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'25 रुपये सैलरी बढ़ी, 4000 का सिलेंडर, चोरी करें या... ', वर्कर्स ने बताया नोएडा की कंपनियों का सच

Noida Protest: नोएडा की एक महिला कर्मचारी ने कहा कि उनसे 10-12 घंटे काम लिया जाता है, लेकिन उन्हें केवल 15 हजार रुपये ही मिलते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि जब जांच होती है, तो कंपनी रिकॉर्ड में 25 हजार रुपये वेतन दिखाती है, जबकि असल में ऐसा नहीं है.

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नोएडा में निजी कंपनियों के कर्मचारी सड़कों पर उतरे. (PTI/ITG)

"25 रुपये सैलरी बढ़ाई थी… 25 रुपये में तो सब्जी भी नहीं आती." ये नोएडा की प्राइवेट कंपनियों में काम करने वालीं महिला कर्मचारियों का कहना है. सोमवार, 13 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के गौतबुद्धनगर जिले के नोएडा में बड़ा बवाल देखने को मिला. प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारी सड़कों पर उतर आए. पुलिस की गाड़ी तोड़ डाली. कुछ अन्य गाड़ियों को आग लगाकर फूंक डाला. कर्मचारियों का आरोप है कि बढ़ती महंगाई के मुताबिक उनकी सैलरी में बढ़ोतरी नहीं की गई.

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उनका कहना है कि सरकार की घोषित वेतन वृद्धि सिर्फ कागजों तक सीमित है, उसे जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया जा रहा. प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने अपनी परेशानियां बताईं कि वे बेहद मुश्किल हालात में गुजारा कर रहे हैं और मजबूरी में उन्हें विरोध के लिए सड़कों पर आना पड़ा.

विरोध कर रहे कर्मचारियों को देखकर अन्य कंपनियों के कर्मचारी भी प्रदर्शन में शामिल होते गए. आजतक की खबर के मुताबिक, एक महिला कर्मचारी ने बताया कि हमें 9 से 11 हजार रुपये के बीच वेतन मिलता है और सालों की मेहनत के बावजूद इसमें कोई खास इजाफा नहीं होता. अगर वे आवाज उठाते हैं, तो सिर्फ 200-300 रुपये बढ़ाकर मामला शांत करने की कोशिश की जाती है.

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वहीं, एक अन्य महिला कर्मचारी ने कहा कि उनसे 10-12 घंटे काम लिया जाता है, लेकिन उन्हें केवल 15 हजार रुपये ही मिलते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि जब जांच होती है, तो कंपनी रिकॉर्ड में 25 हजार रुपये वेतन दिखाती है, जबकि असल में ऐसा नहीं है.

कर्मचारियों का कहना है कि कागजों में सब कुछ सही दिखाया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. विरोध करने पर मामूली बढ़ोतरी कर दी जाती है, मगर उनकी मूल समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं.

आजतक से जुड़े अंशुल सिंह ने प्रदर्शनकारी कर्मचारियों से बात की, तो एक महिला कर्मचारी ने बताया,

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"4 हजार रुपये का तो बड़ा वाला गैस सिलेंडर आ रहा है... ये पूरी पब्लिक को पता है हम रोड पर क्यों खड़े हैं. इसलिए खड़े हैं जो हमारी सैलरी इतनी कम है. रिक्शे का किराया रोजाना 40 रुपये लग रहा है. हमें 20 हजार, 18 हजार, 19 हजार रुपये सैलरी चाहिए."

लोगों ने बताया कि ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता है. एक अन्य महिला कर्मचारी ने बताया,

"हमें 20 हजार रुपये सैलरी चाहिए. हम लोग 10 हजार और साढ़े 9 हजार रुपये में 8 घंटे, 12 घंटे ड्यूटी करते हैं. हमें डबल ओवरटाइम चाहिए और 26 ड्यूटी (महीने में 26 दिन काम) चाहिए. वीकली ऑफ चाहिए."

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एक कर्मचारी ने कहा,

"गैस 400 रुपये किलो मिल रही है. सैलरी 12 हजार है, खर्चा 20 हजार बैठ जाता है. कहां से लाएं, चोरी करें या डाका डालें."

वहीं, एक युवक ने आरोप लगाया कि एक पुलिस वाले ने एक महिला का गला पकड़कर खींचा. उसने यह भी आरोप लगाया कि उसकी भी पिटाई की गई. एक मजदूर ने कपड़े उतारकर चोट के निशान भी दिखाए.

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