कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के एक बयान पर विवाद शुरू हो गया है. हाल ही में लोकसभा में बहस के दौरान उन्होंने IIT मद्रास के डायरेक्टर प्रो. वी. कामकोटि को कथित तौर पर ‘गोमूत्र एक्सपर्ट’ कहा था. इसके विरोध में देशभर के 200 से ज्यादा एकेडमिक्स ने प्रियंका गांधी को एक खुला खत लिखा है. खत में एकेडमिक्स ने लिखा कि लोकतंत्र में असहमति जरूरी है, लेकिन मजाक बातचीत का विकल्प नहीं है.
प्रियंका गांधी के गोमूत्र वाले बयान पर 200 शिक्षाविद नाराज, लिखा- 'ऐसा मजाक सही नहीं... '
कांग्रेस सांसद Priyanka Gandhi के 'गोमूत्र एक्सपर्ट' वाले बयान पर विवाद छिड़ गया है. इसके विरोध में 200 से ज्यादा शिक्षाविदों ने उन्हें एक खुला पत्र लिखा है. खत में शिक्षाविदों ने लिखा कि ऐसी बातों से भारत के वैज्ञानिकों की गरिमा को ठेस पहुंचती है.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर के 215 से ज्यादा वाइस चांसलर, पूर्व वाइस चांसलर और एकेडमिक्स ने प्रोफेसर कामकोटि के समर्थन में आवाज उठाई है. उन्होंने कहा कि यह कॉमेंट किसी एक व्यक्ति की आलोचना से कहीं ज्यादा था. एकेडमिक्स ने कहा कि संसद एक ऐसा मंच होना चाहिए, जहां विचारों पर गंभीरता से बहस हो और असहमति सम्मान के साथ जाहिर की जाए. खत में कहा गया,
"चाहे इसे व्यंग्य के तौर पर कहा गया हो या राजनीतिक बयानबाजी के तौर पर, इस तरह की टिप्पणी से ऐसी चिंताएं पैदा होती हैं जो किसी एक व्यक्ति से कहीं आगे तक जाती हैं."
इस खत पर साइन कर करने वालों में नालंदा यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर सचिन चतुर्वेदी, नीति आयोग के पूर्व चेयरमैन राजीव कुमार, NAAC के डायरेक्टर गणेशन कन्नाबिरन, UPSC के पूर्व चेयरमैन डी.पी. अग्रवाल और AICTE के पूर्व चेयरमैन अनिल सहस्रबुद्धे समेत कई लोग शामिल हैं.

‘स्कॉलर की नहीं, आइडिया की आलोचना करें’
एकेडमिक्स ने प्रोफेसर कामकोटि के एकेडमिक और रिसर्च पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि वे भारत के जाने-माने साइंटिफिक और टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूशन में से एक के हेड हैं. उन्होंने कहा कि प्रोफेसर कामकोटि के पास IIT मद्रास से कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में MS और PhD की डिग्री है.
खत में कहा गया कि उन्होंने 150 से ज्यादा रिसर्च पेपर लिखे हैं. 50 से ज्यादा रिसर्च और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को लीड किया है और उन्हें DRDO एकेडमिक एक्सीलेंस अवॉर्ड और इंडियन इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन टेक्नो विजनरी अवॉर्ड जैसे सम्मान मिले हैं. खत में लिखा गया,
“किसी विद्वान के विचारों के मूल पर ध्यान देने के बजाय उन्हें किसी लेबल के जरिए खारिज करने से उस वैज्ञानिक सोच को नुकसान पहुंचने का खतरा है, जिसे विकसित करने के लिए हमारा संविधान हर नागरिक से कहता है.”
'लोकतंत्र में असहमति जरूरी'एकेडमिक्स ने कहा कि इतिहास गवाह है कि कई विचार जिन्हें शुरू में खारिज कर दिया गया था, उन्हें बाद में वैज्ञानिक रूप से सही पाया गया. जबकि कई मानी हुई बातों को आखिरकार गलत साबित कर दिया गया. चिट्ठी में आगे चेतावनी दी गई कि ऐसी टिप्पणियों से वैज्ञानिक, रिसर्चर और शिक्षक सार्वजनिक चर्चाओं में हिस्सा लेने से निराश हो सकते हैं. लेटर में कहा गया,
"लोकतंत्र में असहमति जरूरी है. मजाक बातचीत का विकल्प नहीं है."
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प्रो. वी.कामकोटि ने क्या कहा था?जनवरी 2025 में चेन्नई में दिए गए भाषण की वजह से प्रो. वी. कामकोटि विवादों में आ गए थे. अपने भाषण में कामाकोटी ने एक 'संन्यासी' की कहानी सुनाई थी, जो उनके मुताबिक, गोमूत्र पीने के बाद तेज बुखार से ठीक हो गया था. इस भाषण का एक वीडियो वायरल हो गया, जिसकी कई वैज्ञानिकों, राजनेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने आलोचना की.
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