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'हादसे पर PG जिम्मेदार नहीं’, सत्य निकेतन वाली बिल्डिंग के रेंट एग्रीमेंट में क्या लिखा है?

Delhi Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में हुई घटना के बाद नई-नई जानकारी सामने आ रही है. अब पता लगा है कि पेइंग गेस्ट (PG) में रहने से पहले छात्रों से एक एग्रीमेंट पर साइन कराया जाता था.

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बच्चों को हॉस्टल देने से पहले एक एग्रीमेंट पर साइन करवाया जाता था. (फोटो-PTI)

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  • दिल्ली के सत्य निकेतन में गिरने वाली बिल्डिंग के रेंट एग्रीमेंट में एक क्लॉज है जिसमें पीजी मैनेजमेंट किसी भी दुर्घटना या जोखिम के लिए जिम्मेदार नहीं होगा, जिसे छात्रों द्वारा साइन करना अनिवार्य है।
  • पिछले कुछ महीनों में हॉस्टल डेज की मालकिन हरि राम बंसल ने लगभग 50 साल पुरानी इमारत की मरम्मत शुरू की थी, लेकिन मरम्मत कार्य पूरी नहीं होने और बेसमेंट में काम चलने के दौरान बिल्डिंग गिर गई।
  • बिल्डिंग गिरने के बाद दिल्ली नगर निकाय ने सुरक्षा लापरवाही के कारण पांच अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है, तथा मामले की जांच और सुधार की संभावना जताई गई है।

दिल्ली के सत्य निकेतन में गिरी बिल्डिंग का कथित रेंट एग्रीमेंट वायरल हो रहा है. इसमें कमरा किराये पर लेने को लेकर तमाम शर्तों और नियमों का जिक्र किया गया है. जैसे पोस्टर नहीं चिपकाना है. फर्नीचर का ध्यान रखना है. आदि-आदि. हालांकि, इसी में एक पॉइंट ऐसा भी है, जिस पर सत्य निकेतन हादसे के बाद लोगों का ध्यान गया है. इसमें लिखा है, 

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पीजी मैनेजमेंट मेरे (छात्र के) साथ होने वाली किसी भी दुर्घटना या जोखिम के लिए जिम्मेदार नहीं है.  

मतलब ये कि जो छात्र कमरा किराये पर ले रहा है उसे वह एग्रीमेंट साइन करना है, जिसमें उसकी किसी हादसे या जोखिम से सुरक्षा की गारंटी नहीं है. इसके लिए पीजी मैनेजमेंट जिम्मेदार नहीं होगा. एग्रीमेंट के इस क्लॉज को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं.

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फर्नीचर को नुकसान

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, 'हॉस्टल डेज' (गिरने वाली बिल्डिंग) के रेंट एग्रीमेंट में किराएदार की जिम्मेदारियों को काफी बारीकी से बताया गया है. इसमें तीन महीने की सिक्योरिटी और एक महीने का एडवांस किराया जमा करने की शर्त है. साथ ही यह भी कहा गया है कि एग्रीमेंट की अवधि खत्म होने से पहले किसी भी हालत में सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस नहीं किया जाएगा. चेतावनी भी है कि फर्नीचर या फिक्स्चर को अगर नुकसान हुआ तो भरपाई डिपॉजिट से की जाएगी.

एग्रीमेंट में छात्रों को दीवारों पर पोस्टर या स्टिकर चिपकाने से भी रोका गया है. ये भी कहा गया कि अगर कोई छात्र तय समय से पहले हॉस्टल छोड़ता है तो हॉस्टल फीस या सिक्योरिटी मनी का कोई रिफंड नहीं दिया जाएगा. फिर कारण जो भी हो. आगे एक पॉइंट में कहा है कि PG प्रशासन उसके साथ होने वाली किसी भी दुर्घटना या जोखिम के लिए जिम्मेदार नहीं है.

रिपोर्ट के मुताबिक, इसी हॉस्टल से जुड़े नियमों और शर्तों के एक दस्तावेज में कहा गया कि अगर किराएदार को कोई निजी चोट लगती है या उसका सामान खो जाता है या खराब हो जाता है. और यह ऐसे कारण से हुआ, जो पीजी के कंट्रोल से बाहर हैं तो हॉस्टल कोई मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार नहीं होगा. पीजी के कंट्रोल से बाहर यानी सीलिंग, आग, भूकंप, भारी बारिश या दूसरी प्राकृतिक आपदाएं.

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इसमें हॉस्टल मैनेजमेंट को यह अधिकार भी दिया गया है कि वे हालात को देखते हुए किसी स्टूडेंट का कमरा या हॉस्टल की जगह बदल सकते हैं. अनुशासन से जुड़ी समस्याओं के लिए किसी भी स्टूडेंट को तुरंत निकाल सकते हैं, बिना कोई रिफंड दिए.

बेसमेंट में चल रहा था मरम्मत का काम

दिल्ली यूनिवर्सिटी का साउथ कैंपस सत्य निकेतन से काफी पास है. इसलिए इलाके की कई रिहायशी इमारतों को बड़े पैमाने पर हॉस्टल और पेइंग गेस्ट में बदल दिया गया है. बताया गया कि जिस बिल्डिंग में ये घटना हुई, वे लगभग 50 साल पुरानी थी. ऐसे में कुछ महीने पहले हॉस्टल डेज के मालिक हरि राम बंसल ने बिल्डिंग की मरम्मत का काम करवाना शुरू किया था. 

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बताया गया कि जब इमारत गिरी तब भी निर्माण का काम पूरा नहीं हुआ था. उस समय बेसमेंट में मजदूर काम कर रहे थे. बचाए गए ग्यारह लोगों में से दो मजदूर थे, जिनमें से एक की मौत हो गई. इस हादसे के एक दिन बाद, दिल्ली नगर निकाय ने पांच अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया. 

वीडियो: सत्य निकेतन इमारत हादसे पर दिल्ली विश्वविद्यालय दक्षिणी परिसर के निदेशक ने क्या बताया?

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