खजुराहो एयरपोर्ट (HJR)...देश का ऐसा एयरपोर्ट, जहां का हर पैसेंजर संतुष्ट…किसी भी यात्री को एयरपोर्ट की व्यवस्था से कोई शिकायत नहीं… कम से कम एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया का तो यही कहना है. अब आप कहेंगे कि हां तो इसमें दिक्कत क्या है? तो जनाब, दिक्कत बस इतनी सी है कि खजुराहो एयरपोर्ट से आज की तारीख में ना तो कोई फ्लाइट टेक ऑफ करती है और ना ही कोई फ्लाइट यहां लैंड करती है. बोले तो एयर ट्रैफिक पूरी तरह से सस्पेंड है.
ना कोई फ्लाइट, ना कोई यात्री, फिर भी ग्राहक संतुष्टि में नंबर वन है खजुराहो एयरपोर्ट
Khajuraho Airport Ranked No 1: खजुराहो एयरपोर्ट को बिना किसी कमर्शियल फ्लाइट के ग्राहक संतुष्टि में देश में पहला स्थान मिला है. एयरपोर्ट अथॉरिटी के एक सर्वे में ये अनोखा रिजल्ट आया है.

क्यों चौंक गए ना… एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया यानी AAI के लेटेस्ट कस्टमर सेटिस्फैक्शन इंडेक्स यानी CSI का नतीजा देखने हर शख्स ऐसे ही चौंक रहा है. इस सर्वे की मेहरबानी से खजुराहो एयरपोर्ट देश का पहला ऐसा अजूबा हवाई हड्डा बन गया है, जहां फ्लाइट और पैसेंजर्स जीरो होने के बावजूद Customer Satisfaction बोले तो ग्राहक संतुष्टि सौ फीसदी है.
खजुराहो में विमान सेवाएं सस्पेंड हैं
‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक 1 जुलाई से खजुराहो एयरपोर्ट में विमान सेवाएं पूरी तरह से बंद पड़ी हैं. ऐसा ऑपरेशनल वजहों से हुआ है. किसी भी सूरत में अक्टूबर 2026 से पहले खजुराहों से फ्लाइट शुरू होने के आसार नहीं हैं.
सिर्फ इतना ही नहीं 1 जुलाई से विमान सेवाएं बंद होने से पहले भी खजुराहो से इक्का दुक्का फ्लाइट्स ही उड़ान भरती थीं. ‘मनी कंट्रोल’ के मुताबिक वहां साल में गिने-चुने यानी दिल्ली और वाराणसी को जोड़ने वाले सिर्फ दो विमान हुआ करते थे और वो भी अब फिलहाल बंद हैं.
रिपोर्ट बताती है कि इस एयरपोर्ट की टर्मिनल बिल्डिंग साठ के दशक के आख़िर में बन गई थी, जबकि पहली उड़ान ने सत्तर के दशक में छलांग लगाई थी. इतने कम इतिहास के बावजूद इसने उस भीड़भाड़ वाले महानगरों के अड्डों को मात दे दी जहां यात्री सीढ़ियों पर बैठने को मजबूर रहते हैं.
खजुराहो एयरपोर्ट के डायरेक्टर संतोष सिंह ने ‘इकोनॉमिक टाइम्स’ से बात करते हुए उम्मीद जताई कि अक्टूबर से उड़ान सेवाएं पटरी पर लौट आएंगी. हालांकि उन्होंने इस सस्पेंशन के पीछे की कोई लंबी-चौड़ी वजह नहीं बताई.
सर्वे में नंबर वन कैसे बना खजुराहो
इतना सब जान लेने के बाद अब आप पूछेंगे कि जब प्लेन ही नहीं है तो ग्राहक संतुष्टि किस बात की? तो जनाब असली खेला सर्वे के उन 33 पैमानों में छिपा है जिसके आधार पर स्वतंत्र एजेंसियां साल में दो बार यात्रियों से फीडबैक लेती हैं.
इसमें पार्किंग से लेकर वाई-फाई, साफ-सफाई और खाने-पीने के स्टॉल तक सब कुछ शामिल होता है. जहां भीड़ नहीं होती और साफ-सफाई मक्खन जैसी हो, वहां स्टाफ का बर्ताव देख लोग खुश हो ही जाते हैं. कुल मिलाकर बात ये है कि जहां विमान का शोर न हो, वहां सुकून सबसे ज़्यादा नंबर ले आता है.
ये भी पढ़ें: सारी नदियां आपस में जुड़ जातीं तो क्या हमेशा के लिए मिट जाती बाढ़ और सूखे की तबाही?
वीडियो: मुंबई एयरपोर्ट पर सिगरेट फूंकने वाला कौन है?













