ईरान ने शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान जाने से इनकार नहीं किया है. यह बात ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शनिवार, 4 अप्रैल को कही. उन्होंने कहा कि किसी भी बातचीत का नतीजा इस जंग का अंत होना चाहिए. अराघची के बयान से पाकिस्तान की जान में जान जरूरी आई होगी, क्योंकि एक अमेरिकी अखबार ने दावा किया था ईरान ने अमेरिका से नेगोशिएशन के लिए इस्लामाबाद का दौरा करने से मना कर दिया है.
'इस्लामाबाद दौरे से इनकार नहीं,' ईरान के बयान से पाकिस्तान 'खुश', लेकिन एक शर्त है
अमेरिकी अखबार 'Wall Street Journal' ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि Iran ने Pakistan की मध्यस्थता में होने वाली किसी भी बातचीत में शामिल होने से इनकार किया है. अब ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने पूरी बात बताई है.


ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिकी मीडिया के दावे को खारिज कर दिया है. पाकिस्तान के लिए यह राहत और खुशी की बात है, क्योंकि अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग रोकने के लिए इस्लामाबाद पर्दे के पीछे से काफी मेहनत कर रहा है.
सैयद अब्बास अराघची ने ‘X’ पर लिखा,
“अमेरिकी मीडिया ईरान की बात को गलत तरीके से दिखा रहा है. हम पाकिस्तान की कोशिशों के लिए उसके बहुत शुक्रगुजार हैं और हमने कभी इस्लामाबाद जाने से मना नहीं किया है. हमें इस बात की परवाह है कि हम पर थोपी गई गैर-कानूनी लड़ाई का पक्का और हमेशा के लिए अंत हो."

इस्लामाबाद के संभावित दौरे को लेकर सैयद अब्बास अराघची ने शर्त रखी है कि पाकिस्तान में अमेरिका के साथ बातचीत में उनके देश के हितों का ध्यान रखा जाए. उन्होंने कहा कि वेस्ट एशिया में शांति के लिए ईरान के ऊपर गैर-कानूनी शर्तें न थोपी जाएं और जंग का हमेशा के लिए खात्मा हो.
अमेरिकी अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि तेहरान ने मध्यस्थों ने बताया था कि वह आने वाले दिनों में इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से मिलने को तैयार नहीं है, और यह भी कहा कि अमेरिका की मांगें कबूल करने लायक नहीं हैं.
ईरान ने पहले उन दावों को खारिज कर दिया था कि वह पाकिस्तान की मदद से हो रही बातचीत में हिस्सा ले रहा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा था कि अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है और तेहरान को मध्यस्थों के जरिए सिर्फ ‘बहुत ज्यादा और गलत मांगें’ ही मिली हैं. बयान में कहा गया,
"पाकिस्तान के मंच उनके अपने हैं. हमने उनमें हिस्सा नहीं लिया… हालांकि युद्ध को खत्म करने के लिए क्षेत्रीय अपीलों का स्वागत है, लेकिन यह याद रखना चाहिए कि इसे शुरू किसने किया था."
पाकिस्तान, तुर्किए और मिस्र बीते कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच बैक-चैनल डिप्लोमेसी में लगे हुए हैं. 29 मार्च को इस्लामाबाद में इन देशों के विदेश मंत्रियों की बीच बैठक भी हुई, जिसमें सऊदी अरब भी शामिल रहा. इस बैठक में वाशिंगटन और तेहरान के बीच सीधी बातचीत की उम्मीद जताई गई थी.
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पाकिस्तान ने क्या कहा?इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने इस दावे को खारिज कर दिया कि उसकी शांति पहल रुक गई है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने ऐसी रिपोर्ट्स को ‘बेबुनियाद’ और ‘मनगढ़ंत’ बताया. अंद्राबी ने कहा,
“हम इन झूठे इल्जामों को पूरी तरह से खारिज करते हैं. इस बारे में आधिकारिक सूत्रों का कोई भी जिक्र गलत है. विदेश मंत्रालय की हालिया ब्रीफिंग को गलत तरीके से पेश किया गया था.”
उन्होंने मीडिया से आधिकारिक बयानों पर भरोसा करने को कहा. वहीं, पाकिस्तान के अखबार ‘डॉन’ ने बिना नाम बताए अधिकारियों के हवाले से बताया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत से कुछ तरक्की हुई है, लेकिन ईरान की तरफ से कोई साफ जवाब न मिलने से रफ्तार धीमी हो गई है.
एक अधिकारी ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि ईरान ने मिलिट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा नुकसान होने के बावजूद बातचीत की अपील पर पॉजिटिव जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी नेता ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के संपर्क में हैं.
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