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कभी हाथों में लहराती थीं बंदूक, पूर्व महिला नक्सलियों ने रैंप पर दिखाया जलवा, वीडियो वायरल

छत्तीसगढ़ के Raipur में माओवाद से मुख्यधारा में लौटी महिलाओं ने एक कार्यक्रम में शानदार रैंप वॉक किया. उनका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. इस कार्यक्रम में राज्य के सीएम भी शामिल हुए.

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घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. (फोटो: ANI)

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  • छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नेशनल हैंडलूम डे के कार्यक्रम में माओवादी जीवन छोड़ चुकी महिलाओं ने हैंडलूम कपड़े पहनकर रैंप वॉक किया, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी शामिल हुए।
  • बस्तर के घने जंगलों में हथियार उठाने वाली महिलाओं द्वारा उग्रवाद छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का कारण केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा नक्सलवाद मुक्त करने के लिए चलाई जा रही योजनाएं हैं।
  • मुख्यधारा में लौटने वाली महिलाओं का रैंप वॉक सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिससे इनके सामाजिक पुनर्वास और नई करियर संभावनाओं को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

'माओवादी' शब्द सुनते ही हथियार उठाए और चेहरा ढंके लोगों की तस्वीर नजर आती है. देश को नक्सल मुक्त बनाने के लिए राज्य और केंद्र सरकारों की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. मुख्यधारा में लौटने के बाद कई माओवादियों की जिंदगी में जबरदस्त बदलाव आया है. इस बदलाव की एक शानदार मिसाल छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में देखने को मिली. बस्तर के घने जंगलों में कभी हथियार उठाने वाली महिलाओं ने यहां एक कार्यक्रम में शानदार रैंप वॉक किया. इसका वीडियो इंटरनेट पर खूब वायरल हो रहा है.

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यह वीडियो ‘नेशनल हैंडलूम डे’ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम का है. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी शामिल हुए थे. मुख्यधारा में शामिल हो चुकीं महिलाओं ने जब हैंडलूम के कपड़े पहनकर रैंप पर वॉक किया, तो दर्शकों ने जोरदार तालियों से उनका स्वागत किया. 

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इनमें से कई महिलाएं अब नए करियर बना रही हैं. सामाजिक संगठनों के साथ काम कर रही हैं और सामान्य जिंदगी जी रही हैं. मुख्यधारा में लौटने के बाद उनके पास कई ऐसे अवसर आए हैं, जो उनकी पहुंच से बाहर थे.

वायरल वीडियो पर क्या बोले लोग?

इस इवेंट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है. महिलाओं के इस बदलाव से लोग प्रभावित हैं. उनकी तरफ से कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. एक यूजर ने लिखा,

"अगर यह सच है, तो मुझे लगता है कि यह एक अद्भुत उपलब्धि है. यह कट्टरता को खत्म करने, हालात सुधारने, इलाके को डेवलप करने की काबिलियत दिखाता है, ताकि लोग हथियार छोड़ दें, और समाज में सही मायने में हिस्सा लें!"

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Former Women Rebels ramp walk
(फोटो: X)

कई लोगों ने कहा कि कुछ साल पहले ऐसे विजुअल्स की कल्पना करना भी मुश्किल था. एक X यूजर ने लिखा, 

"ये अविश्वसनीय दृश्य हैं. कुछ साल पहले ऐसा होने की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. यह सशक्तिकरण का असली रूप है."

Former Women Rebels ramp walk
(फोटो: X)

एक यूजर ने लिखा,

"इन घटनाओं से सुर्खियां बनने के अलावा कोई खास मदद नहीं मिलेगी. बस्तर में बाहरी लोगों को जमीन और राजनीति पर कब्जा करने से रोकने की जरूरत है. आदिवासियों को अपनी किस्मत का फैसला खुद करने दें."

Former Women Rebels ramp walk
(फोटो: X)

ये भी पढ़ें: नक्सलवाद क्या वाकई खत्म हो गया है? बस्तर में अमित शाह के ऐलान की क्रोनोलॉजी समझ लीजिए

यह रैंप वॉक सिर्फ एक फैशन इवेंट नहीं था. यह उन महिलाओं के लिए एक नई शुरुआत थी, जिन्होंने उग्रवाद की जिंदगी को पीछे छोड़ने का फैसला किया था. स्टेज पर उनकी मौजूदगी इस बात का इशारा है कि समाज में फिर से शामिल होने से उनके लिए नई संभावनाएं खुल सकती हैं. 

वीडियो: बिग बंग स्टोरी: अमित शाह ने जिस नक्सलवाद पर बात की, उसकी शुरुआत कैसे हुई?

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