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मार्को रूबियो को विदाई देने आए कांस्टेबल, ये भारत का 'ट्रंप से बदला' या लोग कुछ ज्यादा ही सोच रहे?

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की जयपुर यात्रा के दौरान स्वागत और विदाई के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए. कई लोगों ने दावा किया कि दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं में गिने जाने वाले शख्स का स्वागत सिर्फ स्थानीय पुलिस और निचले स्तर के अधिकारियों ने किया.

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मार्को रूबियो के जयपुर में स्वागत और विदाई पर उठे सवाल. (फोटो- X)

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  • मार्को रूबियो का भारत के जयपुर दौरा गैर-राजनीतिक था, जहां उन्हें स्थानीय पुलिस अधिकारी और राजनयिक प्रतिनिधि ने ही विदाई दी।
  • इस स्वागत में किसी बड़े सरकारी अधिकारी या मंत्री की उपस्थिति नहीं थी क्योंकि उनका दौरा आधिकारिक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था।
  • इस घटना के बाद यह चर्चा हुई कि भारत ने जानबूझकर अमरीका के इस वरिष्ठ अधिकारी के साथ औपचारिकता में सादा व्यवहार करके अमेरिका को एक संदेश दिया।

भारत दौरे पर आए डॉनल्ड ट्रंप के विदेश मंत्री मार्को रूबियो जयपुर भी घूमने गए थे. वहां से वापसी हो रही थी. इस दौरान लोगों की नजरें उन्हें विदा करने आए लोगों पर जा टिकीं. एक SHO, कुछ कांस्टेबल. एक SI और कुछ निचले दर्जे के बाबू. ये वो लोग थे जो दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों में एक मार्को रूबियो को विदाई दे रहे थे. 

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सोशल मीडिया ऐसा चौपाल है, जिसकी बारीक नजर से कुछ भी नहीं बचता. यह भी नहीं बचा. फिर वही हुआ, जो होना था. दुनिया भर में टैरिफ और सेना के दम पर हेकड़ी दिखा रहे ट्रंप के मंत्री की ये हालत देख लोग मजे ही लेने लगे. 

ऐसा नहीं है कि मार्को की कथित बेइज्जती सिर्फ जयपुर से जाते समय हुई. जयपुर आने के दौरान भी एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के फूल किसी बड़े अधिकारी या नेता या मंत्री के हाथ में नहीं थे. कुछ अधिकारियों ने ऐसा रूखा स्वागत किया कि ये वेलकम लोगों की नजरों में आ गया. 

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संदीप मित्तल नाम के यूजर ने वीडियो एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मार्को रूबियो की जयपुर की बड़ी ट्रिप थी. एक ऐतिहासिक डिप्लोमैटिक स्वागत की उम्मीद थी लेकिन उनका स्वागत एक मामूली ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले की तरह हुआ. क्या ‘बड़े लोग’ उनका इंतज़ार कर रहे थे? आगे उन्होंने लिखा, 

मार्को के स्वागत में बड़े सरकारी अधिकारियों की जगह पर लोकल पुलिस स्टेशन का ऑफिसर, कुछ कन्फ्यूज्ड कॉन्स्टेबल और ओवरटाइम करने वाले सरकारी इंटर्न थे. उन्हें कोई ऑफिशियल एस्कॉर्ट नहीं मिला. लोकल पुलिस को भी यह पक्का करने के लिए बुलाया गया था कि रूबियो होटल के रास्ते में कहीं खो न जाएं. 

उन्होंने इस पूरे सीन को ‘कॉमेडी गोल्ड’ बताया.

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वापसी पर भी वही नजारा

ये तो रही अगवानी की बात. जयपुर में आमेर का किला देखने के बाद जब रूबियो वापस दिल्ली जा रहे थे, तब भी नजारा ऐसा ही था. या थोड़ा ज्यादा ही बुरा था. सागर नाम के एक यूजर ने इसका वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा,

दुनिया की सबसे ताकतवर हस्तियों में से एक मार्को रूबियो को जयपुर से विदा करने के लिए एक SHO, कुछ कांस्टेबल, एक SI और कुछ निचले दर्जे के बाबू ही नजर आए. यहां तक कि राज्यमंत्री स्तर का कोई मंत्री भी दिखाई नहीं दिया. किसी शीर्ष अमेरिकी अधिकारी के लिए यह अब तक के सबसे ‘कोल्ड वेलकम’ में से एक था.

कई लोगों को ये सब ठीक नहीं लगा. कई लोग ऐसे भी थे जिन्होंने इसे भारत और अमेरिका के बीच हालिया खट्टे-मीठे रिश्तों का जवाब माना. जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी शेषपॉल वैद ने एक्स पर लिखा, 

मोदी सरकार ने दुनिया की एकमात्र महाशक्ति के तीसरे सबसे शक्तिशाली व्यक्ति अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट का दर्जा घटाकर SHO के स्तर पर ला दिया. कम-से-कम मैंने तो अमेरिका के विदेश मंत्री के साथ ऐसा अपमानजनक बर्ताव पहले कभी नहीं देखा. ट्रंप की 'शिटहोल' (Shithole) टिप्पणी का क्या जबरदस्त जवाब है.

भारत-अमेरिका के रिश्ते

बता दें कि भारत और अमेरिका के हाल के दिनों में रिश्ते काफी अस्थिर रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर सबसे महंगा टैरिफ लगाया. ऑपरेशन सिंदूर को लेकर उल्टे-पुल्टे बयान दिए. रूस से तेल खरीदने पर कलेश मचाया. भारत को चीन जैसे देशों के साथ ‘नरक का द्वार’ तक बता दिया. भारत ने उनकी ऊल जलूल बातों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. लेकिन अब लोग कह रहे हैं कि अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ ये सब करके भारत ने जानबूझकर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प के प्रशासन को संदेश भेजा होगा.

जानबूझकर की गई रूबियो की अनदेखी

इन सबके अलावा एक और दलील है जो थोड़ी तार्किक भी लगती है. इसके हिसाब से मार्को रूबियो के साथ कोई ‘अपमानजनक’ व्यवहार नहीं किया गया. राजनयिक नियमों के अनुसार, मार्को रूबियो की जयपुर यात्रा को आधिकारिक राजनीतिक या राज्यस्तरीय कार्यक्रम नहीं माना गया था. उनका जयपुर और आगरा जाना एक टूरिस्ट दौरा था, जहां वो ऐतिहासिक स्थलों को किसी सैलानी की तरह देखने के लिए गए थे. इसी वजह से प्रोटोकॉल के नियमों के तहत मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों या बड़े राजनीतिक नेताओं की मौजूदगी जरूरी नहीं लगी. 

अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक परंपराओं में ऐसे मामलों में स्वागत और विदाई की व्यवस्था स्थानीय सरकारी अधिकारी और विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि संभालते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जयपुर एयरपोर्ट पर रूबियो की विदाई के समय राजस्थान के प्रोटोकॉल विभाग के अधिकारी और भारत के विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि मौजूद थे.

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