इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बॉम्बे (IIT Bombay) के एक हॉस्टल रूम से जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं. कैंपस में इन्हें लाने का आरोप बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले एक शख्स पर लगा है. बताया गया कि आरोपी नकली पहचान पत्र से इंस्टीट्यूट में एंट्री लेकर अपने एक दोस्त के साथ हॉस्टल में रह रहा था. मगर हॉस्टल में हुई एक मामूली लड़ाई के बाद उसके कमरे की तलाशी ली गई, जहां से सिक्योरिटी को 7.65 mm के 5 कारतूस मिले.
IIT बॉम्बे के हॉस्टल में तलाशी हुई, बिहार का बंदा फर्जी आईडी और 5 कारतूसों के साथ पकड़ा गया
IIT Bombay cartridges: पवई पुलिस ने बिहार के रहने वाले 23 साल के शख्स को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि उसने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बॉम्बे (IIT Bombay) के एक हॉस्टल रूम में जिंदा कारतूस रखे थे. युवक अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने मुंबई आया था.
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मामले की सूचना पुलिस को दी गई, जिसमें पूछताछ के बाद 23 साल के आरोपी सर्वोत्तम चौधरी को गिरफ्तार कर लिया. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 12 फरवरी को चौधरी अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने मुंबई आया था. उसका बचपन का दोस्त अपूर्व मिश्रा IIT बॉम्बे में पढ़ाई कर रहा है. बताया गया कि फर्जी आईडी कार्ड की मदद से वो हॉस्टल में गेस्ट के तौर पर रह रहा था.
किसी को भनक भी नहीं थी कि कॉलेज में किसी के पास बंदूक की गोलियां हैं. मगर आरोपी का सारा खेल पांचवें दिन सामने आ गया. अपूर्व मिश्रा के रूममेट सूरज दुबे और दूसरे स्टूडेंट के बीच किसी बात पर बहस हो गई थी. सिक्योरिटी उनकी लड़ाई रुकवाने पहुंची, तो पाया कि दुबे और मिश्रा ने शराब पी रखी है, जो कैंपस में मना है. फिर सिक्योरिटी सुपरवाइजर और उनकी टीम ने रूम नंबर 93 की तलाशी ली. छानबीन के दौरान एक काले बैग से टीम को कारतूस मिले. पूछताछ में अपूर्व मिश्रा ने बताया कि ये उसके दोस्त सर्वोत्तम चौधरी का है.
एक सिक्योरिटी स्टाफ मेंबर की शिकायत के आधार पर आर्म्स एक्ट के तहत चौधरी पर FIR दर्ज की गई. रिपोर्ट के मुताबिक, पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने बुलेट बिहार के मुंगेर से खरीदी थी. पुलिस ने चौधरी को गिरफ्तार कर उसके परिवार को मामले की जानकारी दे दी है.
पुलिस कई एंगल से मामले की जांच कर रही है. अधिकारियों को शक है कि आरोपी ने कुछ राउंड के साथ एक हथियार बेचा होगा और बाकी कारतूसों के लिए खरीदार ढूंढ रहा होगा. उसके कॉल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है ताकि पता लगा सके कि उसका लोकल अपराधियों से कोई संबंध है या नहीं. मगर इस घटना ने इंस्टीट्यूट की सिक्योरिटी पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी का कहना है, “कैंपस में जाते समय कोई उचित स्कैनिंग या तलाशी नहीं होती है.”
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