Ranbir Kapoor की Ramayana 3 घंटे 15 मिनट लंबी फिल्म है. इतनी लंबी मूवी में पूरे टाइम लोगों का अटेंशन खींचे रखना बड़ा चैलेंज होता है. लेकिन Nitesh Tiwari इस मामले में इक्कीस साबित हुए हैं. बावजूद इसके, फिल्म में पांच ऐसी बातें हैं, जो दर्शकों को थोड़ी खटक सकती हैं.
वो टॉप 5 बातें जो 'रामायण' देखने के बाद मन को खटकती हैं
'रामायण' के कुछ जरूरी किरदारों को पहले पार्ट में एक डायलॉग तक नहीं दिया गया.

# 1. रणबीर कपूर का एक्सेंट
'रामायण' में बतौर भगवान राम, रणबीर कपूर की एक सुंदर-सी एंट्री होती है. मगर जैसे ही वो डायलॉग्स बोलते हैं, उच्चारण में गड़बड़ियां नज़र आने लगती हैं. आपको महसूस होता है कि उन्हें 'रामायण' के संस्कृत बेस्ड डायलॉग्स बोलने में दिक्कत आ रही है. शुरुआत में वो उनमें नैचुरल नहीं लगते. पर अच्छी बात ये है कि रणबीर आगे के सीन्स में बहुत सुधार करते हैं. फिल्म पूरी होने तक वो 'रामायण' के डायलॉग्स फर्राटेदार ढंग से बोलने लगते हैं.
# 2. कुछ किरदारों के पास डायलॉग्स ही नहीं
'रामायण' में रणबीर कपूर, साई पल्लवी, रवि दुबे और यश समेत तमाम एक्टर्स को भरपूर डायलॉग्स मिले. मगर कुछ ऐसे भी किरदार थे, जिन्हें इक्का-दुक्का डायलॉग्स में समेट दिया गया. रावण की पत्नी मंदोदरी के रोल में काजल अग्रवाल के बस तीन छोटे-छोटे सीन्स हैं. उनमें भी केवल एक में दो सीन्स में डायलॉग दिया गया. विभीषण के रोल में हरीश उथमान का भी यही हाल है. कुंभकर्ण के रोल में फैसल मलिक और शत्रुघ्न के रोल में नीतीश शर्मा को तो वो एक डायलॉग भी नसीब नहीं हुआ.
# 3. कुंभकर्ण को पहचान पाना मुश्किल
मेकर्स ने 'रामायण' में कुंभकर्ण वाले रोल के लिए फ़ैसल मलिक को कास्ट किया है. उन्हें आप इससे पहले 'पंचायत' में प्रह्लाद चा के किरदार में देख चुके हैं. फिल्म में उनके कैरेक्टर को दमदार तरीके से इंट्रोड्यूस किया गया. मगर कुंभकर्ण का चेहरा कहीं से भी फ़ैसल से मेल नहीं खाता. वो पूरी तरह कंप्यूट्रिकृत कैरेक्टर लगता है. चेहरा मैच करना तो दूर, उनके हिस्से पहले पार्ट में एक डायलॉग तक नहीं आया है.
# 4. राम-लक्ष्मण का अपनी मांओं से बॉन्ड
फिल्म में रावण और उसकी मां कैकसी के बीच काफी अच्छा बॉन्ड दिखता है. लेकिन राम, लक्ष्मण और भरत के केस में ऐसा नजर नहीं आता. भगवान राम और उनके पिता दशरथ के रिश्ते को बड़ी खूबसूरती से दिखाया गया है. मगर फिल्म में राम की मां कौशल्या और लक्ष्मण की मां सुमित्रा की बातचीत का कोई सीन है. यही नहीं, कैकेयी ने जिस भरत के लिए इतना कुछ उथल-पुथल किया, फिल्म में उन दोनों के बीच भी कोई डायलॉग या सीन नजर नहीं आता.
# 5. फिल्म के गाने
‘रामायण’ के गाने इसकी कमजोर कड़ी बनकर उभरे हैं. एआर रहमान का म्यूजिक फिल्म तक ठीक लगता है. मगर बाहर आने पर आपको ज्यादा देर तक याद नहीं रहता. उन गानों को फिल्म के साथ देखा-सुना जा सकताहै. मगर कोई गाना ऐसा नहीं है, जिसे अलग से सुना जा सके.
हालांकि इन सबके बावजूद 'रामायण' एक जबरदस्त थिएट्रिकल एक्सपीरियन्स साबित होती है. इसे देखते हुए आपको वाकई मजा आता है. बाकी, इसे नितेश तिवारी ने डायरेक्ट किया है. नमित मल्होत्रा फिल्म के प्रोड्यूसर हैं. रणबीर के अलावा इसमें साई पल्लवी, रवि दुबे, अरुण गोविल, यश, विवेक ओबेरॉय और शोभना जैसे एक्टर्स ने काम किया है. मेकर्स ने ऑफ़िशियली अनाउंस कर दिया है कि इसका दूसरा पार्ट 2028 में रिलीज़ होगा.
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