उत्तराखंड के कोटद्वार में बीते दिनों नाम और पहचान को लेकर उपजे विवाद ने पूरे राज्य की राजनीति और प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए. इस मामले के केंद्र में हैं दीपक कुमार, जिन्हें लोग अब ‘मोहम्मद दीपक’ के नाम से जानते हैं. दीपक वही शख्स हैं, जिन्होंने बीते दिनों एक मुस्लिम दुकानदार की मदद की थी. इसके बाद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा काटा. दीपक और उनके दोस्त विजय रावत ने इस पूरे घटनाक्रम पर ‘द लल्लनटॉप’ को इंटरव्यू दिया है और विस्तार से अपनी बात रखी है.
‘बेटी का स्कूल जाना बंद हो गया...’, ‘मोहम्मद दीपक’ ने लल्लनटॉप को बताई आपबीती
लल्लनटॉप को दिए गए इंटरव्यू में ‘मोहम्मद दीपक’ ने बताया कि उन्होंने मुस्लिम दुकानदार का साथ क्यों दिया. इसके अलावा दीपक ने राहुल गांधी के समर्थन और चुनाव लड़ने के कयास पर भी बात की.


दीपक और विजय ने बताया कि विवाद की शुरुआत 26 जनवरी को हुई. गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम के बाद दोनों रोज़ की तरह अपने दोस्त की दुकान पर बैठे थे. पास ही एक बुजुर्ग दुकानदार की दुकान है, जिनकी उम्र करीब 70–75 साल है और जिनकी तबीयत पहले से खराब रहती है.
इसी दौरान बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ता कुछ लोग वहां पहुंचे और बुजुर्ग दुकानदार से उनकी दुकान के नाम को लेकर सवाल-जवाब करने लगे. दीपक का आरोप है कि इन लोगों ने जबरदस्ती नाम बदलने का दबाव बनाया. दीपक बताते हैं कि जब उनसे उनका नाम पूछा गया तो उन्होंने कहा,
मेरा नाम मोहम्मद दीपक है. मैं न हिंदू हूं, न मुसलमान, मैं सबसे पहले एक इंसान हूं.
इसके बाद लोग सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग उनके समर्थन में उतर आए.
31 जनवरी को क्या हुआ था?
दीपक ने इंटरव्यू में बताया कि घटना से पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर उन्हें धमकी दी गई थी. उन्होंने यह पोस्ट पुलिस को भी भेजी थी. उन्होंने बताया कि 31 तारीख को देहरादून से करीब 150-200 कार्यकर्ता कोटद्वार पहुंचे. कई घंटों तक शहर में नारेबाज़ी, गाली-गलौज और हंगामा होता रहा. भीड़ दीपक के जिम तक पहुंच गई, जहां महिलाएं भी मौजूद थीं.
दीपक ने लल्लनटॉप को बताया कि उन्हें गालियां दी गईं और परिवार को लेकर अपशब्द कहे गए. उन्होंने कहा कि जब परिवार को गाली दी गई तो वे चुप नहीं रह सके और नीचे आकर उनका सामना किया.
पुलिस कार्रवाई पर सवाल
दीपक का कहना है कि पुलिस ने स्थिति संभालने के बजाय उन्हें ही हिरासत में ले लिया. उन्होंने कहा,
अगर पुलिस मुझे सुरक्षा के लिए ले गई, तो बाहर से आए लोगों को क्यों नहीं रोका गया?
दीपक और विजय दोनों का आरोप है कि बाहरी लोगों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई, जबकि बाद में उनके खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर दिया गया.
FIR पर जताई नाराजगी
1 फरवरी को पुलिस ने दीपक के खिलाफ FIR दर्ज की. दीपक का कहना है कि उन्होंने पुलिस को तहरीर में कई लोगों के नाम दिए थे, लेकिन FIR में ‘अज्ञात लोगों’ का ज़िक्र किया गया. उन पर चोरी और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल जैसे आरोप लगाए गए हैं, जिन्हें उन्होंने पूरी तरह से खारिज कर दिया. दीपक का दावा है कि CCTV फुटेज उनके पास मौजूद है.
राजनीति के आरोप और राहुल गांधी का ट्वीट
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब नेता विपक्ष राहुल गांधी ने दीपक के समर्थन में ट्वीट किया. उन्होंने दीपक को ‘भारत का हीरो’ बताया. इसके बाद यह सवाल उठने लगे कि क्या यह पूरा मामला राजनीतिक है. लल्लनटॉप से जुड़े सिद्धांत मोहन ने जब इस पर सवाल किया तो दीपक ने बताया,
मुझे राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है. मैं विचारधारा के साथ खड़ा होता हूं, पार्टी के साथ नहीं.
वहीं, विजय रावत पर आरोप है कि वो यूथ कांग्रेस (NSUI) से जुड़े रहे हैं. इस पर उन्होंने कहा कि यह मुद्दा राजनीति का नहीं बल्कि इंसानियत का है.
इससे पहले, लल्लनटॉप को दिए गए इंटरव्यू में दीपक ने कहा था कि राहुल गांधी जैसे बड़े नेता का समर्थन मिलना खुशी की बात है और उन्हें राहुल गांधी की सोच और लोगों से जुड़ने का तरीका अच्छा लगता है.
परिवार पर पड़ा असर
इस पूरे विवाद का असर दीपक के परिवार पर भी पड़ा है. दीपक ने बताया कि उनकी 5 साल की बेटी है, जो LKG में पढ़ रही है. पत्नी हाउसवाइफ हैं और मां चाय की छोटी दुकान चलाती हैं. तनाव के चलते दीपक ने पत्नी और बेटी को कुछ समय के लिए सुरक्षित जगह पर भेज दिया है. दीपक ने बताया कि उनकी जिम कमाई का एकमात्र जरिया है, जो विवाद के बाद से कई दिनों से बंद पड़ा है.
हिंसा के आरोपों पर सफाई
कुछ लोगों का आरोप है कि 26 जनवरी को हाथापाई की शुरुआत दीपक की तरफ से हुई. इस पर दीपक का कहना है कि उन्होंने किसी पर हमला नहीं किया. दीपक ने बताया,
हमने सिर्फ बुजुर्ग दुकानदार की हालत देखकर लोगों को वहां से हटाया, ताकि उन्हें कुछ हो न जाए.
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चुनाव लड़ने की अटकलें
सोशल मीडिया पर यह चर्चा भी चली कि दीपक राजनीति में उतर सकते हैं या विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं. दीपक ने इसे सिरे से खारिज किया. उनका कहना है,
मैं नॉर्मल जिंदगी जीना चाहता हूं. चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है.
इंटरव्यू के दौरान दीपक और विजय ने सवाल उठाया कि समाज और संगठन असली मुद्दों पर चुप क्यों रहते हैं. उन्होंने अंकिता भंडारी हत्याकांड, बच्चों के खिलाफ अपराध और बेरोज़गारी जैसे मामलों का ज़िक्र किया.
दीपक ने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए मानसिकता बदलनी होगी. अगर हर किसी को धर्म के चश्मे से देखा जाएगा तो देश आगे नहीं बढ़ सकता. उन्होंने कहा कि पहले इंसान बनिए, अच्छा व्यवहार रखिए, क्योंकि हिंदुस्तान सिर्फ एक धर्म का नहीं, सभी का है.
वीडियो: मोहम्मद दीपक ने कोटद्वार बाबा पर क्या कहा?















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