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पंजाब में नशे पर मान सरकार का एक्शन, बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ 40000 पन्नों की चार्जशीट, 736 करोड़ के लेनदेन पर सवाल

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नशे का मुद्दा राजनीतिक दलों के लिए अहम बन सकता है. बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ कार्रवाई को AAP अपनी नशा-विरोधी नीति से जोड़ रही है. पार्टी ने बीजेपी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी राजनीतिक आरोप लगाए हैं.

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पंजाब सीएम भगवंत मान की सरकार ने कार्रवाई को नशा-विरोधी नीति का हिस्सा बताया. (Courtesy: PTI)

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  • शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो ने करीब 40 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें 736 करोड़ रूपये के संदिग्ध लेनदेन और नशा तस्करी से जुड़े आरोप लगाए गए हैं।
  • पंजाब में 2007 से 2017 तक अकाली दल और भाजपा के गठबंधन की सरकार के दौरान नशे की समस्या व्यापक रूप से सामने आई, जिससे नशे के कारोबार और प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर सवाल उठे।
  • आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले नशे के मुद्दे पर राजनीतिक विवाद और आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है, जिससे पंजाब की नशा विरोधी नीतियों और जांच प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सकता है।

पंजाब में ड्रग्स और नशे के मुद्दे पर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है. शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ करीब 40 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल होने और 736 करोड़ रुपये के कथित संदिग्ध लेनदेन का मामला तूल पकड़ रहा है. आम आदमी पार्टी (AAP) की भगवंत मान सरकार इस कार्रवाई को नशे के खिलाफ जांच से जोड़ रही है, जबकि मामले में लगाए गए आरोपों की सच्चाई अदालत में सबूतों के आधार पर तय होगी. इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब में नशे के कारोबार और पिछली सरकारों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.

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बिक्रम मजीठिया के खिलाफ क्या हैं आरोप?

विजिलेंस ब्यूरो की जांच के हवाले से बिक्रम सिंह मजीठिया से जुड़ी कंपनियों के बैंक खातों में करीब 736 करोड़ रुपये के कथित संदिग्ध लेनदेन की बात सामने आई है. मामले में अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करों से कथित संबंधों को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं. हालांकि, संदिग्ध लेनदेन और तस्करों से संबंधों समेत सभी आरोपों की पुष्टि जांच में मिले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही होगी.

करीब 40 हजार पन्नों की चार्जशीट को लेकर आम आदमी पार्टी ने अकाली दल पर निशाना साधा है. पार्टी का कहना है कि नशे के कारोबार से जुड़े मामलों में प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए. वहीं, मजीठिया के खिलाफ आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत को करना है.

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अकाली-बीजेपी सरकार के दौर पर भी उठे सवाल

पंजाब में 2007 से 2017 तक शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के गठबंधन की सरकार रही. इस दौरान राज्य में नशे की समस्या एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा बनकर उभरी. युवाओं में नशे की लत और तस्करी के नेटवर्क को लेकर तत्कालीन सरकारों पर सवाल उठते रहे.

अब मजीठिया के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच उस दौर की सरकार की भूमिका पर फिर बहस हो रही है. सवाल यह भी है कि नशे की तस्करी रोकने के लिए उस समय क्या कदम उठाए गए और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ जांच कितनी आगे बढ़ी. हालांकि, किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल की जिम्मेदारी तय करने के लिए ठोस सबूत और संबंधित मामलों के रिकॉर्ड जरूरी हैं.

2027 चुनाव से पहले नशे पर सियासत तेज

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नशे का मुद्दा राजनीतिक दलों के लिए अहम बन सकता है. आम आदमी पार्टी इस मामले को अपनी नशा-विरोधी नीति से जोड़ रही है. पार्टी ने बीजेपी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी राजनीतिक आरोप लगाए हैं और गुजरात के रास्ते नशीले पदार्थों की तस्करी का मुद्दा उठाया है.

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अकाली दल, बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप आने वाले समय में और तेज हो सकते हैं. लेकिन राजनीतिक बयानबाजी से अलग, नशे की समस्या से जूझ रहे पंजाब के परिवारों के लिए असली सवाल इसके परिणामों का है.

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