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निर्मला सीतारमण के केस में कोर्ट ने कहा 'Floccinaucinihilipilification', ये होता क्या है?

Delhi Court ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ दायर याचिका को ‘Floccinaucinihilipilification’ बताया और आगे की कार्रवाई करने से इनकार कर दिया है. ‘फ्लोक्सीनाउसिनीहिलिपिलिफिकेशन’ का मतलब आज जान ही लीजिए.

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कोर्ट ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ दायर मानहानि की याचिका खारिज कर दी है. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)

दिल्ली की एक अदालत ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ दायर मानहानि की याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने इस याचिका को ‘फ्लोक्सीनाउसिनीहिलिपिलिफिकेशन’ (Floccinaucinihilipilification) बताया और आगे की कार्रवाई करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने जिस शब्द का इस्तेमाल किया, अब उसकी खूब चर्चा हो रही है. यह अंग्रेजी का एक ऐसा दुर्लभ शब्द है, जिसे पहली बार बोलने में शायद सबकी जुबान लड़खड़ा जाए. 

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‘फ्लोक्सीनाउसिनीहिलिपिलिफिकेशन’ का क्या मतलब है?

‘फ्लोकसिनाउसिनिहिलिपिलिफिकेशन’ शब्द का मतलब है किसी चीज को बेकार या बिना किसी वैल्यू के आंकना. यह अंग्रेजी शब्दकोश के सबसे लंबे शब्दों में से एक है, जिसमें 29 अक्षर होते हैं. भारत में इसे कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने काफी लोकप्रिय बनाया था. यह शब्द चार लैटिन शब्दों के मेल से बना है- फ्लोक्सी, नाउसी, नीहिली, और पिलि. इन सभी का मतलब ‘बहुत कम मूल्य’ या ‘कुछ भी नहीं’ होता है. अगर आपको भी इसे बोलने में दिक्कत हो रही है तो इसे टुकड़ों में बोलकर देखिए- फ्लोक्सीनौ-सीनी-हिली-पिली-फिकेशन. 

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दिल्ली कोर्ट ने याचिका खारिज क्यों कर दी? 

ET की रिपोर्ट के मुताबिक, राउज एवेन्यू कोर्ट के एडिशनल चीफ़ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट पारस दलाल ने पाया कि शिकायत आपराधिक मानहानि के मानकों को पूरा नहीं करती. कोर्ट ने कहा कि पेश किए गए सबूतों में पर्याप्त दम नहीं था. आरोपों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई करना सही नहीं था. मजिस्ट्रेट ने कहा कि एक बेकार या बेमतलब की बात को बहुत ज्यादा खींचा गया है. 

क्या था मामला?

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यह शिकायत AAP नेता सोमनाथ भारती की पत्नी लिपिका मित्रा ने दायर की थी. उन्होंने आरोप लगाया कि निर्मला सीतारमण ने 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपमानजनक टिप्पणियां कीं. शिकायत के मुताबिक, ये टिप्पणियां टेलीविजन और सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर दिखाई गईं. इनमें भारती के वैवाहिक विवाद का जिक्र था. इन बयानों में घरेलू हिंसा के आरोपों और एक पत्रकार से जुड़े पिछले मामले का भी जिक्र था.

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कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने पाया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिए गए बयान दो पार्टियों के बीच राजनीतिक चर्चा का हिस्सा थे. कोर्ट ने यह भी पाया कि इन टिप्पणियों का मकसद विपक्षी पार्टियों की आलोचना करना था. सीतारमण ने महिलाओं की सुरक्षा और प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाने के लिए कई उदाहरण दिए. इन बयानों का कुल मिलाकर लहजा राजनीतिक था, न कि निजी या मानहानिकारक. कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि लिपिका मित्रा के खिलाफ कोई भी मानहानिकारक टिप्पणी नहीं की गई थी.

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