कई बार सरकार की आलोचना करने पर सामने वाले को ‘देशद्रोही’ करार दे दिया जाता है. पाकिस्तान जाने की नसीहत भी दे दी जाती है. ऐसे लोगों के लिए पुणे के एक सेशन कोर्ट ने बेहद जरूरी जजमेंट दिया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के सोशल मीडिया सेल के प्रदेश अध्यक्ष महादेव बलगुडे की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि सरकार या मुख्यमंत्री की आलोचना करना, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ना या राष्ट्र की संप्रभुता को खतरे में डालना नहीं माना जा सकता.
'सरकार-CM की आलोचना देश के खिलाफ नहीं है', एक और अदालत ने सब साफ कर दिया
NCP शरद पवार गुट के एक नेता को जमानत देते हुए पुणे की एक सेशन कोर्ट ने बेहद महत्वपूर्ण जजमेंट दिया है. कोर्ट ने कहा कि सरकार या मुख्यमंत्री की आलोचना करना, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ना या राष्ट्र की संप्रभुता को दांव पर लगाना नहीं होता.


सरकार की आलोचना संवैधानिक अधिकार
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने कहा कि हर नागरिक को सरकार के कामकाज पर कॉमेंट करने, उसकी तारीफ करने और आलोचना करने का संवैधानिक अधिकार है. मामले की सुनवाई के दौरान महादेव बलगुडे की पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट समीर शेख ने कहा,
ये मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है. सरकार की आलोचना करना संविधान के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है.
वहीं, अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया है और राज्य के खिलाफ अपराध किया है. एडिशनल सेशन जज बी.डी. कुलकर्णी ने बलगुडे की जमानत याचिका मंजूर करते हुए कहा,
रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे ये साबित हो कि आरोपी ने स्टेट के खिलाफ युद्ध छेड़ने की घोषणा की हो, लोगों को इसके लिए उकसाया हो या भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता में डालने वाला कोई काम किया है.
किस आरोप में हुई गिरफ्तारी?
महादेव बलगुडे को इसी साल अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था. उन पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मॉर्फ्ड तस्वीरें शेयर कीं. साथ ही जांच एजेंसियों ने उनके कुछ सोशल मीडिया पोस्ट को ‘नक्सलियों से सहानुभूति’ रखने वाला बताया.
पुलिस ने बलगुडे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 समेत कई दूसरी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था. BNS की धारा 152 भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को जानबूझकर खतरे में डालने से जुड़ा है. सेशन कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा,
केस डायरी से पता चलता है कि आरोपी ने कुछ मामलों की जांच प्रक्रिया और सरकार की योजनाओं पर सवाल उठाए थे. यह लोकतांत्रिक व्यवस्था में पब्लिक डिस्कोर्स का हिस्सा है. इसे राष्ट्रविरोधी गतिविधि नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने ये भी कहा कि इस मामले में BNS की धारा 152 लगाना विवादित है. बाकी सभी आरोप जमानती प्रकृति के हैं.
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महादेव बलगुडे को मिली सशर्त जमानत
सेशन कोर्ट ने माना कि इस मामले में जांच पूरी हो चुकी है, चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और अब आरोपी से आगे किसी तरह की पूछताछ की जरूरत नहीं है. कोर्ट ने महादेव बलगुडे को 25 हजार रुपये के प्राइवेट बॉन्ड पर जमानत दे दी. इसके साथ ही कोर्ट ने सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करने, गवाहों को प्रभावित न करने, जांच अधिकारी को पता और मोबाइल नंबर लिखवाने और कोर्ट की इजाजत के बिना देश छोड़कर नहीं जाने की शर्तें भी लगाईं.
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