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एक अंडा 6000 का, सेब एक लाख का, अब समझ आया ईरान ने अपनी मिसाइल पर 'थैंक्यू इंडिया' क्यों लिखा?

कारगिल में हुई एक नीलामी में मुर्गी का एक अंडा 6 हजार रुपये में बिका. वहीं, एक सेब का सौदा 1.05 लाख रुपये में तय हुआ. ये सब पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध में ईरान की मदद के लिए किया गया.

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कारगिल में एक सेब एक लाख में बिका. (फोटो- India Today)

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  • कारगिल में लद्दाख के लोगों ने ईरान की मदद के लिए मुर्गी के अंडे और सेब जैसी वस्तुओं की नीलामी कर हजारों रुपये जुटाए।
  • अमेरिका के हमले के बाद ईरान के खिलाफ भावनाएं बढ़ी और शिया समुदाय ने आर्थिक तौर पर सहायता देने का निर्णय लिया।
  • नीलामी से प्राप्त धन नई दिल्ली में ईरान की एंबेसी भेजा गया, जिससे आगे की सहायता और आभार व्यक्त किया गया है।

क्या आपने कभी 6 हजार रुपये में एक अंडा या एक लाख में एक सेब खरीदा है? शायद नहीं. लेकिन केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के कारगिल में ऐसा सच में हुआ है. यहां एक मुर्गी के अंडे के 6 हजार रुपये मिले हैं. पिछले सीजन का बचा एक सेब 1.05 लाख रुपये में बिका है. 

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हालांकि, ये कोई आम खरीद-फरोख्त नहीं थी. इसके पीछे वजह है लोगों की भावनाएं और एकजुटता. वही भावनाएं जिसने लद्दाख के छोटे-छोटे बच्चों को अपने गुल्लक दान करने के लिए मोटिवेट किया था. ताकि अमेरिका के खिलाफ लड़ाई में ईरान कहीं कमजोर न पड़े. इस नीलामी से जुटाया गया पैसा ईरान की मदद के लिए भेजा गया है.

बता दें कि कारगिल में बड़ी संख्या में शिया आबादी रहती है, जिसकी ईरान और वहां के सुप्रीम लीडर से भावनाएं जुड़ी हैं. 1 मार्च 2026 को अमेरिकी हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद लद्दाख के शिया समुदाय के लोगों को गहरा धक्का लगा था. उन्होंने सड़कों पर उतरकर अमेरिका के खिलाफ प्रदर्शन किया था.

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यही नहीं, जंग में ईरान की मदद के लिए चीजें और पैसे दान करने के लिए लोग आगे आने लगे. जिससे जो हो सका, उसने वही दान किया. बच्चों के गुल्लक, घर के बर्तन जैसी चीजें भी लोगों ने डोनेट कीं. ईरान ने इजरायल पर छोड़े गए एक मिसाइल पर ‘थैंक्यू इंडिया’ लिखकर इसके लिए भारत के लोगों का आभार भी जताया था.

6 हजार में बिका अंडा

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की मदद के लिए दान के इसी सिलसिले में लद्दाख के काकसर गांव की रहने वाली एक महिला ने पिछले हफ्ते तीन मुर्गियां दी थीं. इसी में से एक मुर्गी ने बाद में एक अंडा दिया. इसके बाद और लोगों को दान के लिए प्रेरित करने के मकसद से उस अंडे की नीलामी की गई. महज 100 रुपये से बोली लगनी शुरू हुई. देखते ही देखते वहां पर लोगों की भीड़ जुट गई. लोग बढ़-चढ़कर बोली लगाने लगे. आखिर में वो अंडा 6 हजार रुपये में बिका. 

एक लाख का एक सेब

इसके बाद से तो लद्दाख में एक ट्रेंड बन गया. लोग छोटी-छोटी चीजें दान के लिए लाने लगे. फिर उनकी नीलामी की जाने लगी और पैसे जुटाए जाने लगे. लद्दाख में ही एक गांव है कारकिछू (Karkitchoo). यहां के सेब अपनी लंबी शेल्फ लाइफ के लिए जाने जाते हैं. यानी बहुत लंबे समय तक स्टोर करके रखे जा सकते हैं.

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इसी गांव के एक किसान के पास पिछले सीजन (नवंबर) का एक सेब बचा था. उसने यह सेब दान कर दिया. इसके बाद इसकी भी नीलामी हुई. बोली शुरू हुई 200 रुपये से, और पता है आखिर में ये सेब कितने का बिका? 1.05 लाख रुपये में! इसे एक स्थानीय कारोबारी इलियास ने खरीदा. 

दान और नीलामी से जुटने वाले ये सारे पैसे नई दिल्ली में ईरान की एंबेसी में भेजे जाते हैं. वहां से इन्हें ईरान भेजा जाता है. ईरान ने कई बार भारत के लोगों की ओर से आए इस दान पर अपने तरीके से आभार जताया है.

वीडियो: ट्रंप की धमकी पर ईरान की कितनी तैयारी? कौन-से ठिकाने निशाने पर?

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