प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार भले ही एथेनॉल ब्लेंड पेट्रोल (E20) को जोर-शोर से बढ़ावा दे रही हो, लेकिन उसके अपने समर्थकों का बड़ा वर्ग इससे पूरी तरह सहमत नहीं दिखता. C-Voter के सर्वे में सामने आया है कि नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के आधे से ज्यादा वोटर E20 पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं करना चाहते. यानी सरकार को सत्ता तक पहुंचाने वाले मतदाताओं के बीच भी E20 पॉलिसी को लेकर दुविधा और चिंता साफ तौर पर नजर आ रही है.
एथेनॉल के खिलाफ 50% से ज्यादा मोदी के वोटर, सर्वे में 75% ने कहा सस्ता हो E20 पेट्रोल
E20 का इस्तेमाल तो छोड़िए, सर्वे में शामिल 52 फीसदी लोग सरकार की E20 पॉलिसी के ही खिलाफ हैं. खुद 48.2 फीसदी NDA वोटर ने E20 पॉलिसी का विरोध किया. 24.4 फीसदी NDA वोटर इस पॉलिसी को सपोर्ट करते हैं, जबकि 27.4 फीसदी NDA वोटर कुछ भी कहने की हालत में नहीं हैं.


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, C-Voter सर्वे में पता चला कि 52.5 फीसदी NDA वोटर अपनी गाड़ियों में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं करना चाहते. केवल 18.1 फीसदी ही ऐसा करने के लिए तैयार हैं, जबकि 29.5 फीसदी NDA वोटर पसोपेश में हैं, और कोई फैसला नहीं कर पाए.
मोदी समर्थक नहीं चाहते E20विपक्षी पार्टियों के वोटर में E20 को लेकर ज्यादा मुखर विरोध सामने आया. 57.9 फीसदी विपक्षी वोटर E20 पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं करना चाहते. दूसरी पार्टियों से जुडे़ लोगों में 55 फीसदी ने भी E20 तेल को रिजेक्ट कर दिया. कुल मिलाकर, सर्वे में जवाब देने वाले 55.1 फीसदी लोगों ने कहा कि वे E20 पेट्रोल का यूज नहीं करना चाहते. केवल 17.1 फीसदी ही E20 को इस्तेमाल करने के लिए राजी हैं.
यह सर्वे ऐसे समय पर आया, जब केंद्रीय रोड ट्रांसपोर्ट और हाईवे मंत्री नितिन गडकरी ने E20 पॉलिसी के विरोधियों को सीधी चुनौती दी है. उन्होंने E20 की आलोचना करने वालों को चैलेंज दिया कि वे एक भी ऐसा व्यक्ति सामने लाएं जिसकी गाड़ी एथेनॉल ब्लेंड पेट्रोल की वजह से खराब हुई हो.
E20 का विरोध कर रहे सोशल एक्टिविस्ट तहसीन पूनावाला ने नितिन गडकरी का चैलेंज एक्सेप्ट किया और एक के बजाय छह लोगों को लाने की बात कही. लेकिन, उन्होंने शर्त रखी कि वे मीडिया से बात करने से पहले नितिन गडकरी से मिलना चाहते हैं.
भारत में केंद्र सरकार ने एथेनॉल ब्लेंड पेट्रोल (E20) को बेचना अनिवार्य कर दिया है. नॉर्मल पेट्रोल के लिए पेट्रोल पंप पर जगह नहीं बची है. सरकार के फैसले के मुताबिक, पेट्रोल पंप पर केवल E20 पेट्रोल ही मिलेगा. मोदी सरकार एक्सपर्ट्स के हवाले से E20 को सेफ बताती है, लेकिन कई गाड़ी मालिक दावा करते हैं कि E20 से उनकी गाड़ी का माइलेज कम हो गया, या उनकी गाड़ी के पार्ट्स खराब हो गए.
E20 का इस्तेमाल तो छोड़िए, सर्वे में शामिल 52 फीसदी लोग सरकार की E20 पॉलिसी के ही खिलाफ हैं. खुद 48.2 फीसदी NDA वोटर ने E20 पॉलिसी का विरोध किया. 24.4 फीसदी NDA वोटर इस पॉलिसी को सपोर्ट करते हैं, जबकि 27.4 फीसदी NDA वोटर कुछ भी कहने की हालत में नहीं हैं.
माइलेज और गाड़ी खराब होने पर क्या बोले?NDA वोटर समेत ज्यादातर लोग मानते हैं कि E20 इस्तेमाल करने से गाड़ी का माइलेज घटता है. 51.2 फीसदी NDA वोटर और ओवरऑल 52.8 लोग E20 से माइलेज घटने की बात मानते हैं. विपक्ष के वोटर इस बात को और भी ठोस तरीके से मानते हैं. 49.9 फीसदी NDA वोटर यह भी मानते हैं कि E20 का इस्तेमाल गाड़ियों को खराब कर सकता है. ओवरऑल 54.2 फीसदी लोग गाड़ी खराब होने की बात से सहमत हैं.
रेगुलर पेट्रोल भी चाहिएसर्वे में सामने आया कि NDA और विपक्ष, दोनों के वोटर E20 को अनिवार्य बनाने की पॉलिसी के खिलाफ हैं. उनकी मांग है कि पेट्रोल पंप पर E20 और नॉर्मल पेट्रोल, दोनों मिलने चाहिए. खासकर, पुरानी गाड़ी चलाने वाले इस पॉलिसी को अपने साथ नाइंसाफी मानते हैं. कुल मिलाकर, 56.3 फीसदी लोग E20 को अनिवार्य बनाने की पॉलिसी के खिलाफ हैं, जिसमें NDA के 49.2 फीसदी वोटर और विपक्ष के 65.8 फीसदी समर्थक शामिल हैं.
सर्वे में पेट्रोल पंप पर E20 और नॉर्मल पेट्रोल की मांग करने वाले लोग मुखरता से सामने आए. इनमें सरकार और विपक्ष, दोनों के समर्थक शामिल हैं. 75.9 फीसदी जवाब देने वाले चाहते थे कि दोनों तेल मिलते रहें. सभी पॉलिटिकल पार्टियों में 'कंज्यूमर चॉइस' को ज्यादा सपोर्ट मिला, जिसमें NDA वोटर में से 72.4 फीसदी शामिल थे.
E20 की कीमत घटेइस बात पर भी काफी सहमति थी कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल की कीमत रेगुलर पेट्रोल से कम होनी चाहिए. कुल मिलाकर, 74.5 फीसदी लोगों ने E20 के लिए कम कीमत को सपोर्ट किया, जिसमें NDA वोटर्स में से 75.6 फीसदी लोग शामिल थे.
लेकिन, कीमत घटाना इस बात की कतई गारंटी नहीं है कि सर्वे में शामिल लोग खुशी-खुशी E20 का इस्तेमाल करने लगेंगे. अगर दाम घटे, तो भी केवल 40.8 फीसदी लोगों ने कहा कि वे E20 का इस्तेमाल करेंगे, जबकि 40.4 फीसदी तब भी इसका इस्तेमाल नहीं करेंगे.
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सर्वे में मोदी सरकार की इस दलील पर भी लोगों की राय जानी गई कि एथेनॉल मिलाने से भारत का कच्चा तेल का इंपोर्ट कम होगा. कुल मिलाकर, 37.2 फीसदी लोग इस दावे से पूरी तरह सहमत थे और 19.5 फीसदी लोग कुछ हद तक राजी दिखे. 17.1 फीसदी लोग तो इस बात को कतई नहीं मानते, जबकि 14.1 फीसदी लोग कुछ हद तक असहमत थे.
E20 पेट्रोल के लिए सरकार के जोर देने पर 27.5 फीसदी लोगों ने कच्चे तेल का इंपोर्ट कम करने को वजह बताया. 21.3 फीसदी ने गन्ना किसानों का समर्थन करने की बात कही. 11 फीसदी का मानना था कि E20 पॉलिसी का बड़ा मकसद पॉल्यूशन कम करना है.
सर्वे कैसे हुआ?C-Voter ने ये सर्वे 8 से 9 जुलाई के बीच पूरे देश में 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के 1641 लोगों से फोन पर बात करके किया. इस तरीके को 'कंप्यूटर असिस्टेड टेलीफोन इंटरव्यूइंग' (CATI), यानी कंप्यूटर की मदद से फोन इंटरव्यू कहा जाता है.
सर्वे के नतीजों को देश की आबादी और पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों के वोटिंग पैटर्न के अनुसार एडजस्ट (वेटेज) किया गया, जिससे तस्वीर ज्यादा सही मिले. इसमें सभी राज्यों के जिलों को शामिल किया गया.
सर्वे में 'कुछ पर्सेंटेज' जोड़ने पर 100 नहीं बन सकते, क्योंकि राउंडिंग की गई है. इस सर्वे में बड़े स्तर पर लगभग 3 फीसदी और छोटे स्तर पर लगभग 5 फीसदी तक आकंड़े ऊपर-नीचे (खामी) होने की संभावना है, जिसमें 95 परसेंट कॉन्फिडेंस इंटरवल है.
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