पिछले साल डॉनल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी प्रशासन ने बड़ी संख्या में भारतीयों को डिपोर्ट किया था. अमेरिकी सरकार की इस कार्रवाई की भारत में काफी आलोचना हुई थी. क्योंकि भारतीयों को हथकड़ी और बेड़ियों में बांधकर जबरन अमेरिका से निकाला गया था. हालांकि इस अपमान का डिपोर्ट हुए कुछ भारतीयों पर रत्ती भर असर नहीं पड़ा. वे अब भी विदेश में ही रहना चाहते हैं. अमेरिका न सही तो कोई और देश सही. लेकिन भारत नहीं.
US से डिपोर्ट हुए इन भारतीयों ने फिर छोड़ा भारत, अब कहां हैं?
Punjab US deportees remigration Spain: अमेरिका से 2025 में कई लोगों को भारत वापस भेजा गया था. डिपोर्ट किए गए तीन लोग अब स्पेन चले गए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका से डिपोर्ट हुए भारतीयों में पंजाब स्थित कपूरथला के बगरियान गांव के 3 लोग भी शामिल थे. अमेरिका से निकाले जाने के कुछ समय बाद इन्होंने फिर भारत छोड़ने का फैसला किया. बताया गया कि अब ये तीनों स्पेन चले गए हैं.
अखबार से बात करते हुए एक एजेंट ने बताया कि वापस भेजे गए लोग यूरोप जाने के लिए शेंगेन वीजा के लिए अप्लाई कर सकते हैं. हालांकि इसे हासिल करना आसान नहीं है. एक अन्य ट्रैवल एजेंट ने कहा कि इस वजह से यूरोप जाने वाले कई लोगों को शायद अवैध रास्ता अपनाना पड़ा होगा. उसने कहा,
"स्पेन एक पसंदीदा जगह बन गई है. क्योंकि वहां लगभग 8-10 लाख रुपये में टूरिस्ट वीजा आसानी से मिल जाता है. यह अमेरिका या कनाडा जाने के मुकाबले काफी सस्ता है. बाद में वीजा को आगे बढ़ाना और यहां तक कि वर्क परमिट पाना भी आसान होता है. यहां की सीमाएं काफी खुली हैं, इसलिए पंजाब के लड़के अक्सर पुर्तगाल या इटली चले जाते हैं."
रिपोर्ट के मुताबिक इन तीन लोगों ने स्पेन का रुख किया है.
मनजिंदर सिंह- बगरियान गांव के मनजिंदर सिंह 2025 में 30 लाख रुपये का इंतजाम कर अमेरिका गए थे. लेकिन मैक्सिको के रास्ते गैर-कानूनी तरीके से US में एंटर करने की वजह से उन्हें पकड़कर वापस भारत भेज दिया गया. अब वे अस्थाई वीजा पर स्पेन के बार्सिलोना में खेत में काम कर रहे हैं. मगर इस बार स्पेन जाने के खर्च के लिए परिवार ने घर गिरवी रखा है.
सुखराज- इनको भी 2025 में अमेरिका से डिपोर्ट कर दिया गया था. मैक्सिको की तरफ से दीवार फांदने की कोशिश करते हुए पकड़े गए थे. वापस भेजने से पहले 20 दिनों तक हिरासत में रखा गया. लेकिन अब वो भी अस्थाई वीजा पर स्पेन में हैं. परिवार का कहना है कि एजेंट ने उन्हें फ्लाइट से भेजा है.
सुखराज से पहले उनके पिता जसबीर 2000 में ग्रीस गए थे. लेकिन वहां से 4 साल बाद ही वापस आ गए. वहां के किसान ने उनसे गुलाम की तरह काम करवाया था. इससे वे डिप्रेशन में चले गए और आज भी दवाइयां लेते हैं. सुखबीर के भाई गुरप्रीत ने भी 9 साल जर्मनी में बिताए थे. लेकिन एक दिन पुलिस ने उन्हें डिपोर्ट कर दिया. परिवार को वापस भेजने का कारण आज तक पता नहीं चला.
तरजीत सिंह- तरजीत को भी 2025 में ही वापस भेजा गया था. लेकिन इस साल की शुरुआत में वे भी अस्थायी वीजा पर स्पेन चले गए. उनका भाई भी स्पेन में है.
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बगरियान के सरपंच चरणजीत सिंह बताते हैं कि गांव में लोगों को विदेश भेजने की एक पुरानी परंपरा है. चरणजीत भी खुद आठ साल तक दोहा में काम कर चुके हैं. वे कहते हैं, "कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद, हर कोई अपनी जिंदगी को बेहतर बनाना चाहता है."
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