तारीख 16 जुलाई. शाम के चार बजे. मोना (बदला हुआ नाम) के फोन की घंटी बजी. उन्होंने कॉल रिसीव किया. लेकिन बात नहीं हुई. एक के बाद एक दस कॉल आए. नेटवर्क के चलते उस तरफ की आवाज कट रही थी. तीसरी से दसवीं कॉल के बीच छन-छन कर जो आवाज आई, उससे समझ में आया कि मोना का एक दोस्त आग में फंसा हुआ है.
नोएडा आग: दोस्त के फोन पर आई जले चेहरे की तस्वीर, लॉकेट से पहचाना वो ऋषभ था
नोएडा के सेक्टर 66 के एक बिल्डिंग में 16 जुलाई को आग लग गई. इस हादसे में 2 लोगों की जान चली गई. इसमें से एक ऋषभ सिंह थे. ऋषभ मध्य प्रदेश के बालाघाट के रहने वाले थे. वे हाइब्रिड मोड में काम करते थे. फिलहाल उनकी ड्यूटी नोएडा में थी. ऋषभ की मौत के बाद उनके गले में पड़े लॉकेट से उनकी पहचान हो पाई.


गले के लॉकेट से की पहचान
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, फोन नोएडा सेक्टर 71 के फेज 3 पुलिस स्टेशन से था. फिर उनके फोन पर एक तस्वीर आई. चेहरा बुरी तरह से झुलसा हुआ था, पहचान पाना नामुमकिन था. लेकिन उसके गले में एक लॉकेट था, जिसे वो कभी नहीं उतारता था. वह लॉकेट अब भी उसके गले में था. जिससे मोना ने उसकी पहचान की.
पुलिस ने फोन पर बताया कि उसका इलाज चल रहा है. उसके फोन में आखिरी नंबर मोना का था. इसलिए पुलिस ने उनको फोन लगाया. पुलिस ने उनसे थाने आने की रिक्वेस्ट की. मोना अपनी बड़ी बहन के साथ टैक्सी लेकर थाने के लिए निकली. उन्होंने बताया, “टैक्सी से जाते वक्त पूरे रास्ते मैं यही प्रार्थना कर रहा था कि वो जीवित हो.”
थाने पहुंचकर पता चला दोस्त नहीं रहा
जब दोनों बहनें थाने पहुंचीं तो गेट पर एक महिला कर्मचारी ने उनको वेलकम किया. फिर दोनों को पानी ऑफर किया और उनके दोस्त के बारे में थोड़ी पूछताछ की. फिर जब दोनों बहनों ने लड़के के बारे में पूछा तो एक दूसरी महिला कांस्टेबल ने उन्हें बताया कि वह अब इस दुनिया में नहीं है. मोना ने बताया,
मुझे यकीन नहीं हो रहा था. मैं उसे लगातार वॉट्सऐप मैसेज भेजती रही. लेकिन मैसेज डिलीवर नहीं हुए, जबकि वह कभी मेरे मैसेज को इग्नोर नहीं करता था.
मृतक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था
जिस लड़के का जिक्र हो रहा है. उनका नाम ऋषभ सिंह था. उम्र 27 साल थी. ऋषभ सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और लगभग दो हफ्ते पहले ही नोएडा आए थे. एक बिल्डिंग में वे बतौर पेइंग-गेस्ट रहते थे. उनका काम हाइब्रिड था. महीने में दस दिन नोएडा ऑफिस से और बाकी के बचे दिन वे मध्य प्रदेश के बालाघाट स्थित अपने घर से काम करते थे.
ऋषभ के घर में उनके माता-पिता और एक छोटी बहन है. वे दो हफ्ते पहले ही नोएडा आए थे. मोना ऋषभ को पिछले चार साल से जानती थी. वहीं उनकी बड़ी बहन पिछले एक साल से. मोना के जरिए ही उनकी पहचान ऋषभ से हुई थी. मोना ने ऋषभ के परिवार को इस हादसे की जानकारी दी. उनकी बहन ने बताया,
ऋषभ बेहद विनम्र स्वभाव का लड़का था. हम दोनों एक ही उम्र के थे. लेकिन वो मुझको दीदी बुलाता था. तीन दिन पहले ही हम उसके साथ फ्लैट खोज रहे थे. मुझे जरा भी अंदाजा नहीं था कि कुछ दिन बाद ऐसा हो जाएगा.
ये भी पढ़ें - Dubai Marina Fire: टाइगर टावर में भीषण आग, कैसे बची 3820 लोगों की जान?
ऋषभ की मौत नोएडा के सेक्टर 66 स्थित एक बिल्डिंग में आग लगने से हुई. इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई. वहीं एक बच्चा और एक लड़की बुरी तरह से झुलस गए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, ये आग बिल्डिंग के तहखाने में चार्ज हो रही एक इलेक्ट्रिक बाइक में स्पार्किंग होने से लगी. इसके चलते एक एक करके कई गाड़ियां जल गईं.
वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: AC कमरों वाली सरकारें आग वाले हादसे रोकने में फेल












