मेज पर सजी छोटी-बड़ी बंदूकें. कहीं देसी असलहे, तो कहीं विदेशी हथियार. एक-दो नहीं, सैकड़ों की तादाद में हथियार. ये किसी पुलिस थाने या हथियारों की प्रदर्शनी का नजारा नहीं है. ये यूपी के एक विधायक के घर का नजारा है. मौका दशहरे का और आयोजन है शस्त्र पूजन का. ये हैं कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का घर. प्रतापगढ़ स्थित उनके बेती महल में 20 अक्टूबर को दशहरे के मौके पर शस्त्र पूजन हुआ. लेकिन इस बार हथियारों की ये नुमाइश सिर्फ धार्मिक परंपरा की वजह से चर्चा में नहीं है. इसके पीछे एक पुराना विवाद भी है.
दशहरे पर राजा भैया के महल में शस्त्र पूजन, देशी-विदेशी हथियार सजा किया 'शक्ति प्रदर्शन'
प्रतापगढ़ के बेती महल में दशहरे पर परंपरा के मुताबिक शस्त्र पूजन किया गया. राजा भैया की ओर से किए गए इस आयोजन पर सवाल उठ रहे हैं. आयोजकों ने हथियारों को लाइसेंसी बताया, जबकि पत्नी भानवी सिंह पहले ही अवैध विदेशी हथियार रखने का आरोप लगा चुकी हैं.

3 जून, 2025 को राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर कथित तौर पर राजा भैया के पास अवैध विदेशी हथियारों का जखीरा होने का आरोप लगाया था. इसके बाद से ही उनके शस्त्र पूजन को लेकर सवाल उठते रहे हैं. 20 अक्टूबर के आयोजन के वीडियो में 500 से ज्यादा हथियार नजर आने का दावा किया जा रहा है. इनमें देसी और विदेशी दोनों तरह के हथियार शामिल हैं.
राजा भैया की ओर से बताया गया कि बेती महल परिसर में जिन हथियारों की पूजा की गई, वे सभी लाइसेंसी हैं. इनमें करीब 30 असलहे राजा भैया और उनके परिवार के हैं. बाकी हथियार उनके समर्थकों के बताए गए. लेकिन इतने सारे हथियारों की एक साथ पूजा करने के सवाल पर उन्होंने कहा,
पत्नी ने लगाए थे गंभीर आरोपये तो प्राचीन भारतीय परंपरा है. विजयादशमी के दिन शस्त्र पूजन अनादिकाल से होता आ रहा है. जहां तक अपने परिवार की बात करें तो ये पुरानी परंपरा है. हर व्यक्ति को भारत की गौरवमयी पुरानी परंपरा से जोड़ना. आपने देखा होगा कि सबलोग स्वदेशी वस्त्र यानी धोती-कुर्ता में आए हैं. ये लुप्त होती जा रही है भारतीयता को बचाने का प्रयास है. आज का युवा वैसे तो स्वदेशी कपड़े कम ही पहनता है. हमारा अनुरोध है कि कम से कम त्यौहार के दिन ऐसे वस्त्र पहनने चाहिए.
राजा भैया के हथियारों को लेकर विवाद पिछले साल उनकी पत्नी भानवी सिंह के आरोपों के बाद सुर्खियों में आया था. भानवी सिंह ने अपने पत्र में कथित तौर पर अवैध विदेशी हथियार रखने का आरोप लगाया था. इसके बाद राजा भैया की ओर से सफाई दी गई कि उनके पास मौजूद सभी हथियार वैध हैं और इनका लाइसेंस भी है.
राजा भैया के मुताबिक, उनके, उनके परिवार और सुरक्षाकर्मियों के नाम पर 30 से ज्यादा हथियार लाइसेंसी हैं. जबकि बाकी हथियार उनके समर्थकों के हैं. उस वक्त उन्होंने अपने और समर्थकों के रिश्ते को लेकर एक बयान भी दिया था. जो हमारा है, वो समर्थकों का है और जो समर्थकों का है, वो हमारा है.
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अब एक बार फिर राजा भैया का शस्त्र पूजन चर्चा में है. उनके समर्थक इसे दशहरे की पारंपरिक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा बता रहे हैं. वहीं, इस आयोजन को शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है. सवाल ये है कि सैकड़ों हथियारों के साथ होने वाला ये शस्त्र पूजन सिर्फ परंपरा है या इसके पीछे कोई सियासी संदेश भी है?
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