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गंगा में इफ्तार पार्टी पर बोले जस्टिस भुइयां, कहा- 'नदी में चिकन बिरयानी खाना...'

सुप्रीम कोर्ट के Justice Ujjal Bhuyan ने वाराणसी के 'गंगा इफ्तार पार्टी' विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि गंगा नदी के ऊपर चिकन खाने पर रोक लगाने वाला कोई कानून नहीं है. गंगा में इफ्तार पार्टी के मामले ने काफी तूल पकड़ा था.

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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां (बाएं). (फोटो: सुप्रीम कोर्ट)

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  • सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि गंगा नदी में चिकन बिरयानी खाना अपराध नहीं है और इस संबंध में कोई कानून मौजूद नहीं है।
  • मार्च 2026 में वाराणसी में गंगा में नॉनवेज खाने और हड्डियां फेंकने के आरोप में 14 युवकों को गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद व्यापक विरोध-प्रदर्शन हुए।
  • जस्टिस भुइयां का कहना है कि छात्रों को बिना डर के विरोध करने और खुलकर प्रदर्शन करने के लिए विश्वविद्यालयों में पर्याप्त सार्वजनिक जगहें उपलब्ध होनी चाहिए।

“चिकन बिरयानी खाना कोई अपराध नहीं है. गंगा नदी के ऊपर चिकन खाने पर रोक लगाने वाला कोई कानून नहीं है.” सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने यह बात एक कार्यक्रम में कही. उन्होंने यह भी कहा कि भारत में अलग-अलग विचारों के लिए सार्वजनिक जगहें इतनी कम हो रही हैं कि अपने अधिकारों के लिए विरोध करने वाले छात्रों को गिरफ्तार किया जा रहा है और उन्हें जमानत नहीं दी जा रही है.

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क्या बोले जस्टिस भुइयां?

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस भुइयां भोपाल की नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी के पांचवें जस्टिस जी.पी. सिंह मेमोरियल लेक्चर में बोल रहे थे. उत्तर प्रदेश में वाराणसी के ‘गंगा इफ्तार पार्टी’ विवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा,

"मुझे यकीन है कि चिकन बिरयानी खाना कोई अपराध नहीं है. गंगा नदी में चिकन खाने पर रोक लगाने वाला कोई कानून नहीं है. कुछ लोगों को इसी वजह से गिरफ्तार किया गया और उन्हें तीन महीने जेल में रहना पड़ा. क्या ऐसी गतिविधि के लिए लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता है और 3 महीने तक जमानत नहीं दी जा सकती? मैं खुद से यह सवाल पूछता हूं! नागरिक देख रहे हैं, लोग देख रहे हैं."

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क्या था मामला?

मार्च 2026 में, वाराणसी में गंगा नदी में एक नाव पर इफ्तार पार्टी का वीडियो वायरल हुआ था. घटना में शामिल लोगों पर नाव में नॉनवेज (चिकन बिरयानी) खाने और हड्डियां नदी में फेंककर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगा था. इसके बाद बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए थे और पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 14 मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. लगभग दो महीने जेल में रहने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिली थी. 

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'असहमति लोकतंत्र की जान'

जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा,

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"शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करना और अपनी असहमति जताना लोकतंत्र की जान है…कैंपस में आवाज उठाने वाले छात्रों को गिरफ्तार कर लिया जाता है, उन्हें महीनों तक जमानत नहीं मिलती और सस्पेंड होने के बाद उन्हें अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं."

उन्होंने यह भी कहा कि भारत में यूनिवर्सिटीज में ऐसी जगह होनी चाहिए जहां छात्र बिना किसी डर के खुलकर सोच सकें और रिसर्च कर सकें, न कि उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.

वीडियो: वाराणसी में गंगा के बीच नाव पर इफ्तार करने वालों के साथ क्या हुआ?

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