मुंबई के घाटकोपर पश्चिम इलाके में 12 अगस्त को कुर्ला की पहाड़ी का एक हिस्सा ढह गया. इस हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई. सरकारी रिकॉर्ड से पता चलता है कि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने आठ साल पहले ही बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) को चेतावनी दी थी कि पहाड़ी के उस हिस्से के गिरने का खतरा है. GSI ने बचाव के लिए कुछ सुझाव दिए थे, जिन पर कभी अमल नहीं किया जा सका.
2018 में ही मिली थी लैंडस्लाइड की चेतावनी, BMC की लापरवाही से हुई 8 मौतें?
Mumbai के घाटकोपर में पहाड़ी ढहने से 8 लोगों की मौत हो गई. जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) की 2018 में जारी रिपोर्ट को नजरअंदाज करने से यह हादसा हुआ, जिस पर BMC ने कार्रवाई नहीं की थी. रिपोर्ट में और क्या था?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दस्तावेजों से पता चलता है कि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने साकी नाका की 'हिल नंबर 3' पर ‘तुरंत ध्यान देने’ को कहा था. 2005 और 2008 के बीच यहां तीन बार लैंडस्लाइड हुआ था, जिसमें 16 लोगों की मौत हुई थी. इस हादसे में कम से कम 26 घर बर्बाद हो गए थे.
GSI ने मुंबई के 74 ऐसे इलाकों में दो साल तक फील्ड विजिट किया था, जहां लैंडस्लाइड की आशंका बनी रहती है. इसके बाद 2018 में 435 पेज की एक रिपोर्ट तैयार की थी. रिपोर्ट में कुर्ला को मुंबई के पांच खास लैंडस्लाइड-रिस्क जोन में शामिल किया गया है. हिल नंबर 3 उस लिस्ट में था. यह एक खड़ी ढलान है जिसमें चट्टानें और ढीली मिट्टी है. ऐसी मिट्टी जो भारी बारिश में टूट जाती है. इसके बेस और किनारे पर घर बने हुए हैं.
ढलान पर बसी दो बस्तियों, नेताजी नगर और मिलिंद नगर का आकलन किया गया था. इसके बाद GSI इस नतीजे पर पहुंचा कि वहां जान-माल का खतरा महाराष्ट्र के दूसरे हिस्सों के मुकाबले ‘कई गुना’ ज्यादा था. एजेंसी ने BMC से शहर के ऐसे संवेदनशील इलाकों के लिए ‘लैंड यूज पॉलिसी’ बनाने का सुझाव दिया था.
'जिसका डर था, वही हुआ'12 अगस्त को लैंडस्लाइड तब शुरू हुआ जब भारी बारिश में ढलान पर लगा पीपल का पेड़ उखड़ गया. इसके बाद चट्टानें और बड़े पत्थर नीचे बनी झुग्गियों पर आ गिरे. 8 साल पहले ही रिपोर्ट में कहा गया था,
"खड़ी ढलान, चट्टानों के बीच दरार और उन दरारों में जड़ों के फैलने की आशंका देखते हुए चट्टानों के गिरने की आशंका है. इससे जान-माल का खतरा हो सकता है और पहाड़ी ढलान के किनारे और तलहटी में बसी बस्तियों को नुकसान पहुंच सकता है. इस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है."
GSI ने सलाह दी थी कि ढलान को और न काटा जाए और न ही उसकी तरफ कोई कंस्ट्रक्शन किया जाए. GSI के अधिकारी ने आगे कहा,
“इन हालात से बचने के लिए एक लैंड-यूज पॉलिसी अपनाने की जरूरत है और ड्रेनेज सिस्टम को सुरक्षित बनाया जाना चाहिए. हमने अपनी रिपोर्ट में इन सुझावों का जिक्र किया था."
आठ साल बीत जाने के बाद भी इनमें से कुछ नहीं किया गया. BMC के रिकॉर्ड बताते हैं कि 2023 में हिल नंबर 3 पर रिटेनिंग वॉल बनाने के लिए कहा गया था. यह एक मजबूत दीवार होती है जिसे मिट्टी, चट्टानों या मलबे को खिसकने और बहने से रोकने के लिए बनाया जाता है.
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BMC ने क्या बताया?BMC के एक अधिकारी ने बताया कि बस्तियों और ढलान वाली जमीन कलेक्टर ऑफिस के अधिकार क्षेत्र में आती है. इसलिए उनके पास वहां कंस्ट्रक्शन करने का अधिकार नहीं है. यह दीवार महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) और लोक निर्माण विभाग (PWD) को बनानी थी. अधिकारी ने कहा,
"हमने GSI की सिफारिश कलेक्टर कार्यालय और राज्य सरकार को भेजी थी, जिसके बाद उन्होंने रिटेनिंग वॉल बनाने की योजना बनाई थी. हालांकि, फंड की कमी की वजह से यह योजना धीमी पड़ गई."
रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 और 2023 के बीच राज्य सरकार ने पूरे महाराष्ट्र में लैंडस्लाइड को रोकने के लिए 400 करोड़ रुपये से ज्यादा मंजूर किए. सरकारी सूत्रों ने बताया कि 2023 के बाद फंड जारी करने की रफ्तार धीमी हो गई. इस वजह से कई काम रुक गए.
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