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13 साल तक हार्ट सर्जरी का इंतजार, AIIMS में 15 साल की तन्वी की मौत, पिता ने उठाए गंभीर सवाल

राजस्थान के कोटा की 15 साल की तन्वी की AIIMS दिल्ली में मौत हो गई. वो दो साल की उम्र से जटिल जन्मजात हृदय बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल जा रही थी. परिवार ने 13 साल तक corrective heart surgery का इंतजार करने और सर्जरी की तारीखें बदलने का आरोप लगाया.

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दो साल की उम्र से AIIMS के चक्कर, लेकिन नहीं हो सकी corrective surgery (फोटो-AIIMS)

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  • 15 साल की तन्वी की AIIMS में दिल-फेफड़े के प्रत्यारोपण की तैयारी के दौरान कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई, जबकि corrective heart surgery अब संभव नहीं मानी गई थी।
  • तन्वी को 2012 में जन्मजात हृदय रोग VSD और पल्मोनरी एट्रेसिया के साथ डायग्नोज किया गया था, और 2018 में नसों की कमी के कारण सर्जरी को असंभव बताया गया था।
  • मौत के बाद परिवार ने इलाज और अस्पताल की प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए हैं, और जांच की मांग की है, जबकि अस्पताल और डॉक्टरों ने आरोपों की पुष्टि या स्पष्टीकरण नहीं दिया है।

राजस्थान के कोटा की 15 साल की तन्वी की दिल्ली के AIIMS में मौत हो गई. तन्वी महज दो साल की उम्र से जटिल जन्मजात हृदय बीमारी का इलाज कराने के लिए AIIMS आ रही थी. परिवार का आरोप था कि करीब 13 साल तक अस्पताल के चक्कर लगाने और कई बार सर्जरी की तारीख तय होने के बावजूद उसकी corrective heart surgery नहीं हो सकी. अब उसकी मौत के बाद परिवार ने इलाज और अस्पताल में हुई घटनाओं को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं.

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2012 में बीमारी का पता चला, 2013 में सर्जरी के लिए जांच

Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, तन्वी को 2012 में ‘वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट’ (ventricular septal defect) यानी VSD के साथ ‘पल्मोनरी एट्रेसिया’ (pulmonary atresia) की समस्या का पता चला था. 2013 में उसकी सर्जरी को लेकर मूल्यांकन (evaluation) किया गया था. AIIMS के 31 जनवरी 2014 के एक दस्तावेज में भी VSD और ‘पल्मोनरी एट्रेसिया’ दर्ज था. इसमें 'यूनिफोकलाइज़ेशन और कंड्यूट' (unifocalisation & conduit) सर्जरी की सिफारिश की गई थी और अनुमानित खर्च करीब 1.2 लाख रुपये बताया गया था. परिवार का कहना है कि 2015 में सर्जरी की तारीख तय हुई, लेकिन बाद में तारीख बदल गई और ऑपरेशन नहीं हो सका.

2018 में सर्जरी को बताया गया असंभव

AIIMS के CTVS विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. वी देवगौरू ने बताया कि 2018 में सर्जरी को लेकर फैसला बदल गया था और इसके बाद तन्वी का इलाज दवाओं के जरिए किया जा रहा था. 2018 की एक आंकलन (assessment) में फेफड़ों तक खून पहुंचाने वाली कुछ प्रमुख रक्त वाहिकाओं (नसों) के गैर मौजूद होने और दिल की एनाटॉमी (anatomy) को कठिन बताया गया था. डॉक्टरों के मुताबिक ‘पल्मोनरी एट्रेसिया’ के लगभग गैर मौजूद होने के कारण करैक्टिव सर्जरी अब संभव नहीं थी और ऐसी स्थिति में ऑपरेशन जानलेवा भी हो सकता था.

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ट्रांसप्लांट की तैयारी के बीच बिगड़ी तबीयत

तन्वी को 24 अगस्त को संभावित दिल-फेफड़े का प्रत्यारोपण (heart-lung transplant) की जांच के लिए AIIMS में भर्ती किया गया था. इसी प्रक्रिया के तहत सोमवार को उसकी एंडोस्कोपी हुई. डॉ. देवगौरू के मुताबिक मंगलवार तड़के करीब 2.50 बजे तन्वी ने कमजोरी और थकान की शिकायत की. वो सियानोटिक हो गई और उसका ऑक्सीजन लेवल गिरकर 48 फीसदी तक पहुंच गया. करीब 3.30 बजे उसे ऑक्सीजन दी गई, लेकिन बाद में हाइपोक्सिक स्पेल के बाद कार्डियक अरेस्ट हो गया. डॉक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन सुबह 5.06 बजे उसे मृत घोषित कर दिया.

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पिता ने जांच की मांग की, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं

तन्वी के पिता मुकेश परियानी ने आरोप लगाया कि अस्पताल में उनसे बार-बार दस्तावेज मांगे गए और कुछ मौकों पर डिस्चार्ज लेने का दबाव भी बनाया गया. उन्होंने बेटी की मौत की परिस्थितियों की जांच की मांग की है. उन्होंने ये भी कहा कि जब तक उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, वो बेटी का शव अस्पताल से नहीं ले जाएंगे. हालांकि, परिवार की ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. AIIMS और संबंधित डॉक्टरों ने भी इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि 2013 के सर्जिकल इवेलूएशन के बाद ऑपरेशन क्यों नहीं हुआ और 2018 में इसे क्यों खारिज किया गया.

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