, INS अरिदमन की क्षमता उनसे कहीं ज्यादा है. 

पहले वालों से बेहतर है अरिदमन

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, यह पंडुब्बी करीब 7000 टन वजनी है और बाकी दोनों सबमरीन्स से ज्यादा लंबी दूरी की न्यूक्लियर मिसाइलें ले जाने में सक्षम है. INS अरिदमन में ‘छिपकर चलने की क्षमता’ (बेहतर स्टील्थ) के लिए ज्यादा ‘Streamlined’ डिजाइन दिया गया है. भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) में बने 83 मेगावाट के प्रेसराइज्ड वॉटर रिएक्टर (PWR) से इसे चलाया जाता है. पहले की दोनों पनडुब्बियों के मुकाबले इसमें 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब हैं, जो INS अरिहंत से दोगुनी क्षमता है. ये पनडुब्बी 3500 किमी रेंज की तकरीबन 8 K-4 बैलिस्टिक मिसाइलों और 750 किमी रेंज वाली 24 K-15 मिसाइलों को ले जा सकती है.

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न्यूक्लियर ट्रायड की मजबूती

नेवी के बेड़े में अरिदमन के शामिल होने के बाद समुद्र में भारत की लगातार परमाणु मौजूदगी रहेगी. यानी कम से कम एक परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बी हमेशा समुद्र में तैनात रहेगी. अरिदमन की तैनाती ने भारत के ‘न्यूक्लियर ट्रायड’ (Nuclear Triad) को मजबूती दी है. न्यूक्लियर ट्रायड का मतलब है हवा, जमीन और समुद्र तीनों जगहों से परमाणु हमले करने की क्षमता रखना. ऐसी क्षमता रखने वाले देशों में भारत अमेरिका, रूस, चीन और फ्रांस जैसे देशों के साथ शामिल है.

तारागिरी भी नेवी के बेड़े में शामिल

अरिदमन के साथ गाइडेड-मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरी को भी शुक्रवार, 3 अप्रैल को विशाखापत्तनम के ईस्टर्न नेवल कमांड बेस पर भारतीय नौसेना में शामिल किया गया. द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, INS तारागिरी में मॉडर्न स्टील्थ डिजाइन है, जिससे इसका रडार पर दिखना काफी कम हो जाता है. इसमें 75 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है. यह शिप डीजल या गैस इंजन से चलता है और इसमें सतह से सतह पर मार करने वाली सुपरसोनिक मिसाइलें और एडवान्स्ड एंटी-सबमरीन सिस्टम लगे हैं. अब यह ईस्टर्न फ्लीट का एक अहम हिस्सा बन गया है.

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