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न एंबुलेंस न रास्ता, बीमार युवक को बांस से लटकाकर अस्पताल ले गए गांव वाले, नहीं बची जान

Palghar tribal village road: मामला जव्हार तालुका के तिलोंडा (आंबेपाडा) में एक दुर्गम आदिवासी गांव का है. यहां रहने वाले 18 साल के शैलेश मगन वागदड़ा नाम के शख्स की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी. गांव तक एंबुलेंस के आने का रास्ता नहीं था और अस्पताल गांव से लगभग 3-4 किलोमीटर दूर था.

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पैदल ही शख्स को ले जाते ग्रामीण. (फोटो-इंडिया टुडे)

दो व्यक्ति, जिन्होंने एक लंबा बांस अपने कंधे पर उठाया हुआ है. बीच में कपड़े से बना एक झोला है. जिसमें एक युवक पड़ा हुआ है. गांव वाले उसे अस्पताल ले जा रहे हैं. यह तस्वीर है मुंबई से महज 100 किलोमीटर दूर पालघर जिले के जव्हार तालुका के गांव की है. जहां पक्की सड़क ना होने की वजह से गांव वालों को खुद इस तरह युवक को अस्पताल तक ले जाना पड़ा. क्योंकि गांव तक एंबुलेंस के पहुंचने का रास्ता नहीं था. लेकिन अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर्स ने शख्स को मृत घोषित कर दिया.

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इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार अभिजीत की रिपोर्ट के मुताबिक, मामला जव्हार तालुका के तिलोंडा (आंबेपाडा) में एक दुर्गम आदिवासी गांव का है. यहां रहने वाले 18 साल के शैलेश मगन वागदड़ा नाम के शख्स की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी. गांव तक एंबुलेंस के आने का रास्ता नहीं था और अस्पताल गांव से लगभग 3-4 किलोमीटर दूर था.

मजबूरी में ग्रामीणों ने बांस के एक टुकड़े के बीच में कपड़े से झोला बनाया. और युवक को अस्पताल तक पैदल ले जाने लगे. वे जंगली, पहाड़ी और फिसलन भरे रास्ते को पार कर चांभारशेत स्थित अस्पताल पहुंचे. लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. डॉक्टर्स ने शैलेश को मृत घोषित कर दिया. बताया गया कि इलाज में देरी की वजह से उसकी मौत हो गई. 

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रिपोर्ट के मुताबिक, तिलोंडा गांव से मुख्य सड़क की दूरी लगभग चार किलोमीटर दूर है. यह रास्ता वैसे ही खराब है. लेकिन बरसात के मौसम में हालात और बदतर हो जाते है. बीमार मरीजों, गर्भवती महिलाओं और इमरजेंसी में ग्रामीण ‘डोली’ का सहारा लेकर अस्पताल तक पहुंचाते हैं.

गांव वालों का कहना है कि सड़क बनाने के लिए वे सालों से आवेदन दे रहे हैं. लेकिन प्रशासन से सिर्फ आश्वासन ही मिला है. शैलेश की मौत से ग्रामीण में भारी आक्रोश है. उनका कहना है कि अगर जल्द सड़क और अन्य जरूरी सुविधाओं पर काम शुरू नहीं किया गया, तो आंदोलन छेड़ दिया जाएगा. 

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