आज 21 अगस्त है. ठीक एक महीना पहले 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने संसद की ओर कूच किया था. पुलिस ने उन्हें रोकते हुए बलप्रयोग किया. कथित तौर पर नीली वर्दी पहने सुरक्षाबलों ने पैलेट गन भी चलाई. पैलेट गन के मामले ने तब तूल पकड़ लिया, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे लेकर गृह मंत्री अमित शाह और सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया. शुक्रवार, 21 अगस्त को इस पैलेट गन ऐक्शन के खिलाफ पहली बार FIR दर्ज की गई है. राहुल गांधी के मुताबिक, अज्ञात के खिलाफ ये FIR दर्ज कराने में 8 घंटे का समय लग गया.
राहुल गांधी के धरने के बाद दर्ज हुई पैलेट गन वाली FIR में क्या लिखा है? एक-एक बात जान लें
20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन में पैलेट गन से घायल साहिल लोचब की शिकायत पर 21 अगस्त को अज्ञात सुरक्षाकर्मी के खिलाफ FIR दर्ज हुई. राहुल गांधी के मुताबिक, FIR दर्ज कराने में 8 घंटे लगे; साहिल के शरीर में अब भी सैकड़ों छर्रे हैं और उनकी एक आंख की रोशनी जाने का खतरा है.

पैलेट गन लगने से घायल एक छात्र साहिल लोचब के साथ शुक्रवार, 21 अगस्त को राहुल गांधी पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने पहुंचे थे. उन्होंने बताया कि सुबह 11 या 11:30 बजे थाने पर पहुंचने के बाद उन्हें 8 घंटे तक वहां बैठे रहना पड़ा. शाम के करीब पौने सात बजे आखिरकार FIR दर्ज की गई. राहुल गांधी ने आगे कहा कि यह न्याय की दिशा में पहला कदम है. केस दर्ज हो गया है. साहिल लोचब को पैलेट गन लगे एक महीना हो चुका है. उनके शरीर में अभी भी छर्रे फंसे हुए हैं. उनकी आंख में तीन छर्रे हैं और वो उस आंख से देख नहीं पा रहे हैं. उनके दिल के पास भी तीन-चार छर्रे हैं.
पुलिस सिस्टम पर सवालFIR में देरी को लेकर राहुल गांधी ने पूरे देश के पुलिसिया सिस्टम पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि देश में कितनी महिलाओं के साथ रेप होता है. कितने बच्चों की हत्या होती है. कितने लोगों को गोली मारी जाती है और कितने लोगों के शरीर में छर्रे फंसे रहते हैं. उन्होंने कहा,
यह पुलिस स्टेशन दिल्ली के बीचोबीच है. फिर भी यहां न्याय नहीं मिल रहा है. सोचिए, किसी गांव या छोटे शहर के पुलिस स्टेशन में क्या होता होगा.
उन्होंने कहा कि FIR दर्ज करने का अंतिम ‘ओके’ गृह सचिव और खुद अमित शाह की तरफ से आना था. उसके बाद ही FIR दर्ज की गई. इससे आप समझ सकते हैं कि FIR को कौन रोक रहा था.
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साहिल लोचब की ओर से अज्ञात के खिलाफ दाखिल FIR में बताया गया है कि नीली वर्दी वाले एक सुरक्षाकर्मी ने उन पर पैलेट गन चलाई थी, जो उनकी आंख, दिल, छाती और बाजू पर लगे थे. कुछ छर्रे अभी भी उनके शरीर में हैं. उनकी आंखों को ऐसा नुकसान पहुंचा है कि डॉक्टर उसके ठीक होने की संभावना न के बराबर बता रहे हैं.
साहिल की FIR में जो कुछ लिखा है, उसकी अहम बातें बिंदुवार आपको बताते हैं. साहिल के मुताबिक,
1. 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ संसद तक मार्च निकाला जा रहा था. एक छात्र के तौर पर वह इस मार्च में हिस्सा लेने वहां गए थे.
2. मार्च के दौरान दोपहर के समय लाठीचार्ज हुआ और भगदड़ मच गई. साहिल अन्य प्रदर्शनकारियों की भीड़ के साथ भागकर पालिका कनॉट प्लेस एरिया के पास पहुंचे. उनके हाथ में तिरंगा झंडा था और हजारों छात्र वहां उनके साथ मौजूद थे.
3. साहिल के मुताबिक, पुलिस ने वहां पर आंसू गैस के गोले छोड़े. लाठीचार्ज हुआ, जिससे भगदड़ मच गई. इस समय उनका चेहरा दूसरी तरफ था. तभी उन्हें ऐसा लगा कि शरीर के दाहिनी ओर दिल के नजदीक छाती पर, बाजू और आंख पर कुछ फटा है. उन्होंने मुड़कर देखा तो नीली पोशाक में बड़ी बंदूक पकड़े एक व्यक्ति से उन्हें ढेर सारे मेटल के पैलेट लगे.
4. पैलेट गन लगने के बाद उन्हें समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है. छात्रों की भीड़ उनके आसपास जमा हो गई. साहिल के मुताबिक, उन पर पांच या छह बार मेटल पैलेट चलाए गए, जिसके बाद उनकी आंख, चेहरे, हाथ और छाती से खून बह रहा था. उन्हें दाहिनी आंख से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था.
5. साहिल को बाइक पर बिठाकर लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल में ले जाया गया. इसके बाद सफदरजंग अस्पताल और फिर बाद में AIIMS में भेज दिया गया. 21 जुलाई 2026 को रात 1 बजे के करीब उन्हें AIIMS के RPC Eye Center भेजा गया. बाद में AIIMS ट्रॉमा सेंटर ट्रांसफर किया गया.
6. 22 जुलाई की रात को साहिल की आंख का पहला ऑपरेशन किया गया. डॉक्टर ने कहा कि आंख में चोट पैलेट गन से लगी है. यह भी लिखा कि आंख की रोशनी वापस आने की संभावना 1 प्रतिशत से भी कम है.
7. AIIMS में CT Scan से पता चला कि करीब 200 से ज्यादा छर्रे उनके शरीर में हैं. ये छर्रे आंख में, गर्दन में, छाती में दिल के पास, जबड़े में, बाजू में लगे हैं. दाहिनी आंख में लगे कुछ छर्रों को निकाला नहीं जा सकता. दो छर्रे जीवन भर उनकी आंख के अंदर और दिल के पास रहेंगे. इसका इलाज लंबा चलेगा.
8. FIR में साहिल ने कहा, ‘मेरा कसूर इतना है कि मैं एक छात्र होकर अपनी बात कहने के लिए शांतिपूर्वक खड़ा था. इसके बदले में मैंने अपनी आंख भी खो दी और मेरे शरीर में सैकड़ों छर्रे लगे. जिस दिल्ली पुलिस में भर्ती होने के लिए मैंने पढ़ाई की. वह नौकरी मुझे नहीं मिल सकती. मेरे घर के हालात भी ऐसे नहीं हैं कि लंबा इलाज करवा सकूं.’
9. साहिल ने प्रार्थना की है कि मौके पर मौजूद सीसीटीवी और ड्रोन फुटेज को सुरक्षित करा लिया जाए. ऑपरेशन के दौरान उनके शरीर से जो धातु के छर्रे निकाले गए हैं, वो मंगवाकर जांच के लिए भेजे जाएं. लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल, सफदरजंग हॉस्पिटल, RPC Eye Center, AIIMS, Trauma Center, AIIMS से इलाज के सब कागज मंगवा लिए जाएं.
10. साहिल ने मांग की है कि उनके इलाज और मुआवजे के मामले पर विचार किया जाए क्योंकि उनका इलाज बहुत लंबा चलने वाला है.
कौन हैं साहिल लोचब?साहिल लोचब दिल्ली के नजफगढ़ के रहने वाले हैं. उनकी उम्र 20 साल है. दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) से पढ़ाई कर रहे हैं. उनके पिता दीपक विकलांग हैं. वह घर में सबसे बड़े बेटे हैं. FIR में उन्होंने बताया है कि उनके ऊपर आज तक कभी कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ. न कभी थाने से उनका कोई वास्ता पड़ा है.
बता दें कि 20 जुलाई 2026 को पेपर लीक के खिलाफ प्रोटेस्ट कर रहे छात्र संसद तक मार्च निकाल रहे थे. इस दौरान उन्हें रोकने वाली पुलिस ने बलप्रयोग किया, जिसे विपक्ष ने बड़ा मुद्दा बनाया. इस दिन सैकड़ों प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ-साथ सुरक्षाबल के जवान भी घायल हुए थे.
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