चार राज्यों की 28 सीटों पर हुए MLC चुनाव के नतीजों की तस्वीर लगभग साफ हो गई है. ये भी साफ हो गया है कि चुनाव लड़ रहे हर दल को कुछ न कुछ हासिल जरूर हुआ है. बस हार हुई है तो कांग्रेस की. वो भी उस राज्य में जहां उसकी खुद की सरकार है. हम बात करेंगे उस चुनाव की, जिसमें हुई हार का जवाब राहुल गांधी को खोजने पर भी नहीं मिलेगा.
MLC Election 2026: सत्ता में होकर भी कांग्रेस का 'It's done bro' हो गया
MLC election result 2026: पिछले दिनों बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र की 28 सीटों पर हुए MLC चुनाव के नतीजों की तस्वीर लगभग साफ हो गई है. मगर हम कर्नाटक में हुए चुनाव की बात करेंगे. जहां कांग्रेस की सरकार है, फिर भी वो वहां हार गई.

28 MLC सीटों के लिए जो चार चुनावी राज्य थे उनमें शामिल हैं बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक. इन चार में से तीन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार है. यूपी, बिहार और महाराष्ट्र, बाकी कर्नाटक कांग्रेस शासित राज्य है. फिलहाल बात सिर्फ कांग्रेस की ही करते हैं. क्योंकि सिर्फ कांग्रेस ही है, जिसे 28 सीटों पर हुए इस चुनाव में शून्य मिला है.
चुनाव में ‘चाणक्य नीति’ काम नहीं आईकर्नाटक में सरकार कांग्रेस की है. डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री हैं. और वो भी सिद्दारमैया को हटाकर मुख्यमंत्री बने हैं. कांग्रेस के लोग डीके शिवकुमार को अपना ‘चाणक्य’ मानते हैं. लेकिन जब इसी चाणक्य के राज्य में MLC की चार सीटों पर वोटिंग हुई तो कोई चाणक्य नीति काम नहीं आई. वोटिंग के लिए दो सीटें स्नातक की थीं और दो सीटें शिक्षक निर्वाचन की. तीन सीटों पर कांग्रेस का सीधा मुकाबला बीजेपी से था, जबकि एक सीट पर मुकाबला देवगौड़ा की पार्टी जनता दल सेक्युलर से था.
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बेंगलुरु की जिस शिक्षक सीट पर कांग्रेस का मुकाबला जेडीएस से था, वो सीट कांग्रेस की ही थी. पुटन्ना वहां से MLC थे. लेकिन इस बार जेडीएस के उम्मीदवार एपी रंगनाथ ने बीजेपी की मदद से कांग्रेस उम्मीदवार को 908 वोट से मात दे दी. उत्तर पूर्वी शिक्षक सीट पहले से ही बीजेपी के खाते में थी और शशिल जी नामोशी वहां से MLC थे. उन्होंने कांग्रेस के शरणप्पा मत्तूर को मात देकर अपनी सीट बचा ली. नामोशी की ये लगातार पांचवीं जीत है. और इससे भी बड़ी बात ये है कि नामोशी ने जिस इलाके से जीत हासिल की है, उसी इलाके में कलबुर्गी भी आता है जो कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का घर है.
सपा ने जीतीं सीटें, मगर कांग्रेस यहां भी हारीदो स्नातक सीटों पश्चिम स्नातक और दक्षिण पूर्व स्नातक पर भी बीजेपी की ही जीत हुई है. पश्चिम स्नातक सीट पर बीजेपी के एस.वी. संकानूर ने जीत दर्ज की है तो दक्षिण पूर्व स्नातक से बीजेपी के चिदानंद एम गौड़ा MLC चुनाव जीत गए हैं. और जब ऐसी दुर्गति हुई है तो जाहिर है कि भाजपा को मौका मिल गया है. कर्नाटक बीजेपी ने एक्स पर एक पोस्ट किया है. इसमें मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार विधानसभा में बैठे दिख रहे हैं और उन्होंने गेंदे के फूल की माला पहनी है. इसके साथ टेक्स्ट लिखा है- 'डीके, इट्स डन ब्रो.'
कांग्रेस की हार तो महाराष्ट्र में भी हुई है और बिहार में भी. कांग्रेस के पास कहने के लिए हो सकता है कि वहां कांग्रेस विपक्ष में है. ऐसे चुनाव में सत्ताधारी पार्टी की ही जीत होती है. लेकिन अगर महाराष्ट्र-बिहार में हारने का यही तर्क है तो फिर कर्नाटक के लिए तो कांग्रेस को खोजने से भी तर्क नहीं मिलने वाला. क्योंकि MLC चुनाव में वोटिंग ईवीएम से नहीं, बैलट पेपर से हुई थी. और इसी बैलट के जरिए यूपी में सपा ने भी सीटें जीती हैं. बिहार में RJD और जनसुराज ने भी सीटें जीती हैं. महाराष्ट्र में भी शरद पवार की एनसीपी ने इसी बैलट से चुनाव जीता है.
ये स्टोरी अविनाश राय ने लिखी हैं.
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