उत्तर प्रदेश के जिला गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों के कथित सुसाइड ने 'कोरियन लवर' गेम को चर्चा में ला दिया है. साइबर एक्सपर्ट्स से लेकर सोशल मीडिया तक में ‘कोरियन लवर’ गेम को लेकर बातें हो रही हैं. भारत में तो पहले से ही K-पॉप कल्चर का जलवा है, लेकिन अब इन कोरियन गेमों ने सोचने पर मजबूर कर दिया है. क्या ये गेम इतने डेंजरस हो सकते हैं कि किसी की जान ही ले लें? इन्हीं सब कयासों पर बात करेंगे.
'कोरियन लवर' गेम क्या है? बच्चों को कैसे उकसाता है? मां-बाप क्या करें?
2017 में भारत ने ‘ब्लू व्हेल चैलेंज’ पर बैन लगाया दिया था. तब इसे लेकर कई मामले गंभीर चोट और सुसाइड से जुड़े पाए गए थे. हालांकि, Ghaziabad के तीन बहनों की मौत के मामले में पुलिस ने Korean Lover Game की थ्योरी को नहीं माना है.


दी लल्लनटॉप के साथ बातचीत में साइबर एक्सपर्ट और इंडियन साइबर एसोसिएशन के फाउंडर और चेयरमैन किसलय चौधरी ने डेंजरस गेमों के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि इस तरह के गेम ज्यादातर ऐप के जरिए चलते हैं. उन्होंने इसके पीछे कारण बताते हुए कहा कि वेब के मुकाबले ऐप पर चलने की वजह से इन्हें ट्रेस करना थोड़ा मुश्किल होता है.
हालांकि, एक बात पहले ही साफ कर दें कि गाजियाबाद पुलिस ने किसी खास टास्क बेस्ड या ‘कोरियन लवर’ गेम के कारण ही तीनों बहनों की मौत होने की पुष्टि नहीं की है. पुलिस जांच में उनका कोरिया कल्चर से प्यार जरूर नजर आया है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) ट्रांस-हिंडन, निमिश पाटिल ने बताया,
"लड़कियों ने अपनी डायरी में लिखा था कि उन्हें कोरियन कल्चर बहुत पसंद है और उन्होंने अपनी पसंद की चीजों का जिक्र किया था, जैसे K-पॉप कल्चर, कोरियन फिल्में, कोरियन म्यूजिक, कोरियन शॉर्ट फिल्में, कोरियन शो और कोरियन सीरीज."
उन्होंने आगे कहा,
"एक सुसाइड नोट मिला है. तीनों लड़कियां कोरियन कल्चर से प्रभावित थीं, जिसमें सिनेमा, म्यूजिक और कुछ गेम्स शामिल हैं. उन्हें मोबाइल की लत थी. जब परिवार वालों ने उन्हें फोन इस्तेमाल करने से रोका, तो उन्होंने यह कदम उठाया. वे पिछले दो-तीन सालों से स्कूल नहीं जा रही थीं."
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा 'कोरियन लवर' गेम, पैरेंट्स में बढ़ी चिंता
तीन बच्चियों की मौत ने अन्य पेरेंट्स की भी चिंता बढ़ा दी है. सोशल मीडिया इन गेमों से जुड़े पोस्ट से पटा पड़ा है. एक तो पैरेंट्स पहले ही बच्चों की मोबाइल फोन की बढ़ती लत से परेशान हैं, ऊपर से 'कोरियन लवर' गेम ने उनका डर और बढ़ा दिया है. इससे पहले 'ब्लू व्हेल' गेम का क्रेज चला था, जो गेमर्स को सुसाइड करने के लिए उकसाता था. अब कोरियन गेमों ने पेरेंट्स के झोले में नई टेंशन डाल दी है.
क्या 'कोरियन लवर’ गेम मानसिक सेहत और सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है?
'कोरियन लवर' गेम के प्लेइंग पैटर्न पर नजर डालें, तो यह गेमर्स की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 'कोरियन लवर' गेम एक ऐसा ऑनलाइन पैटर्न बनकर उभरा है, जिसमें ऑनलाइन बातचीत करने के बाद यूजर्स को इमोशनली काबू में करना, उनसे इमोशनली जुड़कर कुछ भी करवाना या उन पर साइकोलॉजिकल प्रेशर डालने जैसे दावे किए जा रहे हैं. इससे साफ पता चलता है कि ये गेम यूजर्स की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं.
'कोरियन लवर' गेम का सामने आना और उनके संभावित गंभीर खतरे, इन सभी ने कुछ सवाल जरूर खड़े किए हैं.
'कोरियन लवर' गेम क्या सच में मौजूद है या यह सिर्फ अफवाह है?
साइबर एक्सपर्ट किसलय चौधरी ने बताया कि 'कोरियन लवर' गेम के नाम से कोई खास गेम या गेम ऐप नहीं है. उन्होंने कहा कि 'कोरियन लवर' या कोरिया लव पर बेस्ड कई गेम ऑनलाइन मौजूद हैं. इनमें से कुछ गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर जैसे मेनस्ट्रीम ऐप स्टोर पर मिल जाते हैं. फिर उन्होंने गाजियाबाद की घटना का जिक्र करते हुए बताया,
"ऐसे बहुत सारे ऐप हैं. इनसे लोगों को फंसाया जाता है. इन्हें वेब और ऐप दोनों से चलाया जाता है. अगर गूगल प्ले स्टोर इन्हें अवेलेबल नहीं कराता है, तो गेम डेवलपर अपनी वेबसाइट पर इन्हें डाल देते हैं. लिंक के जरिए इन गैम ऐप को डाउनलोड किया जाता है. ऐप का फायदा यह है कि ऐप को ट्रेस करना मुश्किल होता है."
उन्होंने आगे कहा,
"हम लोग 2015 से इस पर रिसर्च कर रहे हैं. इन गेमों के खिलाफ लगातार शिकायतें भी होती हैं. लोग पकड़े भी जाते हैं."
साइबर लॉज डॉट नेट के प्रेसिडेंट और इंटरनेशनल कमीशन ऑन साइबर सिक्योरिटी लॉ के चेयरमैन पवन दुग्गल ने भी कंफर्म किया कि ‘कोरियन लवर’ गेम होते हैं. सुप्रीम कोर्ट में वकील दुग्गल ने दी लल्लनटॉप के साथ बातचीत में बताया,
“ऐसे गेम होते हैं. ये ज्यादातर प्राइवेट वेबसाइट पर भी डाउनलोड के लिए अवेलेबल होते हैं. कहीं ना कहीं ये सेल्फ हार्म गेम्स का पार्ट हैं, जहां गेम अल्टीमेटली आपको उस दिशा में ले जाता है कि आप अपने आपको नुकसान पहुंचाते हैं. इसलिए ये सेल्फ हार्म गेम्स कई बार तो प्राइवेट प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होते हैं. लेकिन कई बार जब डिटेक्ट ना किए जाएं, तो प्ले स्टोर पर भी मिल जाते हैं. लेकिन जब शिकायत की जाती है, तो उन्हें हटा दिया जाता है.”
माने, ये गेम अफवाह तो नहीं है, लेकिन 'कोरियन लवर' गेम से कोई खास गेम या ऐप भी नहीं है. इस तरह के कई गेमिंग ऐप ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आसानी से मिल सकते हैं.
क्या 'कोरियन लवर' गेम 'ब्लू व्हेल चैलेंज' जितना खतरनाक है?
डिजिटल सेफ्टी एक्सपर्ट्स अक्सर ऐसे ट्रेंड्स की तुलना 'ब्लू व्हेल चैलेंज' से करते हैं, जिसने एक खतरनाक ऑनलाइन फलसफा बना दिया था. खुद तक को खत्म करने का टास्क देने वाले इस गेम ने दुनिया भर में सनसनी मचा दी थी. 'कोरियन लवर' और ‘ब्लू व्हेल चैलेंज’ की तुलना पर किसलय चौधरी कहते हैं,
"कोरियन लवर गेम और ब्लू व्हेल चैलेंज को पूरी तरह एक नहीं मान सकते. क्योंकि ब्लू व्हेल गेम का जो कॉन्सेप्ट था वो बुरी तरह से जान लेने पर तुला था. कोई लड़का अगर एक स्टेप पर करता, तो दूसरे, तीसरे या चौथे स्टेप पर जान लेने की कोशिश करता था. लेकिन 'कोरियन लवर' टाइप गेम तुरंत जान लेने की कोशिश नहीं करते हैं."
उन्होंने आगे बताया कि इन गेम का पैटर्न ऐसा है कि लोगों को कई लेवल पार करने पड़ते हैं. जब तक गेमर पैसा खर्च करता है, तब तक ठीक, वर्ना उसे ब्लॉक कर देता है. इसके अलावा, सुसाइड के लिए भी उकसा सकता है.
वहीं, साइबर लॉ एडवोकेट पवन दुग्गल बताते हैं,
"ब्लू व्हेल चैलेंज भी 50वें लेवल तक जाता था. दोनों तरह के गेमों में बेसिक यानी बुनियादी गेम वही रहता है (यूजर को नुकसान पहुंचाने के लिए उकसाना), वो नहीं बदलता है."
2017 में भारत ने ‘ब्लू व्हेल चैलेंज’ पर बैन लगाया दिया था. तब 'ब्लू व्हेल चैलेंज' को लेकर कई मामले गंभीर चोट और सुसाइड से जुड़े पाए गए थे. हालांकि, गाजियाबाद के तीन बहनों की मौत के मामले में पुलिस ने ‘कोरियन लवर’ गेम की थ्योरी को नहीं माना है.
लेकिन ऐसे डेंजरस गेम ऑनलाइन जरूर मौजूद हैं, इसलिए इनसे बचना जरूरी है. पवन दुग्गल ने पैरेंट्स के लिए सलाह दी है कि बच्चों को ऐसे गेमों से बचाने और उनकी मोबाइल की लत छुड़वाने के लिए जबरदस्ती के बजाय अन्य तरीके अपनाने चाहिए.
उन्होंने कहा कि आप घर की इंटरनेट कनेक्टिविटी खत्म करने से शुरुआत करें. यानी घर पर वाई-फाई या इंटरनेट राउटर को हटाएं, जिससे घर के डिवाइस पर इंटरनेट ही ना चले. इंटरनेट नहीं होगा तो बच्चे ऑनलाइन गेम खेल ही नहीं पाएंगे. अगर वाई-फाई हटाना मुमकिन नहीं है तो बच्चों की इंटरनेट एक्टिविटी पर नजर जरूर रखें. चेक करते रहें कि बच्चे इंटरनेट पर क्या देख रहे हैं, कौन से गेम खेल रहे हैं.
वीडियो: गाजियाबाद में तीन बहनों की मौत पर अब क्या पता चला?


















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