महाराष्ट्र की विवादित पुणे लैंड डील की जांच करने वाली कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट रेवेन्यू डिपार्टमेंट को सौंप दी है. पूरा विवाद पुणे की 41 एकड़ जमीन को लेकर है. आरोप है कि करीब 1800 करोड़ रुपये की कीमत वाली इस जमीन को मात्र 300 करोड़ रुपये में खरीदा गया. जमीन की खरीद में पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार का नाम सामने आया था. अब बड़ा सवाल ये है कि क्या पार्थ विवादित लैंड डील में शामिल थे और क्या उन्होंने कोई अपराध किया था?
पुणे लैंड डील: क्या अजित पवार के बेटे पार्थ पवार को क्लीन चिट मिल गई है?
Pune Land Deal: आरोप है कि अमेडिया एंटरप्राइजेज LLP ने विवादित जमीन के हिस्से को 300 करोड़ रुपये में खरीदा था, जबकि इसकी असल कीमत 1800 करोड़ रुपये थी. यह फर्म Parth Pawar से जुड़ी है.


IAS ऑफिसर विकास शंकर खड़गे की अगुवाई वाली कमेटी ने यह रिपोर्ट तैयार की है. खड़गे अब एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (रेवेन्यू) के पद पर तैनात हैं. यह रिपोर्ट मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के तहत रेवेन्यू डिपार्टमेंट को सौंपी गई है. कहा जा रहा है कि इसे आगे के निर्देशों के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने रखा जाएगा.
पुणे लैंड डील विवाद में कौन दोषी?
इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कुछ खुलासे किए हैं. रिपोर्ट में दावा किया गया कि कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में पार्थ पवार को क्लीन चिट दी है. इसके अलावा कमेटी ने दो अधिकारियों की कथित लापरवाही के चलते उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश का दावा भी किया है.
पवार फैमिली अजित पवार की प्लेन क्रैश में हुई मौत से उबर रही है. लैंड डील में पार्थ पवार को क्लीन चिट मिलना परिवार के लिए बड़ी राहत ला सकता है. हालांकि, पार्थ को क्लीन चिट मिली है या नहीं, यह तो जांच रिपोर्ट की आधिकारिक जानकारी सामने आने पर ही पता चलेगा. दरअसल, पुणे के तेजी से डेवलप हो रहे इलाके मुंढवा में महार वतन में 41 एकड़ जमीन पर विवाद है.
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सूत्रों के हवाले से कहा गया कि इस जमीन को खरीदने में पार्थ पवार की तरफ से सीधे तौर पर कोई गलत काम या आपराधिक जिम्मेदारी साबित करने का ठोस सबूत नहीं मिला, जिससे उन्हें क्लीन चिट मिली. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जमीन की खरीद-बिक्री में प्रशासनिक लेवल पर गड़बड़ी सामने आई है.
लेनदेन और जमीन की रजिस्ट्री करने में कथित लापरवाही के लिए दो अधिकारियों- हवेली के तहसीलदार सूर्यकांत येवाले और असिस्टेंट रजिस्ट्रार रवींद्र तारू के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है. विवाद सामने आने के बाद दोनों अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया. फिलहाल, दोनों ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं.
आरोप है कि अमेडिया एंटरप्राइजेज LLP ने विवादित जमीन के हिस्से को 300 करोड़ रुपये में खरीदा था, जबकि इसकी असल कीमत 1800 करोड़ रुपये थी. इस फर्म में पार्थ पवार और उनके कजिन दिग्विजय का मालिकाना हक मेजोरिटी में है. यह भी आरोप था कि जमीन खरीदने के दौरान 21 करोड़ रुपये की स्टॉम्प ड्यूटी भी माफ कर दी गई थी.
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