Rahul Gandhi Book in Parliament: पूर्व सेना प्रमुख जनरल (रिटायर्ड) मनोज मुकुंद नरवणे की अनपब्लिश किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' पर विवाद बढ़ता जा रहा है. इसे छापने का हक रखने वाली पब्लिकेशन कंपनी पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया सवालों के घेरे में हैं. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हाथों में इस किताब की एक हार्डकॉपी दिखी थी. सवाल उठा कि जब ये किताब छपी ही नहीं, तो राहुल के पास कैसे आ गई?
जनरल नरवणे की किताब छपी या नहीं? पेंगुइन इंडिया ने 4 पॉइंट में समझाया, पूर्व सेनाध्यक्ष ने पोस्ट शेयर किया
Four Stars of Destiny Book: Penguin India ने अपने बयान में कहा कि वो अपनी पब्लिश की गई किताबों में क्लैरिटी और ट्रांसपेरेंसी के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. 9 फरवरी को कंपनी ने माना था कि 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' किताब को छापने का इकलौता अधिकार उसके पास है.


पेंगुइन इंडिया ने साफ किया कि उसने यह किताब छापी ही नहीं. अब कंपनी ने जनता के सामने अपना पूरा पब्लिकेशन प्रोसेस भी रख दिया.
पेंगुइन इंडिया ने मंगलवार, 10 फरवरी को एक पोस्ट में बताया कि उसके यहां काम करने का क्या तरीका है. पब्लिकेशन कंपनी ने उन कंफ्यूजन को भी दूर करने की कोशिश की, जो किताब के ऐलान, उसके छपने और उसके ना छपने से जुड़े हैं. पब्लिकेशन ने अपनी पोस्ट में लिखा,
"एक अनाउंस की गई किताब, एक प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध किताब, और एक पब्लिश हुई किताब, ये सभी एक ही चीज नहीं हैं."
आगे कंपनी ने उसके यहां किताब के ऐलान, प्री-ऑर्डर और उसके छपने पर रुख साफ किया. कंपनी ने बताया-
बुक अनाउंसमेंट: पब्लिशर ने बताया है कि किताब के ऐलान का मतलब है कि एक बुक लाने की योजना है. यह अभी छपने या बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं है.
बुक प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध: प्री-ऑर्डर एक स्टैंडर्ड पब्लिशिंग प्रैक्टिस है. माने, पब्लिकेशन में इसे एक आम तरीका माना जाता है. यह रीडर्स और रिटेलर्स को एडवांस ऑर्डर देने की इजाजत देता है. इसका मतलब यह नहीं कि किताब छप गई या उपलब्ध हो गई है.
बुक एक खास तारीख के लिए शेड्यूल कर दी गई: एक शेड्यूल की गई पब्लिकेशन तारीख का मतलब है कि बुक को उस तारीख में रिलीज करने का प्लान है. इसका मतलब यह नहीं है कि बुक पब्लिश हो गई है.
पब्लिश हुई किताब: एक बुक तभी पब्लिश होती है जब वह खरीदने के लिए रिटेल चैनल्स पर उपलब्ध हो.

पेंगुइन इंडिया ने अपने बयान में आगे कहा कि वो अपनी पब्लिश की गई किताबों में क्लैरिटी और ट्रांसपेरेंसी के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. 9 फरवरी को कंपनी ने माना था कि 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' किताब को छापने का इकलौता अधिकार उसके पास है.
कंपनी ने आगे कहा था कि ये किताब अभी तक छपी नहीं है. पेंगुइन इंडिया ने मामले में साफतौर पर कहा कि उसने इस किताब की कोई भी कॉपी (प्रिंट या डिजिटल फॉर्म में) पब्लिश, बांटी, बेची या किसी और तरह से पब्लिक के लिए उपलब्ध नहीं कराई है. जनरल एमएम नरवणे ने भी अपने पोस्ट में पेंगुइन इंडिया के बयान का समर्थन किया है.
वीडियो: पेंगुइन इंडिया ने बताया कि राहुल गांधी के पास जनरल नरवणे की किताब कहां से आई?

















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