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पूर्व सरकारी अफसर ने कश्मीर में जमीन खरीदी, 6 साल बाद उस पर कोई और घर बना रहा था

Kashmir land Scam: फिशरीज डिपार्टमेंट के पूर्व डायरेक्टर मुफ्ती मंजूर ने 2012 में तीन प्लॉट खरीदे थे. मगर उनकी जमीन बाद में किसी और व्यक्ति को बेच दी गई.

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मुफ्ती मंजूर ने 2012 में श्रीनगर में जमीन खरीदी थी.(Courtesy-इंडिया टुडे)

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  • पूर्व फिशरीज डायरेक्टर मुफ्ती मंजूर की 2012 में खरीदी गई जमीन बिना उनकी अनुमति के दुबारा बेच दी गई, जिसकी उन्हें जानकारी तब हुई जब उन्होंने जमीन पर अवैध निर्माण देखे।
  • मुफ्ती मंजूर की जमीन को बेचने में ब्रोकर रियाज भट और तहसीलदार नुसरत अजीज सहित कई रेवेन्यू अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई, जिससे यह बड़ी जमीन घोटाले की जांच में तब्दील हो गया।
  • जम्मू-कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है और जांचकर्ताओं ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

जम्मू-कश्मीर में फिशरीज डिपार्टमेंट के पूर्व डायरेक्टर मुफ्ती मंजूर 'लैंड स्कैम' का शिकार हो गए. साल 2012 में खरीदी गई उनकी जमीन को बिना उनकी इजाजत के कथित तौर पर दोबारा बेच दिया गया. हैरत की बात है कि उन्हें इसके बारे में पता ही नहीं था कि उनकी जमीन बिक गई है. मुफ्ती मंजूर ने साल 2012 में श्रीनगर में तीन प्लॉट खरीदे थे. दो प्लॉट 800-800 स्क्वायर यार्ड के थे और तीसरा 425 स्क्वायर यार्ड का था. इसके बाद वो अपने परिवार के साथ ऑस्ट्रेलिया चले गए.

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ब्रोकर रियाज भट से खरीदी थी जमीन

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2017 में वो वापस भारत आए और अपनी जमीन देखने के लिए गए. वहां उन्होंने देखा कि कुछ लोग उनकी जमीन पर घर बना रहे हैं. ये कौन लोग थे, क्यों ऐसा कर रहे थे, इसकी कोई जानकारी मुफ्ती मंजूर को नहीं थी. बाद में उन्हें पता लगा कि ये जमीन तो बिक गई है. किसी ने वह जमीन खरीद ली थी. ये सुनकर मंजूर का माथा ठनका. उन्होंने न तो अपनी जमीन बेची थी. न किसी को ऐसा करने की परमिशन दी थी. 

रिपोर्ट के मुताबिक, मंजूर ने रियाज अहमद भट नाम के ब्रोकर के जरिए यह जमीन खरीदी थी. अधिकारियों से शिकायत करने से पहले उन्होंने रियाज भट से बात की. मुफ्ती मंजूर ने बताया,

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जब मैंने उनसे (भट से) पूछा कि मेरी जमीन कैसे बेची गई? तो रियाज भट ने कहा कि उन्हें तहसीलदार को एक कनाल जमीन (800 वर्ग गज) देनी पड़ी थी.

इसके बदले में रियाज ने मुफ्ती मंजूर को जमीन के कुछ दूसरे ऑप्शन दिखाए. मंजूर ने इसे मंजूर भी किया लेकिन वो जिस भी जमीन के लिए सहमत होते, वो पहले ही किसी और के नाम पर होती थीं. मंजूर ने अपने एक रिश्तेदार का किस्सा सुनाया. उन्होंने कहा, 

एक दिन एक रिश्तेदार मुझसे मिलने आए और बताया कि उन्होंने जमीन खरीदी है. मैंने उनसे पूछा कि कहां से और किससे खरीदा है? जब उन्होंने मुझे जगह बताई तो पता चला कि ये वही जमीन थी जिसे रियाज भट मुझे बेच रहा था.

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उन्होंने आरोप लगाया कि रियाज ने उनके साथ भी यही चाल चली थी. पैसे तो ले लिए लेकिन उन्हें जमीन नहीं दी. इसके बाद उन्होंने तत्कालीन श्रीनगर डिप्टी कमिश्नर सैयद आबिद रशीद के पास अपनी शिकायत दर्ज कराई. कमिश्नर ने एडिशनल डिप्टी कमिश्नर के.के. सिद्धा की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई.

दो भाइयों को बेच दी गई मुफ्ती की जमीन

इंवेस्टिगेशन में पता चला कि किसी और ने मंजूर की जानकारी या सहमति के बिना वह प्रॉपर्टी ‘खरीद’ ली थी. बाद में जम्मू-कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच शुरू की. क्राइम ब्रांच ने पाया कि ये केस मुफ्ती मंजूर की जमीन से कहीं ज्यादा बड़ा था. ये जमीन के बड़े घोटाले का मामला था. इस धोखाधड़ी में मदद के लिए रेवेन्यू अधिकारियों पर आरोप लगा. जांच में पता चला कि मुफ्ती मंजूर के परिवार के नाम जमीन की म्यूटेशन होने के 58 दिन बाद उसे रद्द कर दिया गया था. 

अधिकारियों ने आरोप लगाया कि तहसीलदार नुसरत अजीज ने रियाज और दूसरे रेवेन्यू अधिकारियों की ‘मिलीभगत’ से यह आदेश दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक, नुसरत अजीज के पास उस म्यूटेशन को रद्द करने का अधिकार नहीं था. म्यूटेशन यानी जमीन के सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज करने की प्रक्रिया. 

अधिकारियों का दावा है कि कैंसिलेशन की वजह से रियाज भट ‘पटवारी’ से जमीन के नए कागजात हासिल कर लिया और प्रॉपर्टी को दोबारा दो भाइयों को बेच दिया. आरोप है कि एक कनाल जमीन तहसीलदार नुसरत अजीज के नाम भी ट्रांसफर की गई.

रिकॉर्ड में पाया गया हेरफेर

किसी जमीन की खरीद-बिक्री के बाद पटवारी प्रॉपर्टी के कागजात की दो कॉपी तैयार करता है. एक ‘पार्टी-पटवार’ में रखी जाती है और दूसरी ‘पार्टी-सरकार’ में. इंवेस्टिगेशन में पता लगा कि पटवारी के ऑफिस के रिकॉर्ड में म्यूटेशन डॉक्यूमेंट बदल दिया गया था लेकिन 'पार्टी-सरकार' में वह वैसा ही रहा. इसमें मुफ्ती मंजूर के परिवार को ही असली खरीदार के तौर पर दर्ज किया गया था.

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मुफ्ती मंजूर ने उन लोगों के नाम इकट्ठा किए हैं, जिन्हें लगता है कि उनके साथ धोखा हुआ है. उनके मुताबिक, उनकी लिस्ट में 13 नाम है. मगर ये 30 से ज्यादा हो सकते हैं. इनमें श्रीनगर के क्रालपोरा के तीन भाई शामिल हैं. मंजूर ने एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा,

“ड्रग माफिया की तरह ही एक जमीन माफिया भी है. ये लोग बहुत ताकतवर हैं. अब मेरा एकमात्र मकसद यही है कि उन्होंने जितने लोगों के साथ जो कुछ भी किया है. उसके लिए उन्हें सजा दिलाई जाए.”

रियाज भट के खिलाफ महिला की शिकायत

दिसंबर 2025 में नुसरत अजीज और रेवेन्यू अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने से पहले जांचकर्ताओं को एक शिकायत मिली थी. एक महिला ने रियाज भट ब्रोकर के खिलाफ कंप्लेन कराई थी. महिला का दावा था कि उसने 88.4 लाख रुपये में पांच कनाल और चार मरला जमीन खरीदी थी. लेकिन बाद में पता लगा कि ये जमीन किसी और को बेच दी गई थी. जांचकर्ताओं ने पाया कि म्यूटेशन रिकॉर्ड में गड़बड़ी की गई थी. 

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