‘पहले शिवसेना. फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और अब तृणमूल कांग्रेस.’ तीनों ही पार्टियों में ‘बगावत’ का एक ही पैटर्न बताते हुए राहुल गांधी ने फिर आरोप लगाया कि बीजेपी और चुनाव आयोग मिले हुए हैं. दोनों मिलकर विपक्षी पार्टियों का चुनाव चिह्न छीन लेते हैं. उन्होंने इसे ‘पार्टी चोरी’ का नाम दिया और इसे ‘वोट चोरी’ वाले अपने चर्चित मुद्दे के साथ जोड़ते हुए एक नया नारा गढ़ा- ‘वोट चोरी. सरकार चोरी. अब पार्टी चोरी.’
‘वोट चोरी, सरकार चोरी, अब पार्टी चोरी’, राहुल गांधी का BJP-चुनाव आयोग पर हमला
तृणमूल कांग्रेस का नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न फ्रीज किए जाने के बाद राहुल गांधी ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर विपक्षी दलों को तोड़ने का आरोप लगाया.

राहुल गांधी का बीजेपी पर नया हमला ममता बनर्जी की पार्टी का चुनाव चिह्न ‘फ्रीज’ किए जाने के बाद आया है. अक्टूबर 2026 में बंगाल की नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव होना है. खंडित तृणमूल कांग्रेस के दोनों ही धड़े इस चुनाव में उतरने की तैयारी कर रहे थे. लेकिन, 17 सितंबर को चुनाव आयोग ने दोनों ही गुटों को पार्टी का चुनाव चिह्न ‘घास और फूल’ इस्तेमाल करने से रोक दिया. उन्हें नए चुनाव चिह्न चुनने के लिए 18 सितंबर की सुबह 11 बजे तक का अल्टिमेटम दे दिया.
राहुल गांधी का हमलाममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक हैं. उनके गुट को भी ‘घास और फूल’ चुनाव चिह्न नहीं मिला. लिहाजा, उन्होंने शुक्रवार, 18 सितंबर को अपने उम्मीदवार के लिए ‘फुटबॉल’ का चुनाव चिह्न सिलेक्ट किया. ममता की पार्टी का चुनाव चिह्न निलंबित किए जाने पर राहुल गांधी ने आपत्ति जताई. उन्होंने राज्यों के विपक्षी दलों के खिलाफ ‘एक खास राजनीतिक पैटर्न’ की ओर इशारा करते हुए अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया,
पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस. हर बार एक ही पैटर्न. BJP और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं. फिर उसका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है. जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं.
राहुल गांधी ने आगे लिखा- ‘वोट चोरी. सरकार चोरी. अब पार्टी चोरी. ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं.’
चुनाव आयोग पर आरोपलोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की बीजेपी के साथ ‘मिलीभगत’ का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है. लेकिन उल्टा वो उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को ही पलट देते हैं. उन्होंने कहा,
यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी जी की नहीं है. यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है.

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टीएमसी में बगावतबता दें कि बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में बगावत हो गई थी. पार्टी के 20 सांसद और कई विधायकों ने ममता का साथ छोड़ दिया. अब दोनों ही गुट टीएमसी पर अपना-अपना दावा कर रहे हैं. शुक्रवार, 18 सितंबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने साफतौर पर कहा कि जब तक वह दुनिया में हैं, टीएमसी नहीं छोड़ेंगी.
हालांकि, नंदीग्राम उपचुनाव में उन्होंने जिन संचिता प्रधान को उम्मीदवार बनाकर खड़ा किया था, उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से ‘शिष्टाचार मुलाकात’ के बाद अपना पर्चा ही वापस ले लिया. इस पर भड़कीं ममता ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की पुलिस उनकी पार्टी के लोगों को बीजेपी में शामिल होने के लिए मजबूर कर रही है.
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