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अंडमान के समुद्र में नेचुरल गैस का खजाना मिला, कितना बड़ा है ये भंडार?

Oil India Limited अभी गैस का टाइप और उसके सोर्स को समझने के लिए गैस सैंपलिंग, कैलोरीफिक वैल्यू का आकलन और आइसोटोप स्टडीज कर रही है.

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अंडमान के पास नेचुरल गैस मिलने की पुष्टि हुई है

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  • ऑयल इंडिया लिमिटेड ने अंडमान-निकोबार में 'श्री विजयपुरम-3' कुएं में प्राकृतिक गैस मिलने की पुष्टि की है, जो समुद्र की 355 मीटर गहराई पर की गई खोज से प्राप्त हुई है।
  • यह खोज पीएम मोदी के 'समुद्र मंथन मिशन' के तहत की गई है, जिसमें डीप-वॉटर और अल्ट्रा-डीप-वॉटर में हाइड्रोकार्बन संसाधनों का पता लगाने की पहल शामिल है।
  • ऑयल इंडिया प्राकृतिक गैस के कंपोजिशन और स्रोत का अध्ययन कर रही है, और वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने से पहले अतिरिक्त एक्सप्लोरेशन ड्रिलिंग की योजना बना रही है।

भारत के अंडमान-निकोबार आइलैंड के पास तेल और गैस की खोज में लगी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (Oil India Limited-OIL) को बड़ी कामयाबी मिली है. OIL ने कन्फर्म किया है कि उसे इस इलाके में नेचुरल गैस मिली है. ये खोज अंडमान आइलैंड के पास हुई है. ये भंडार कितना बड़ा है, और यहां कितनी गैस है, इस पर अभी आगे की खोज चल रही है.

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केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने दी जानकारी 

भारत सरकार के पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने इस बारे में एक्स पर पोस्ट कर के जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि OIL को अंडमान के पूर्वी तट से लगभग 15 किलोमीटर दूर, समुद्र में मौजूद 'विजयपुरम-3' नाम के कुएं में गैस मिला है. उन्होंने बताया कि ऑयल इंडिया लिमिटेड को अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से 15 किमी दूर 355 मीटर की गहराई पर खोदे गए ‘श्री विजयपुरम-3’ कुएं (exploratory well) में प्राकृतिक गैस मिली है. इओसीन फॉर्मेशन (Eocene formation) में 1900 मीटर से ज्यादा की गहराई पर कुएं के शुरुआती प्रोडक्शन टेस्ट के दौरान लगातार फ्लेयरिंग (गैस जलाकर जांचने की प्रक्रिया) से प्राकृतिक गैस की मौजूदगी की पुष्टि हुई है. 

पुरी ने कहा कि ऑयल इंडिया गैस के कंपोजिशन (बनावट) और कैलोरीफिक वैल्यू (ऊर्जा क्षमता) का पता लगाने के लिए गैस की सैंपलिंग कर रही है. साथ ही गैस कहां से बनी, ये समझने के लिए आइसोटोप स्टडी भी कर रही है.

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पुरी ने कहा कि पीएम मोदी के 'समुद्र मंथन मिशन' (नेशनल डीप वॉटर एक्सप्लोरेशन मिशन) के तहत देश के हाइड्रोकार्बन भंडार का पूरा लाभ उठाने के लिए ऑफशोर बेसिन में बड़ी संख्या में डीप-वॉटर और अल्ट्रा-डीप-वॉटर एक्सप्लोरेशन कुएं खोदने की योजना है. उन्होंने बताया कि अंडमान बेसिन में OIL द्वारा मौजूदा खोज अभियान के तहत खोदे गए 3 खोज वाले कुओं में से 2 कुओं में हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी की सूचना मिली है.

भारत को कितना फायदा होगा?

तेल का कुआं तो मिल गया, लेकिन सवाल है कि इससे भारत को क्या फायदा होगा? गैस मिलना अपने आप में अच्छा संकेत है. लेकिन सवाल ये है कि भारत की जरूरत में इस गैस का कितना योगदान हो सकेगा. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 85 प्रतिशत हिस्सा दूसरे देशों से इंपोर्ट करता है. नेचुरल गैस भी इंपोर्ट के जरिए ही भारत आती है.

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अगर अंडमान में हो रही ड्रिलिंग से वाकई में उतनी गैस निकलती है, जिससे दूसरे देशों पर कुछ निर्भरता कम हो पाए तो ये वाकई अच्छा संकेत है. लेकिन जो भंडार मिला है, वो कितना बड़ा है, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है. ऐसे में इसे जरूरत पूरी करने से ज्यादा इस तरह से देखा जाना चाहिए कि ये भविष्य में होने वाली दूसरी खोजों के लिए रास्ता खोले. इस खोज को लेकर उत्साह तो है लेकिन इस उत्साह के बावजूद कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने में अभी कई साल लगेंगे. 

ऑयल इंडिया अभी गैस का टाइप और उसके सोर्स को समझने के लिए गैस सैंपलिंग, कैलोरीफिक वैल्यू का आकलन और आइसोटोप स्टडीज कर रही है. यह पता लगाने के लिए कि क्या इस खोज से बड़े पैमाने पर कमर्शियल ऑपरेशन हो सकते हैं, और ज्यादा एक्सप्लोरेटरी ड्रिलिंग की जरूरत होगी.

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