मृत्यु अंतिम नींद है. कब्र ’अंतिम घर'. यहां कोई बेचैनी नहीं. फारसी में कब्रिस्तान को ‘शहर-ए-खामोशाँ’ कहा गया. दुनिया की क्रूर से क्रूर या बुलंद से बुलंद आवाज जहां जाकर शांत हो जाती हो, ऐसी खामोशी का शहर. खुल्दाबाद में एक ऐसी ही कब्र में मुगल शहंशाह औरंगजेब लेटा है. 18वीं सदी में तकरीबन आधी शताब्दी तक इस बादशाह का वचन ही ‘हिंदुस्तान का शासन’ था. 319 साल पहले उसकी मौत हुई. कब्र में दफन किया गया. लेकिन सियासत ने उसे बार-बार कब्र से ‘बाहर’ निकाला. लेकिन इस बार लगता है सच में उसे कब्र से निकाला जाएगा. हो सकता है कब्र भी न रहे.
औरंगजेब की कब्र अब नहीं बच पाएगी? नितेश राणे ने 'कचरा' बताकर बड़ा दावा किया, लेकिन...
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने दावा किया है कि खुल्दाबाद में मौजूद मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र हटाने की तारीख तय हो चुकी है. हालांकि, यह कब्र ASI के संरक्षण में है और कानून के मुताबिक इसे संरक्षित स्मारक की सूची से हटाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है.

महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र को लेकर जिस तरह से विवाद बढ़ता जा रहा है और राज्य सरकार के लोग इसमें जैसी रुचि ले रहे हैं, हैरत नहीं होगी अगर कभी उसके मकबरे का ‘भूगोल’ बदल जाए. महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार के कैबिनेट मंत्री नितेश राणे ने फिर से मांग उठा दी है कि खुल्दाबाद से औरंगजेब की कब्र हटाई जानी चाहिए. उन्होंने तो ये तक दावा कर दिया कि कब्र हटाने की तारीख तय हो चुकी है. बस उसका ऐलान अभी नहीं किया जाएगा. इसके बारे में बाद में बताया जाएगा. ये सब विवाद औरंगजेब को दफनाए जाने के 319 साल बाद हो रहा है.
1706 में हुई थी औरंगजेब की मौतसाल 1706 की बात है. हिंदुस्तान के सबसे ताकतवर और विवादित बादशाह औरंगजेब 88 साल का हो गया था. उम्र के इस आखिरी पड़ाव पर शरीर ने उसका साथ देना बंद कर दिया. मार्च 1707 के आसपास वह महाराष्ट्र के अहमदनगर के पास अपने शाही शिविर में ठहरा था. लगातार तेज बुखार और उम्र की बीमारियों से परेशान अपनी आखिरी सांसें गिन रहा था. फिर आया 3 मार्च 1707. औरंगजेब की सांसें थम गईं. 49 साल तक दिल्ली की गद्दी पर शासन करने वाले औरंगजेब की मौत हो गई. जिस दक्कन को जीतने में उसने अपनी आधी जिंदगी लगा दी, वही अंत में उसकी कब्र साबित हो गया.
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (पुराना नाम औरंगाबाद) के पास खुल्दाबाद में औरंगजेब को दफनाया गया. हुमायूं, अकबर या शाहजहां के भव्य मकबरों के उलट औरंगजेब की कब्र बेहद सादी हालत में खुले आसमान के नीचे है. अपनी वसीयत में औरंगजेब ने खुद ये इच्छा जताई थी कि बेहद सादगी के साथ उसे सूफी संत शेख जैनुद्दीन शिराजी की दरगाह के पास दफनाया जाए. यही किया गया. तीन सदी से उसकी कब्र खुल्दाबाद में मौजूद है.

औरंगजेब की इसी कब्र को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में जब-तब मामला गर्मा जाता है.
दरअसल, मराठों से औरंगजेब का लंबा और पुराना झगड़ा रहा था. आज के वक्त में महाराष्ट्र की सियासत में मराठा सेंटिमेंट ठीक-ठाक हावी रहता है. इसके तुष्टीकरण के लिए भी औरंगजेब विरोधी बयान दिए जाते हैं. इसी सिलसिले में 29 अक्टूबर को छत्रपति संभाजीनगर में नितेश राणे महाराष्ट्र के किलों को ‘जिहाद’ से आजाद कराने की पहल का क्रेडिट मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को दे रहे थे. तभी औरंगजेब के मकबरे का जिक्र चल पड़ा. राणे ने कहा,
हम यहां वह कचरा नहीं चाहते. जो लोग इसे पसंद करते हैं, वे इसे अपने पाकिस्तान ले जा सकते हैं. हम इसे यहां नहीं चाहते. लोग मुझसे पूछेंगे कि यह कब होगा. मैं तारीख नहीं बताऊंगा. फडणवीस जानते हैं कि यह खबर कब देनी है.
यानी राणे का कहना है कि औरंगजेब की कब्र हटाने का फैसला हो गया है. बस तारीख नहीं बताई गई है.
ASI संरक्षित स्मारकहालांकि, औरंगजेब की मजार को हटाना महाराष्ट्र सरकार के लिए आसान नहीं होगा. ये मकबरा आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के तहत एक सुरक्षित स्मारक है. मार्च 2025 में खुद सीएम फडणवीस ने कहा था कि इसे हटाने की मांग पर सहमति तो है लेकिन कोई भी कार्रवाई कानून के दायरे में ही करनी पड़ेगी. कानून कहता है कि किसी भी संरक्षित स्मारक को तोड़ना, नुकसान पहुंचाना या हटाना गैरकानूनी है. इसका उल्लंघन करने पर सजा हो सकती है. महाराष्ट्र सरकार या कोई भी राज्य सरकार इसे अपने से फैसला लेकर नहीं हटा सकती. किसी भी स्मारक को संरक्षित सूची से निकालने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास है.
ये भी पढ़ेंः औरंगजेब का वो वंशज, जिसने संयुक्त राष्ट्र से लगाई मुगल बादशाह की कब्र बचाने की गुहार
केंद्र सरकार के स्टैंड की भी बात कर लेते हैं.
अप्रैल 2025 में राज्यसभा में एक लिखित जवाब में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने औरंगजेब की कब्र के सुरक्षित होने की पुष्टि की थी. सरकार ने संसद को यह भी बताया कि ASI ने मकबरे के चारों ओर 12 फुट ऊंची मेटल शीट, आसपास की दीवारों पर कंसर्टिना वायर लगाया था. किसी भी तरह के नुकसान को रोकने के लिए जिला प्रशासन के साथ मिलकर प्राइवेट सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया था.
ये सुरक्षा की जरूरत भी हिंदुत्ववादी संगठनों की धमकियों के बाद ही पड़ी. मार्च 2025 में BJP नेताओं और हिंदुत्ववादी संगठनों ने औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग की थी. तब भी नितेश राणे ने इसका समर्थन किया था. तब भी उन्होंने कहा था कि सरकार ने इसे हटाने की योजना पहले ही बना ली है. पत्रकारों को इसके बारे में विध्वंस के बाद ही पता चलेगा.
वीडियो: 'रामायण' के प्रीमियर का ऐसा असर! अमेरिकी बॉक्स ऑफिस पर मच गई खलबली!









