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'दिमागी नक्सल' पर पहली बार राहुल गांधी का पलटवार, PM मोदी की 'नीयत' पर सवाल उठाए

Delhi Satya Niketan building: दिल्ली के सत्य निकेतन में गिरी बिल्डिंग पर राहुल गांधी ने भाजपा को घेरा. उन्होंने कहा कि हादसों से पहले रोकथाम नहीं, उनके बाद बयानबाजी होती है.

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राहुल गांधी ने पीएम मोदी को सत्य निकेतन में गिरी बिल्डिंग पर घेरा. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से अपने भाषण में 'दिमागी नक्सल' शब्द का प्रयोग करते हुए ऐसे लोगों की पहचान और आइसोलेशन की जरूरत बताई जो समाज को गलत रास्ते पर ले जाने के लिए प्रयासरत हैं।
  • प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पहली बार इस पर प्रतिक्रिया दी और दिल्ली में हुए हादसों के संदर्भ में जवाबदेही की कमी को लेकर सरकार की आलोचना की।
  • राहुल गांधी के आक्रमण के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ा है और इसके परिणामस्वरूप दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, जिससे आगामी राजनीतिक रुख और जवाबदेही पर ध्यान केंद्रित होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर राहुल गांधी ने पहली बार हमला बोला है. 15 अगस्त को दिल्ली के लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी ने ‘दिमागी नक्सलियों को पहचानने’ की बात कही थी. इस पर खूब राजनीतिक वाद-विवाद हुआ था. कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पहली बार पीएम मोदी के इस बयान पर प्रतिक्रिया दी है. राहुल ने दिल्ली में गिरी इमारत को पीएम मोदी के इस बयान से जोड़ते हुए कहा कि जवाबदेही मांगने पर प्रधानमंत्री ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज फूफा’ जैसे अपमानजनक तमगे देते हैं ताकि शर्मिंदा करके सवाल पूछने वालों को चुप करा सकें. 

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राहुल गांधी दिल्ली में हुए हादसे को लेकर सरकार को घेर रहे थे. उन्होंने कहा कि हादसों से पहले उसकी रोकथाम नहीं की जाती. हादसा होने के बाद कुछ छोटे अफसरों पर जिम्मेदारी मढ़ दी जाती है और असली गुनहगार जवाबदेही से आजाद रहते हैं. ‘एक्स’ पर लिखी अपनी पोस्ट में राहुल गांधी ने पहली बार पीएम मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले जुमले का इस्तेमाल करके उन पर निशाना साधा.  

राहुल गांधी ने कहा कि सत्य निकेतन में छात्रों से भरी इमारत का गिरना कोई अकेली त्रासदी नहीं है. सैदुलाजाब में ऐसी त्रासदी में 6 लोगों की मौत हुई. हौज रानी में आग ने 22 जानें ले लीं और जवाबदेही मांगने पर प्रधानमंत्री खुद आपको ‘दिमागी नक्सल, नाराज फूफा’ जैसे अपमानजनक तमगे दे देते हैं. मकसद, सवाल पूछने वालों को शर्मिंदा करो. बदनाम करो और चुप करा दो. दिल्ली में 'ट्रिपल इंजन' की सरकार है तो अब किस बात से लाचार है? लाचारी है नीयत की क्योंकि जहां नीयत नहीं होती. वहां जवाबदेही भी नहीं होती.

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पीएम मोदी ने क्या कहा था?

 प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस और टीचर्स डे के दिन इन शब्दों का इस्तेमाल किया था. पहली बार 15 अगस्त को लाल किले से भाषण के दौरान पीएम मोदी ने कहा था कि हथियारी नक्सल तो गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में है. हिंसा, अराजकता के रास्ते खोज रहे हैं. समाज को गलत राह पर घसीटने के लिए भांति-भांति के दांव कर रहे हैं. इन दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा. इन दिमागी नक्सलियों को आइसोलेट करना होगा और विकसित राष्ट्र बनाने की मुख्यधारा की की ओर देश की युवा पीढ़ी को जोड़ना होगा.

प्रधानमंत्री ने नक्सलियों के खिलाफ सरकार की लड़ाई में मिली सफलताओं का जिक्र करते हुए यह टिप्पणी की थी. मगर इन शब्दों ने एक विवाद छेड़ दिया. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद पी. चिदंबरम ने ‘दिमागी नक्सल’ पर पलटवार करते हुए कहा, ‘उन्हें दिमागी नक्सल होने पर गर्व है.’ आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी कहा कि उन्हें 'दिमागी नक्सल' होने पर गर्व है. क्योंकि वह एक 'सच्चे देशभक्त' हैं. और बीजेपी से नहीं डरते.

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हालांकि, बीजेपी ने पीएम मोदी के बयान का बचाव किया. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के नेताओं को 'दिमागी नक्सली' नहीं कहा था. सिर्फ वो लोग ही 'दिमागी नक्सली' हैं, जो माओवादियों का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान को नहीं मानते.

कॉलेज के भाषण में नाराज फूफा का जिक्र

इससे बाद शनिवार, 5 सितंबर को पीएम मोदी दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के एक कार्यक्रम में शामिल हुए. वहां भी उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का यूज किया. उन्होंने कहा, 

होम्योपैथिक इलाज से बीमारी कुछ समय के लिए बढ़ जाती है. जैसे ही मैंने यह गोली दी, सारे दिमागी नक्सली बाहर आने लगे. लेकिन जनता उनका असली चेहरा देख रही है.

इस दौरान पीएम मोदी ने ‘नाराज फूफा’ मुहावरे का भी इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि कैंपस के बाहर आपको दो तरीके के लोग मिलेंगे. एक वो लोग जो सकारात्मक तरीके से समाज की शक्ति को राष्ट्र की शक्ति में बदलते हैं. दूसरी प्रजाति उन लोगों की है, जो कोई भी काम शुरू होने पर नाराज फूफा बन जाते हैं. उनका फेवरेट काम होता है हर काम का विरोध करना.

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पीएम के इन्हीं बयानों पर ही राहुल गांधी ने तंज कसा है. 

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